छत्तीसगढ़ विधानसभा में राशन कार्ड मुद्दे पर हंगामा, बीजेपी विधायक ने खाद्य मंत्री को घेरा, एपीएल–बीपीएल सूची में गड़बड़ी और गरीबों के हक का सवाल उठाया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान राशन कार्ड से जुड़ा मुद्दा जोर-शोर से उठा। सदन में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायकों ने एपीएल और बीपीएल राशन कार्ड में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। प्रश्नकाल के दौरान बीजेपी विधायक ने खाद्य मंत्री से सीधे सवाल करते हुए कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में पात्र लोगों के नाम राशन कार्ड सूची से बाहर हैं, जबकि अपात्र लोगों को भी इसका लाभ मिल रहा है।
बीजेपी विधायक ने आरोप लगाया कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की लापरवाही के चलते गरीब और जरूरतमंद परिवारों को राशन मिलने में परेशानी हो रही है। कई क्षेत्रों में महीनों से राशन कार्ड नवीनीकरण और नए कार्ड जारी करने की प्रक्रिया लंबित है। विधायक ने यह भी कहा कि एपीएल–बीपीएल वर्गीकरण में भारी गड़बड़ी है, जिससे वास्तविक गरीब परिवार सरकारी योजनाओं से वंचित हो रहे हैं।
खाद्य मंत्री का जवाब
सदन में जवाब देते हुए खाद्य मंत्री ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ राशन वितरण व्यवस्था चला रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में राशन कार्डों का सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है, ताकि अपात्र लाभार्थियों को सूची से हटाया जा सके और पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ मिल सके। मंत्री ने यह भी कहा कि यदि कहीं त्रुटियां सामने आती हैं तो उन्हें सुधारने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए हैं।
विपक्ष का तीखा हमला
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट बीजेपी विधायकों ने सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना था कि जमीनी हकीकत सरकार के दावों से अलग है। कई जिलों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि गरीब परिवारों को राशन नहीं मिल पा रहा, जबकि प्रभावशाली लोग सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं।
सदन में हंगामे की स्थिति
इस मुद्दे पर बहस के दौरान सदन में कुछ देर के लिए हंगामे की स्थिति भी बनी। बीजेपी विधायकों ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए समिति गठित करने की मांग की। हालांकि, अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद स्थिति सामान्य हुई और आगे की कार्यवाही जारी रही।
आम जनता से जुड़ा मुद्दा
राशन कार्ड से जुड़ा यह मामला सीधे आम जनता और गरीब वर्ग से जुड़ा है। ऐसे में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। विधानसभा में उठे सवालों के बाद अब सबकी नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

