दुर्ग केबल विवाद: शिकायत निवारण करने गए कर्मचारी को धमकी, दो पर FIR दर्ज
दुर्ग केबल विवाद ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। ग्रैंड विजन केबल कंपनी के फील्ड कर्मचारी को शिकायत निवारण के दौरान धमकी दी गई, जिसके बाद दो लोगों पर FIR दर्ज की गई है।
दुर्ग केबल विवाद एक बार फिर चर्चा में है, जब बोरसी बस्ती स्थित अटल आवास में केबल संबंधी शिकायत का निराकरण करने पहुंचे ग्रैंड विजन केबल कंपनी के फील्ड कर्मचारी शशिकांत राय को गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। इस घटना ने स्थानीय केबल कारोबार में व्याप्त तनाव और आपराधिक तत्वों के बढ़ते हस्तक्षेप को उजागर किया है। पीड़ित की शिकायत पर पद्मनाभपुर थाना पुलिस ने अक्षय शर्मा उर्फ लक्की और मिथलेश के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना केबल ऑपरेटरों के बीच प्रतिस्पर्धा के नाम पर चल रही अवैध गतिविधियों की ओर इशारा करती है, जिससे क्षेत्र में शांति व्यवस्था भंग होने का खतरा मंडरा रहा है।

शिकायत और FIR का विवरण
पीड़ित शशिकांत राय ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि वह ग्रैंड विजन केबल कंपनी में फील्ड कर्मचारी के तौर पर कार्यरत हैं। 4 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 12:30 बजे, वह बोरसी बस्ती अटल आवास स्थित शिव मंदिर के पास एक केबल संबंधी शिकायत का समाधान करने पहुंचे थे। उसी समय, अक्षय शर्मा उर्फ लक्की और मिथलेश नामक दो व्यक्ति वहां आ धमके। आरोप है कि दोनों ने शशिकांत को धमकाते हुए कहा कि वे इस क्षेत्र में केबल का काम नहीं कर सकते। इसके बाद, उन्होंने गाली-गलौज करते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी दी। शशिकांत के अनुसार, इस पूरी घटना को चुन्नी लाल यादव सहित आसपास मौजूद कई लोगों ने देखा और सुना है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296 (लोक शांति भंग करना), 351(3) (आपराधिक धमकी), और 3(5) (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। यह गंभीर आरोप स्थानीय केबल व्यवसाय में बढ़ते दबाव और भय के माहौल को दर्शाते हैं।
केबल कारोबार में बढ़ते दबाव और धमकी के आरोप
इस घटना के पीछे केबल कारोबार में गहरे जड़ जमाए दबाव और धमकी का एक बड़ा नेटवर्क होने का आरोप है। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि अक्षय शर्मा और मिथलेश, एक मल्टीनेशनल कंपनी GTPL के उच्चाधिकारी मनीष श्रीवास्तव और स्थानीय सहायक बबलू भाटिया के साथ मिलकर क्षेत्र के केबल ऑपरेटरों पर लगातार दबाव बनाते हैं। यह भी आरोप है कि ये लोग स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों, असामाजिक तत्वों और शराब कारोबार से जुड़े लठैतों का इस्तेमाल कर स्वतंत्र रूप से व्यवसाय करने वाले केबल ऑपरेटरों को गाली-गलौज और धमकी देते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य अन्य ऑपरेटरों को व्यवसाय करने से रोकना और क्षेत्र में अपना एकाधिकार स्थापित करना है। इन गतिविधियों के कारण केबल प्रसारण को लेकर विवाद की स्थिति पैदा हो रही है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। शिकायतकर्ता पक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि ऐसी गतिविधियों के जरिए छत्तीसगढ़ की शांति भंग करने और कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।
आपराधिक पृष्ठभूमि और धोखाधड़ी के मामले
मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। बताया जा रहा है कि आरोपी अक्षय शर्मा का संबंध अशोक शर्मा नामक व्यक्ति से है, जिसकी आपराधिक प्रवृत्ति जगजाहिर है। अशोक शर्मा के खिलाफ दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में पहले भी कई आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं और वह इन मामलों में जेल भी जा चुका है। इसके अलावा, उस पर स्थानीय मल्टी सिस्टम ऑपरेटर (MSO) से बड़ी राशि लेकर धोखाधड़ी करने का आरोप भी है। इस धोखाधड़ी के मामले में उच्च न्यायालय में एक याचिका भी दाखिल की गई है। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि ये सभी लोग मिलकर केबल व्यवसाय का अपराधीकरण कर रहे हैं, जिससे ईमानदार व्यवसायी भयभीत हैं और उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने में बाधा आ रही है। यह स्थिति न केवल आर्थिक प्रतिस्पर्धा को बाधित कर रही है, बल्कि समाज में आपराधिक तत्वों के बढ़ते प्रभाव को भी दर्शाती है।
