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छत्तीसगढ़-जगदलपुर में कलेक्टर ने किया जनदर्शन का आयोजन, नागरिकों ने समस्याओं के दिए आवेदन

जगदलपुर। बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर में कलेक्टर हरिस एस के मार्गदर्शन में आज कलेक्टर जनदर्शन का आयोजन किया गया। अपर कलेक्टर सी.पी. बघेल ने जनदर्शन में पहुँचे…

📅 7 January 2025, 3:20 am अपडेट: 19 May 2026
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जगदलपुर। बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर में कलेक्टर हरिस एस के मार्गदर्शन में आज कलेक्टर जनदर्शन का आयोजन किया गया। अपर कलेक्टर सी.पी. बघेल ने जनदर्शन में पहुँचे नागरिकों के आवेदनों पर आवश्यक कार्यवाही के लिए संबंधित विभागों को त्वरित निर्देश जारी किए।

शासन के निर्देशानुसार जनदर्शन कलेक्टर हरिस एस के निर्देशन में आम जनता की समस्याओं के निराकरण के लिए प्रत्येक सोमवार को जिला कार्यालय के आस्था हॉल में सुबह 10:30 बजे से शाम 4 बजे तक आयोजित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, कलेक्टर द्वारा समस्त विभागों में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारियों की समस्याओं के निराकरण के लिए प्रत्येक माह के तीसरे मंगलवार को आस्था हॉल में सुबह 10:30 बजे से “अधिकारी-कर्मचारी जनदर्शन” का आयोजन किया जाएगा।

जनदर्शन: जन-प्रशासन संवाद का माध्यम

“जनदर्शन” छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह प्रणाली नागरिकों को सीधे जिला प्रशासन के सर्वोच्च अधिकारी तक पहुँचने का माध्यम प्रदान करती है, जिसमें वे अपनी व्यक्तिगत समस्याएँ, सरकारी विभागों से संबंधित शिकायतें, और सामुदायिक मुद्दे लिखित आवेदन के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं। इसका उद्देश्य प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाना और जनता का विश्वास सुदृढ़ करना है।

पहले राज्य के मुख्यमंत्री स्तर पर “मुख्यमंत्री जनदर्शन” आयोजित होता था, जिसकी सफलता को देखते हुए जिला स्तर पर भी इस मॉडल का विस्तार किया गया। बस्तर जैसे आदिवासी बहुल जिले में यह व्यवस्था और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों के लिए शहरी प्रशासन तक पहुँच पाना अन्यथा कठिन होता है।

बस्तर के नागरिकों की प्रमुख समस्याएँ

बस्तर क्षेत्र में आमतौर पर निम्न प्रकार की समस्याएँ जनदर्शन में आती हैं — भूमि से संबंधित विवाद, राजस्व रिकॉर्ड में त्रुटियाँ, वन अधिकार पट्टे (FRA) के मामले, सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलने की शिकायतें, छात्रवृत्ति या पेंशन में देरी, सड़क-बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की माँग, और कई बार पुलिस-प्रशासन से जुड़ी शिकायतें। आदिवासी समुदाय के लिए ये मुद्दे अक्सर जीवन-यापन से सीधे जुड़े होते हैं।

अधिकारी-कर्मचारी जनदर्शन का विशेष महत्व

कलेक्टर द्वारा प्रत्येक माह के तीसरे मंगलवार को अधिकारी-कर्मचारियों के लिए अलग जनदर्शन का प्रावधान एक अनूठा कदम है। सरकारी कर्मचारियों की सेवा-संबंधी समस्याएँ, स्थानांतरण, पदोन्नति, वेतन विसंगति, अनुकंपा नियुक्ति, और सेवानिवृत्ति लाभ जैसे मुद्दे अक्सर लंबित रहते हैं। ऐसे विशेष फोरम के माध्यम से इन मुद्दों का त्वरित निराकरण संभव होता है, जिससे प्रशासनिक कार्य-संस्कृति में सुधार आता है।

जनदर्शन की प्रभावशीलता

जनदर्शन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि प्राप्त आवेदनों पर कितनी तत्परता से कार्रवाई होती है। केवल आवेदन स्वीकार करना पर्याप्त नहीं है — आवश्यक यह है कि संबंधित विभाग समयबद्ध तरीके से उनका निराकरण करें और आवेदक को परिणाम की जानकारी दी जाए। कई जिलों में अब डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम भी अपनाया जा रहा है जिससे आवेदक अपने आवेदन की स्थिति ऑनलाइन देख सकें।

विरात महानगर का विश्लेषण: कलेक्टर जनदर्शन एक अच्छा प्रशासनिक मॉडल है, परंतु इसकी वास्तविक सफलता आवेदनों के समयबद्ध निराकरण में निहित है। बस्तर जैसे जिले में, जहाँ दशकों से नक्सलवाद, गरीबी और प्रशासनिक उपेक्षा साथ-साथ रही है, जनदर्शन एक प्रशासनिक सुधार से कहीं अधिक — आदिवासी समुदायों और राज्य के बीच पुनर्विश्वास बहाली का माध्यम है। आवश्यकता यह है कि प्रत्येक आवेदन को एक संख्या मिले, उसकी प्रगति पारदर्शी हो, और अंत में आवेदक तक उत्तर पहुँचे। यदि यह सुनिश्चित हो सके, तो जनदर्शन वास्तव में “सुशासन” का पर्याय बन सकता है।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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