असहाय हुए निकाय: चुंगी क्षति की 125 करोड़ से भरपाई, फिर भी आत्मनिर्भर नहीं
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चुंगी खत्म होने के बाद 125 करोड़ की भरपाई के बावजूद छत्तीसगढ़ के नगरीय निकाय आत्मनिर्भर नहीं बन पाए, विकास कार्यों पर असर दिखने लगा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। चुंगी (ऑक्ट्रॉय) समाप्त होने के बाद सरकार द्वारा 125 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति देने के बावजूद अधिकांश नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत आत्मनिर्भर नहीं बन पाए हैं। इससे विकास कार्यों और बुनियादी सेवाओं पर असर पड़ने लगा है।
चुंगी समाप्ति के बाद बढ़ी आर्थिक निर्भरता
राज्य में चुंगी समाप्त होने के बाद नगरीय निकायों की आय का एक बड़ा स्रोत खत्म हो गया था। इसके बाद राज्य सरकार ने निकायों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए 125 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान की। हालांकि, यह राशि भी निकायों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में पर्याप्त साबित नहीं हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश नगरीय निकाय अभी भी राज्य सरकार पर निर्भर हैं और अपने राजस्व स्रोतों को बढ़ाने में सफल नहीं हो पाए हैं।
आय के सीमित स्रोत बने चुनौती
नगरीय निकायों की आय मुख्य रूप से संपत्ति कर, जल कर, स्वच्छता शुल्क और अन्य स्थानीय करों से होती है। लेकिन इनकी वसूली दर कम होने के कारण आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पा रही है। कई निकायों में कर संग्रहण प्रणाली भी प्रभावी नहीं है।
इसके अलावा, बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण के कारण खर्च लगातार बढ़ रहा है, जिससे निकायों की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो रही है।
विकास कार्यों पर पड़ रहा असर
वित्तीय संकट के चलते कई नगरीय निकायों में सड़क, नाली, पेयजल और स्वच्छता से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कई योजनाएं बजट के अभाव में अधूरी रह जाती हैं, जिससे नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़ता है।
नगर प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि यदि निकायों को आत्मनिर्भर बनाना है, तो उन्हें नए राजस्व स्रोत विकसित करने होंगे और कर संग्रहण प्रणाली को मजबूत करना होगा।
आत्मनिर्भर बनने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने के लिए संपत्ति कर में सुधार, डिजिटल भुगतान व्यवस्था और सार्वजनिक-निजी भागीदारी जैसे उपाय अपनाने होंगे। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर संसाधनों का बेहतर उपयोग भी जरूरी है।
सरकार की पहल
राज्य सरकार द्वारा निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं। लेकिन इन योजनाओं का प्रभाव तभी दिखेगा जब निकाय अपने स्तर पर भी प्रयास करेंगे।
नागरिकों की भूमिका भी अहम
कर भुगतान के प्रति नागरिकों की जागरूकता भी महत्वपूर्ण है। यदि लोग समय पर कर का भुगतान करें, तो निकायों की आय बढ़ सकती है और विकास कार्यों को गति मिल सकती है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, चुंगी क्षति की भरपाई के लिए 125 करोड़ रुपये दिए जाने के बावजूद छत्तीसगढ़ के नगरीय निकाय आत्मनिर्भर नहीं बन पाए हैं। अब जरूरत है कि राजस्व बढ़ाने और वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल
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