एपीएल–बीपीएल राशन कार्ड में गड़बड़ी के आरोप पर विधानसभा में हंगामा। बीजेपी विधायकों ने जांच समिति बनाने की मांग कर सरकार को घेरा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंगलवार को एपीएल–बीपीएल राशन कार्ड विवाद को लेकर जमकर हंगामा हुआ। प्रश्नकाल के दौरान इस मुद्दे पर विपक्षी बीजेपी विधायकों ने सरकार को घेरते हुए जांच समिति गठित करने की जोरदार मांग की। मामला गरीबों के हक के राशन और अपात्र लोगों को लाभ मिलने से जुड़ा होने के कारण सदन में माहौल गर्म हो गया।
क्या है पूरा विवाद
बीजेपी विधायकों का आरोप है कि राज्य में एपीएल (Above Poverty Line) और बीपीएल (Below Poverty Line) राशन कार्ड के निर्धारण में भारी गड़बड़ी हुई है। कई ऐसे परिवार जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं, उन्हें बीपीएल कार्ड जारी कर दिया गया, जबकि वास्तविक गरीब और पात्र हितग्राही सूची से बाहर रह गए। इससे गरीबों को मिलने वाला सस्ता अनाज प्रभावित हो रहा है।
सदन में तीखी बहस
जैसे ही यह मुद्दा उठा, विपक्षी सदस्यों ने सरकार पर लापरवाही और पक्षपात के आरोप लगाए। बीजेपी विधायकों ने कहा कि राशन कार्ड वितरण में पारदर्शिता नहीं है और अधिकारियों की मिलीभगत से गड़बड़ियां हो रही हैं। हंगामे के दौरान कई बार कार्यवाही बाधित हुई।
जांच समिति की मांग
बीजेपी विधायकों ने मांग की कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की जाए, जो एपीएल–बीपीएल कार्डों की समीक्षा करे और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करे। उनका कहना था कि जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक गरीबों को न्याय नहीं मिलेगा।
सरकार का जवाब
खाद्य विभाग की ओर से सरकार ने सदन में सफाई देते हुए कहा कि राशन कार्ड की नियमित समीक्षा की जा रही है और जहां भी गड़बड़ी पाई जा रही है, वहां सुधार किया जा रहा है। सरकार ने यह भी कहा कि पात्र हितग्राहियों का नाम जोड़ने और अपात्रों को सूची से हटाने की प्रक्रिया जारी है।
वॉकआउट की चेतावनी
सरकार के जवाब से संतुष्ट न होने पर बीजेपी विधायकों ने वॉकआउट की चेतावनी दी और कहा कि यदि जांच समिति नहीं बनी तो आंदोलन को सदन के बाहर भी ले जाया जाएगा।
जनता से जुड़ा मुद्दा
यह मामला सीधे तौर पर गरीबों के खाद्य सुरक्षा अधिकार से जुड़ा है। जानकारों का मानना है कि अगर समय रहते विवाद का समाधान नहीं हुआ, तो इसका असर आम जनता पर पड़ सकता है।

