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बारनवापारा में दिखा दुर्लभ ऑरेंज-ब्रेस्टेड ग्रीन-पिजन

📑 इस लेख मेंबारनवापारा अभयारण्य में दुर्लभ ऑरेंज-ब्रेस्टेड ग्रीन-पिजन देखा गया, बर्ड सर्वे में विशेष फोटोग्राफी, जैव विविधता संरक्षण को मिला नया प्रमाण।बर्ड सर्वे के दौरान हुआ दुर्लभ…

📅 22 January 2026, 3:40 pm अपडेट: 16 May 2026
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बारनवापारा अभयारण्य में दुर्लभ ऑरेंज-ब्रेस्टेड ग्रीन-पिजन देखा गया, बर्ड सर्वे में विशेष फोटोग्राफी, जैव विविधता संरक्षण को मिला नया प्रमाण।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध बारनवापारा अभयारण्य में एक बार फिर जैव विविधता की समृद्ध तस्वीर सामने आई है। हाल ही में आयोजित बर्ड सर्वे के दौरान दुर्लभ ऑरेंज-ब्रेस्टेड ग्रीन-पिजन (Orange-breasted Green Pigeon) की मौजूदगी दर्ज की गई, जिसकी विशेष फोटोग्राफी भी की गई। इस पक्षी का दिखना प्रदेश के पक्षी विज्ञान और संरक्षण प्रयासों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह पक्षी सामान्यतः भारत के कुछ चुनिंदा जंगलों और पूर्वी तथा दक्षिणी एशिया के घने वन क्षेत्रों में पाया जाता है। बारनवापारा जैसे मध्य भारत के वन क्षेत्र में इसका दिखना विशेषज्ञों के लिए आश्चर्य और खुशी दोनों का विषय है।


बर्ड सर्वे के दौरान हुआ दुर्लभ अवलोकन

वन विभाग और स्थानीय बर्ड वॉचर्स की संयुक्त टीम द्वारा—

  • प्रातःकालीन ट्रेल सर्वे
  • जलाशयों के आसपास निगरानी
  • दूरबीन और हाई-रेजोल्यूशन कैमरों से निरीक्षण

के दौरान यह पक्षी देखा गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह पक्षी आमतौर पर—

  • ऊँचे वृक्षों की ऊपरी डालियों में
  • फलदार पेड़ों के आसपास
  • शांत और कम मानवीय गतिविधि वाले क्षेत्रों में

दिखाई देता है।


क्यों खास है ऑरेंज-ब्रेस्टेड ग्रीन-पिजन?

ऑरेंज-ब्रेस्टेड ग्रीन-पिजन को दुर्लभ इसलिए माना जाता है क्योंकि—

  • इसकी संख्या सीमित है
  • यह बहुत चुनिंदा आवासों में ही रहता है
  • सामान्य सर्वेक्षणों में इसका दिखना कम होता है
  • यह पारिस्थितिकी संतुलन का महत्वपूर्ण संकेतक पक्षी है

इस पक्षी की पहचान—

  • हरे शरीर पर चमकीला नारंगी सीना
  • हल्के पीले पंख
  • शांत स्वभाव और फलों पर निर्भर आहार

से की जाती है।


विशेष फोटोग्राफी से मिला वैज्ञानिक रिकॉर्ड

बर्ड सर्वे टीम ने—

  • इस पक्षी की स्पष्ट तस्वीरें
  • अलग-अलग कोणों से डॉक्यूमेंटेशन
  • समय, स्थान और पर्यावरणीय स्थिति का रिकॉर्ड

तैयार किया है।

इन तस्वीरों को अब—

  • वन विभाग के डाटाबेस
  • राज्य स्तरीय जैव विविधता रजिस्टर
  • और राष्ट्रीय बर्ड रिकॉर्ड पोर्टल

पर अपलोड किया जाएगा।

वन अधिकारियों के अनुसार, यह रिकॉर्ड भविष्य के संरक्षण कार्यक्रमों और शोध कार्यों के लिए बेहद उपयोगी होगा।


बारनवापारा की बढ़ती जैव विविधता का संकेत

विशेषज्ञ मानते हैं कि—

  • बारनवापारा में वन संरक्षण की स्थिति बेहतर हुई है
  • जल स्रोतों की उपलब्धता बढ़ी है
  • मानवीय हस्तक्षेप नियंत्रित हुआ है

इसी कारण यहाँ दुर्लभ प्रजातियों का लौटना शुरू हुआ है।

पिछले कुछ वर्षों में यहाँ—

  • ग्रे हॉर्नबिल
  • ब्लैक-हेडेड ओरिओल
  • और कई प्रवासी पक्षियों

की संख्या में भी वृद्धि दर्ज की गई है।


वन विभाग की प्रतिक्रिया

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि—

  • ऐसे दुर्लभ पक्षियों की उपस्थिति से
  • संरक्षण नीति को नई दिशा मिलेगी
  • अभयारण्य क्षेत्र में निगरानी और बढ़ाई जाएगी
  • बर्ड टूरिज्म को भी प्रोत्साहन मिल सकता है

आने वाले समय में यहाँ—

  • नियमित बर्ड सर्वे
  • फोटोग्राफी वर्कशॉप
  • और स्कूल-कॉलेज के लिए नेचर एजुकेशन टूर

आयोजित करने की योजना है।


निष्कर्ष

बारनवापारा अभयारण्य में ऑरेंज-ब्रेस्टेड ग्रीन-पिजन का दिखना यह साबित करता है कि छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्र आज भी दुर्लभ जैव संपदा के सुरक्षित आश्रय बने हुए हैं। यह खोज न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षण की प्रेरणा भी है।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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