उच्च अधिकारियों तक पहुंची शिकायत
इस गंभीर दुर्ग केबल विवाद को लेकर शिकायतकर्ता पक्ष ने देश और राज्य के सर्वोच्च अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाई है। प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को इस पूरे मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए शिकायतें भेजी गई हैं। इसके साथ ही, राज्यपाल से अशोक शर्मा के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई करने की भी अपील की गई है, ताकि उसकी आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके और क्षेत्र में शांति बहाल हो सके। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, GTPL के अधिकारी मनीष श्रीवास्तव और अन्य संचालकों पर की गई शिकायत की जांच भी शुरू कर दी गई है। यह दर्शाता है कि यह मामला अब केवल स्थानीय पुलिस स्टेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है, जिससे इसके समाधान की उम्मीद बढ़ गई है।
विरात महानगर का विश्लेषण: दुर्ग में केबल कारोबार से जुड़े इस दुर्ग केबल विवाद ने स्थानीय व्यापारिक माहौल में गहरे धंसे भ्रष्टाचार और आपराधिक तत्वों के प्रभाव को उजागर किया है। एक ओर जहां ग्रैंड विजन जैसे सेवा प्रदाता ग्राहकों को बेहतर सुविधा देने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ प्रभावशाली व्यक्ति और समूह गैरकानूनी तरीकों से बाजार पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे मामलों में त्वरित और निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई न केवल पीड़ित कर्मचारियों और कंपनियों को न्याय दिलाएगी, बल्कि यह सुनिश्चित करेगी कि छत्तीसगढ़ में व्यवसाय करने के लिए एक सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण बना रहे। प्रशासन को इस मामले की तह तक जाकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और छोटे व्यवसायी भी बिना किसी डर के काम कर सकें।
दुर्ग केबल विवाद — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q. दुर्ग केबल विवाद क्या है?
A. दुर्ग के बोरसी बस्ती में ग्रैंड विजन केबल कंपनी के एक कर्मचारी को शिकायत निवारण के दौरान गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई, जिस पर पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। यह घटना स्थानीय केबल कारोबार में बढ़ते दबाव और आपराधिक हस्तक्षेप से जुड़ी है।
Q. इस मामले में किस कंपनी के कर्मचारी को धमकी दी गई?
A. इस मामले में ग्रैंड विजन केबल कंपनी के फील्ड कर्मचारी शशिकांत राय को धमकी दी गई है।
Q. किन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है?
A. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296, 351(3) और 3(5) के तहत अक्षय शर्मा उर्फ लक्की और मिथलेश के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
Q. आरोपियों पर और क्या आरोप हैं?
A. आरोपियों पर GTPL के अधिकारियों और स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों के साथ मिलकर अन्य केबल ऑपरेटरों पर दबाव बनाने, उन्हें धमकी देने और व्यवसाय में बाधा डालने का भी आरोप है। एक आरोपी का संबंध अशोक शर्मा नामक आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति से भी है।
Q. क्या इस मामले में उच्च अधिकारियों से शिकायत की गई है?
A. जी हां, शिकायतकर्ता पक्ष ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से शिकायत की है। साथ ही, राज्यपाल से अशोक शर्मा के खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई की भी अपील की गई है।
आधिकारिक संदर्भ: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय
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