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54 करोड़ का इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूल अधूरा, चार साल बाद भी बदहाल

📑 इस लेख मेंरायपुर में 54 करोड़ का सरकारी इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूल चार साल बाद भी अधूरा, दीवारों में दरारें, झाड़ियां उगीं, प्रबंधन तय नहीं होने से काम…

📅 24 March 2026, 11:25 am अपडेट: 16 May 2026
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Photo by Amit Rai on Pexels

रायपुर में 54 करोड़ का सरकारी इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूल चार साल बाद भी अधूरा, दीवारों में दरारें, झाड़ियां उगीं, प्रबंधन तय नहीं होने से काम रुका।


ड्रीम प्रोजेक्ट बना उपेक्षा का शिकार

रायपुर में 54 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला सरकारी इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूल चार साल बाद भी अधूरा पड़ा है।

जिस प्रोजेक्ट को शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाला माना जा रहा था, वह अब बदहाली और लापरवाही का प्रतीक बन गया है।

निर्माण कार्य ठप

स्कूल का निर्माण कार्य लंबे समय से बंद पड़ा है।

बताया जा रहा है कि प्रबंधन तय नहीं होने के कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है, जिससे परियोजना अधर में लटकी हुई है।

भवन की हालत खराब

अधूरे निर्माण के चलते भवन की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।

दीवारों में दरारें आ चुकी हैं और परिसर में झाड़ियां उग आई हैं, जिससे यह जगह वीरान नजर आती है।

करोड़ों का निवेश बेकार

इस परियोजना पर अब तक करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन इसका लाभ छात्रों को नहीं मिल पा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर काम पूरा न होने से लागत और बढ़ने की संभावना है।

शिक्षा व्यवस्था पर असर

इस स्कूल के शुरू न होने से उन छात्रों को नुकसान हो रहा है, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा देने का दावा किया गया था।

परियोजना के विलंब से शिक्षा व्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

जिम्मेदारों पर सवाल

इस मामले ने संबंधित विभाग और अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी परियोजना में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।

जांच और कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने मामले की जांच की मांग की है।

उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई कर जल्द से जल्द निर्माण कार्य पूरा करने की अपील की है।

प्रशासन की चुप्पी

अब तक इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।

लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही इस पर ठोस कदम उठाए जाएंगे।

भविष्य की उम्मीद

यदि निर्माण कार्य जल्द शुरू होता है, तो यह स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

फिलहाल यह प्रोजेक्ट अपनी बदहाल स्थिति के कारण चर्चा में बना हुआ है।


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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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