श्री श्री श्री कांची कामाक्षी देवी माता मंदिर, सेक्टर-5 भिलाई में धूमधाम से मना शारदीय नवरात्रि महोत्सव पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पाण्डेय हुए शामिल, पढ़ें पूरी जानकारी
श्री श्री श्री कांची कामाक्षी देवी माता मंदिर, सेक्टर-5 भिलाई में धूमधाम से मना शारदीय नवरात्रि महोत्सव पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पाण्डेय हुए शामिल 150 से 200 महिलाओं ने विधि-विधान से किया सामूहिक कुमकुम अर्चन सुबह से देर रात तक उमड़ा दर्शनार्थियों का जनसैलाब, समाज के पदाधिकारियों के
श्री श्री श्री कांची कामाक्षी देवी माता मंदिर, सेक्टर-5 भिलाई में धूमधाम से मना शारदीय नवरात्रि महोत्सव पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पाण्डेय हुए शामिल 150 से 200 महिलाओं ने विधि-विधान से किया सामूहिक कुमकुम अर्चन सुबह से देर रात तक उमड़ा दर्शनार्थियों का जनसैलाब, समाज के पदाधिकारियों के नेतृत्व में आयोजन संपन्न भिलाई (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ अग्निकुल क्षत्रिय समाजम् के तत्वावधान में श्र — विराट महानगर के लिए विशेष रिपोर्ट।

नवरात्रि की पावन पंचमी तिथि के शुभ अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष माननीय श्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय विशेष रूप से मंदिर परिसर पहुंचे। उनके आगमन पर मंदिर समिति और समाज के सदस्यों में भारी उत्साह देखा गया। श्री पाण्डेय ने माँ कांची कामाक्षी देवी के श्रीचरणों में अत्यंत श्रद्धा के साथ शीश नवाया और पूरे विधि-विधान से माता की पूजा-अर्चना की। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और सद्भाव की मंगल कामना की। मंदिर आगमन पर छत्तीसगढ़ अग्निकुल क्षत्रिय समाजम् के पदाधिकारियों एवं वरिष्ठ सदस्यों द्वारा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष का पुष्पगुच्छ और शॉल भेंट कर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। श्री पाण्डेय ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में एकता और सकारात्मकता का संचार करते हैं।

इस वर्ष के महोत्सव का एक मुख्य आकर्षण मंदिर की महिला समिति के तत्वावधान में आयोजित भव्य सामूहिक कुमकुम पूजा रही। पंचमी के विशेष अवसर पर आयोजित इस विशेष अनुष्ठान में लगभग 150 से 200 महिलाओं ने एक साथ भाग लिया। पारंपरिक परिधानों में सुसज्जित होकर पहुंची इन महिलाओं ने पूर्ण विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच माँ कामाक्षी का सामूहिक कुमकुम अर्चन किया। यह दृश्य अत्यंत मनोरम और आध्यात्मिक शक्ति से परिपूर्ण था। सामूहिक रूप से की गई इस आराधना का उद्देश्य परिवार, समाज और राष्ट्र के कल्याण की कामना करना था। मंदिर प्रांगण में गूंजते मंत्रों और धूप-दीप की सुगंध ने उपस्थित सभी भक्तों को एक अलग ही लोक में पहुँचा दिया, जहाँ केवल भक्ति और विश्वास का वास था।
पंचमी के पावन अवसर पर मंदिर में दर्शनार्थियों की भीड़ का आलम यह था कि सुबह की पहली आरती से लेकर देर रात तक भक्तों का अनवरत तांता लगा रहा। भिलाई पॉवर हाउस और इसके आसपास के विभिन्न क्षेत्रों जैसे खुर्सीपार, चरोदा और सेक्टर क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखे। सुरक्षा और व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए समाज के स्वयंसेवकों और पदाधिकारियों ने बेहतरीन प्रबंधन किया, जिससे वृद्धों और बच्चों सहित सभी भक्तों को सुगमता से दर्शन प्राप्त हुए। माता के दिव्य और अलौकिक स्वरूप के दर्शन पाकर श्रद्धालु स्वयं को धन्य महसूस कर रहे थे। पंचमी की विशेष पुष्प सज्जा और विद्युत सज्जा ने मंदिर की भव्यता में चार चाँद लगा दिए थे, जो रात के समय और भी मनमोहक लग रहा था।

इस वृहद धार्मिक अनुष्ठान को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में छत्तीसगढ़ अग्निकुल क्षत्रिय समाजम् के पदाधिकारियों का उल्लेखनीय और सक्रिय योगदान रहा। समाज के अध्यक्ष श्री डिल्लेश्वर राव तामाड़, महासचिव श्री बी. पापा राव और कोषाध्यक्ष श्री टी. मानेश्वर राव के कुशल मार्गदर्शन में पूरी टीम दिन-रात व्यवस्थाओं में जुटी रही। आयोजन की सफलता के पीछे खुर्सीपार, चरोदा और सेक्टर क्षेत्र के समस्त पदाधिकारियों, महिला समिति के सदस्यों और माँ के अनन्य भक्तों की कड़ी मेहनत और समर्पण रहा है। समाज के प्रत्येक सदस्य ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ किया, जिससे इतने बड़े जनसमूह के आगमन के बावजूद पूरा कार्यक्रम सुव्यवस्थित और अनुशासित तरीके से संचालित किया जा सका।

अंततः, भिलाई का यह कांची कामाक्षी देवी मंदिर न केवल एक प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में अपनी पहचान सुदृढ़ कर रहा है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का भी एक बड़ा केंद्र बन गया है। नवरात्रि के इस नौ दिवसीय उत्सव ने स्थानीय निवासियों के बीच भक्ति की एक नई लहर पैदा कर दी है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की गरिमामयी उपस्थिति और सामूहिक कुमकुम अर्चन जैसे विशेष आयोजनों ने इस वर्ष के महोत्सव को और भी विशिष्ट और यादगार बना दिया है। समाज के पदाधिकारियों ने संकल्प लिया है कि वे भविष्य में भी इसी प्रकार के धार्मिक और सामाजिक कार्यों के माध्यम से समाज को जोड़ने और अपनी सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखने का प्रयास करते रहेंगे। यह आयोजन श्रद्धा, प्राचीन परंपरा और आधुनिक सामाजिक प्रबंधन का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश करता है।
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