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स्वच्छता सर्वेक्षण में सख्ती सरकारी संस्थानों में पान–गुटखा के दाग मिले तो कटेंगे अंक, रैंकिंग पर पड़ेगा सीधा असर

📑 इस लेख मेंस्वच्छता सर्वेक्षण में पान–गुटखा के दाग मिलने पर सरकारी संस्थानों के अंक कटेंगे, जिससे रायपुर सहित शहरों की स्वच्छता रैंकिंग प्रभावित होगी।🚫 पान–गुटखा पर जीरो…

📅 3 January 2026, 11:15 am अपडेट: 16 May 2026
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स्वच्छता सर्वेक्षण में पान–गुटखा के दाग मिलने पर सरकारी संस्थानों के अंक कटेंगे, जिससे रायपुर सहित शहरों की स्वच्छता रैंकिंग प्रभावित होगी।

रायपुर। देशभर में होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर इस बार नियमों में सख्ती बढ़ा दी गई है। केंद्र सरकार और स्वच्छ भारत मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुसार अब सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों, स्कूलों और अन्य शासकीय परिसरों में पान–गुटखा के दाग-धब्बे पाए जाने पर सीधे अंक काटे जाएंगे, जिससे शहर की स्वच्छता रैंकिंग खराब हो सकती है। रायपुर सहित छत्तीसगढ़ के सभी नगरीय निकायों को इस संबंध में सतर्क कर दिया गया है।


🚫 पान–गुटखा पर जीरो टॉलरेंस

स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 के तहत इस बार जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है।

  • दीवारों
  • सीढ़ियों
  • शौचालय
  • प्रवेश द्वार
  • लिफ्ट और गलियारों

में अगर पान, गुटखा या तंबाकू के थूक के निशान मिले, तो उस संस्था के अंक घटेंगे। इसके साथ ही संबंधित नगरीय निकाय की कुल रैंकिंग भी प्रभावित होगी।


🏢 सरकारी दफ्तरों की विशेष निगरानी

नगर निगम और स्वच्छता विभाग की टीमें अब—

  • कलेक्ट्रेट
  • निगम कार्यालय
  • सरकारी अस्पताल
  • स्कूल-कॉलेज
  • पुलिस कार्यालय

जैसे स्थानों का नियमित निरीक्षण करेंगी। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सरकारी परिसरों को पूरी तरह तंबाकू मुक्त और स्वच्छ बनाए रखें


📉 रैंकिंग पर सीधा प्रभाव

स्वच्छता सर्वेक्षण में—

  • साफ-सफाई
  • कचरा प्रबंधन
  • सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति
  • नागरिक व्यवहार

को प्रमुख मानक माना जाता है। पान–गुटखा के दाग नकारात्मक नागरिक व्यवहार की श्रेणी में आते हैं, जिससे शहर के कुल अंकों में कटौती होगी और राष्ट्रीय स्तर पर रैंकिंग नीचे जा सकती है।


🧹 सफाईकर्मियों पर भी बढ़ेगी जिम्मेदारी

इस नई व्यवस्था के बाद—

  • सफाई कर्मचारियों को अतिरिक्त सतर्कता रखनी होगी
  • रोजाना दीवारों और कोनों की सफाई करनी होगी
  • समय-समय पर चूना या विशेष क्लीनिंग करानी होगी

हालांकि विभाग का कहना है कि सिर्फ सफाई ही नहीं, लोगों की आदत बदलना ज्यादा जरूरी है।


📢 जनजागरूकता अभियान होगा तेज

नगर निगम द्वारा—

  • पोस्टर और होर्डिंग
  • माइक से अनाउंसमेंट
  • स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम

के जरिए पान–गुटखा न थूकने का संदेश दिया जाएगा। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर थूकने वालों पर स्पॉट फाइन लगाने की कार्रवाई भी तेज होगी।


⚖️ जुर्माने का भी प्रावधान

नगर निगम एक्ट के तहत—

  • सार्वजनिक स्थल पर थूकने
  • गंदगी फैलाने

पर जुर्माना लगाया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान सख्ती से चालान काटे जाएंगे


🏥 अस्पतालों और स्कूलों पर खास फोकस

अस्पताल और शिक्षण संस्थान को मॉडल स्वच्छ परिसर बनाने के निर्देश दिए गए हैं। यहां यदि गुटखा या पान के निशान मिले तो उसे गंभीर लापरवाही माना जाएगा।


🗣️ अधिकारियों का कहना

स्वच्छता विभाग के अधिकारियों का कहना है कि—

“स्वच्छता केवल सफाई का मुद्दा नहीं, बल्कि नागरिक जिम्मेदारी है। सरकारी परिसरों में पान–गुटखा के दाग पाए गए तो इसका सीधा असर शहर की रैंकिंग पर पड़ेगा।”


🤝 नागरिक सहयोग जरूरी

प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि—

  • सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से बचें
  • दूसरों को भी ऐसा न करने के लिए प्रेरित करें
  • स्वच्छता को अपनी आदत बनाएं

ताकि रायपुर स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर स्थान हासिल कर सके।


🔚 निष्कर्ष

स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर रैंक पाने के लिए अब केवल कचरा उठाना पर्याप्त नहीं है। पान–गुटखा मुक्त सरकारी संस्थान और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार ही रायपुर को स्वच्छ शहरों की सूची में ऊपर ला सकते हैं।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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