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छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था पर संकट, 50 हजार से ज्यादा शिक्षक पद खाली, कॉलेजों में शोध और पढ़ाई प्रभावित

📑 इस लेख मेंछत्तीसगढ़ में 50 हजार से अधिक शिक्षक पद खाली होने से स्कूल और कॉलेजों की पढ़ाई व शोध प्रभावित, शिक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों और…

📅 2 March 2026, 5:59 pm अपडेट: 16 May 2026
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छत्तीसगढ़ में 50 हजार से अधिक शिक्षक पद खाली होने से स्कूल और कॉलेजों की पढ़ाई व शोध प्रभावित, शिक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ी।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था इन दिनों गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। राज्य भर में स्कूलों में 50 हजार से अधिक शिक्षक पद रिक्त होने के कारण न केवल विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध कार्य और अकादमिक गतिविधियां भी बुरी तरह बाधित हो रही हैं।

शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में लंबे समय से नियमित भर्ती नहीं हो पाने के कारण शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। कई विद्यालय ऐसे हैं, जहां एक ही शिक्षक को कई कक्षाओं का जिम्मा संभालना पड़ रहा है। इसका सीधा असर बच्चों की गुणवत्ता वाली शिक्षा पर पड़ रहा है।

राज्य के कई ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों में स्थिति और भी चिंताजनक बताई जा रही है। वहां विषय विशेषज्ञ शिक्षक नहीं होने के कारण विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे विषयों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षक न मिलने से बच्चों की बुनियादी समझ कमजोर हो रही है और वे प्रतियोगी परीक्षाओं में पिछड़ते जा रहे हैं।


कॉलेजों में भी स्टाफ की भारी कमी

सिर्फ स्कूल ही नहीं, बल्कि महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में भी शिक्षकों और प्राध्यापकों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। कई सरकारी कॉलेजों में स्थायी प्राध्यापकों की कमी के कारण अतिथि शिक्षकों के भरोसे पढ़ाई कराई जा रही है।

शोध कार्यों की बात करें तो मार्गदर्शक प्राध्यापकों की कमी के कारण शोध छात्रों को पर्याप्त मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। कई विभागों में शोध परियोजनाएं अटक गई हैं और विद्यार्थियों का अकादमिक भविष्य असमंजस में है।

कॉलेज प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि नई शिक्षा नीति के तहत शोध और नवाचार को बढ़ावा देने की बात तो की जा रही है, लेकिन जब तक पर्याप्त संख्या में योग्य शिक्षक और प्रोफेसर नियुक्त नहीं होंगे, तब तक इन योजनाओं का लाभ जमीन पर नहीं दिखेगा।


छात्रों और अभिभावकों में बढ़ती चिंता

राज्य के विभिन्न जिलों से आ रही प्रतिक्रियाओं में छात्र और अभिभावक दोनों ही शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जता रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण वे मजबूरी में बच्चों को निजी स्कूलों में भेजने पर विवश हो रहे हैं, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।

वहीं कॉलेज के छात्र बताते हैं कि कई विषयों में पूरे सत्र में नियमित कक्षाएं नहीं हो पातीं। परीक्षा नजदीक आने पर सिलेबस अधूरा रह जाता है, जिससे परिणाम पर भी असर पड़ता है।


विशेषज्ञों की राय

शिक्षाविदों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर रिक्त पद बने रहना राज्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है। यदि जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो आने वाले वर्षों में राज्य का शैक्षणिक स्तर और गिर सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षकों की कमी केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इससे विद्यार्थियों का समग्र विकास, करियर मार्गदर्शन और नवाचार आधारित शिक्षा भी प्रभावित होती है।


भर्ती प्रक्रिया में देरी बनी बड़ी समस्या

सूत्रों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया से जुड़े तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से वर्षों से शिक्षक नियुक्ति अटकी हुई है। पद स्वीकृत होने के बावजूद चयन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। इससे विभागीय कामकाज पर भी दबाव बढ़ रहा है।

इस पूरे मामले में छत्तीसगढ़ सरकार से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि रिक्त पदों की समीक्षा की जा रही है और चरणबद्ध तरीके से नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।


शिक्षा के भविष्य पर बड़ा सवाल

छत्तीसगढ़ जैसे नवगठित और विकासशील राज्य के लिए मजबूत शिक्षा व्यवस्था बेहद जरूरी मानी जाती है। लेकिन 50 हजार से अधिक शिक्षक पदों का खाली रहना यह संकेत देता है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो राज्य के लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है।

शिक्षा से जुड़े संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से मांग की है कि प्राथमिकता के आधार पर शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि स्कूलों और कॉलेजों में शैक्षणिक माहौल फिर से मजबूत हो सके।

राज्य में शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अब सबकी नजरें प्रशासन के अगले फैसलों पर टिकी हुई हैं।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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