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मकर संक्रांति उत्सव: मलयाली समाज ने अयप्पा मंदिर को 21 हजार दीपों से रोशन किया

📑 इस लेख मेंमकर संक्रांति पर रायपुर के अयप्पा मंदिर में मलयाली समाज ने 21 हजार दीप जलाए। मंदिर की 18 सीढ़ियां जीवन और अनुशासन का संदेश देती…

📅 15 January 2026, 11:04 am अपडेट: 16 May 2026
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मकर संक्रांति पर रायपुर के अयप्पा मंदिर में मलयाली समाज ने 21 हजार दीप जलाए। मंदिर की 18 सीढ़ियां जीवन और अनुशासन का संदेश देती हैं।

रायपुर। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर राजधानी रायपुर में मलयाली समाज द्वारा भव्य धार्मिक आयोजन किया गया। शहर स्थित श्री अयप्पा मंदिर को इस अवसर पर 21 हजार दीपों से रोशन किया गया, जिससे पूरा परिसर दिव्य और आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर हो गया। दीपों की रोशनी से सजे मंदिर ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और भक्ति का अनूठा अनुभव कराया।

इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाजजन और भक्त शामिल हुए। दीप प्रज्वलन के साथ विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और अयप्पा स्वामी के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।


मकर संक्रांति पर विशेष महत्व

मलयाली समाज में मकर संक्रांति का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इस दिन भगवान अयप्पा की विशेष आराधना की जाती है। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन अयप्पा स्वामी की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और आत्मिक शुद्धता प्राप्त होती है।

मंदिर समिति के अनुसार, हर वर्ष इस पर्व को सामूहिक रूप से मनाया जाता है, लेकिन इस बार दीपों की संख्या बढ़ाकर 21 हजार की गई, जो समाज की एकता और आस्था का प्रतीक है।


18 सीढ़ियों का आध्यात्मिक संदेश

अयप्पा मंदिर की 18 पवित्र सीढ़ियां इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहीं। इन सीढ़ियों का गहरा आध्यात्मिक महत्व है। मंदिर के पुजारियों और समाज के वरिष्ठजनों ने बताया कि—

  • ये 18 सीढ़ियां मानव जीवन के 18 मूल गुणों और अनुशासनों का प्रतीक हैं
  • इनमें इंद्रियों पर नियंत्रण, सत्य, अहिंसा, करुणा, धैर्य, त्याग और आत्मसंयम जैसे संदेश छिपे हैं
  • भक्त जब इन सीढ़ियों को पार करते हैं, तो वे अपने जीवन की नकारात्मकताओं को त्यागने का संकल्प लेते हैं

सीढ़ियों के दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं ने नियम, संयम और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा।


दीपों से सजा मंदिर, दिखा अद्भुत नजारा

21 हजार दीपों से सजा अयप्पा मंदिर रात के समय किसी दिव्य लोक जैसा प्रतीत हो रहा था। दीपों की कतारें मंदिर प्रांगण, प्रवेश द्वार और आसपास के क्षेत्र में सजाई गई थीं। भक्तों ने इसे “आस्था और प्रकाश का महासंगम” बताया।

श्रद्धालुओं का कहना था कि इस तरह का आयोजन न केवल धार्मिक भावना को मजबूत करता है, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है।


समाज की एकजुटता का उदाहरण

इस आयोजन में मलयाली समाज के सभी वर्गों—बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों—की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। समाज के सदस्यों ने आयोजन की तैयारियों में कई दिनों तक श्रमदान किया।

मलयाली समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक मूल्यों से जोड़ते हैं। उन्होंने भविष्य में और भी बड़े स्तर पर धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही।


श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास

कार्यक्रम के दौरान विशेष आरती, प्रसाद वितरण और सामूहिक प्रार्थना का आयोजन भी किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान अयप्पा से परिवार की सुख-शांति, समाज की समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की।

कई श्रद्धालुओं ने कहा कि दीपों की रोशनी में की गई प्रार्थना से उन्हें मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति हुई।


निष्कर्ष

मकर संक्रांति के अवसर पर मलयाली समाज द्वारा आयोजित यह दीपोत्सव न केवल धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक मूल्यों का जीवंत उदाहरण भी बना। 21 हजार दीपों से रोशन अयप्पा मंदिर और 18 सीढ़ियों के संदेशों ने श्रद्धालुओं के मन में आस्था और अनुशासन का नया प्रकाश जगाया।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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