छत्तीसगढ़ सरकार ने स्वच्छता दीदियों को बड़ी राहत देते हुए 93 करोड़ 60 लाख रुपए की मानदेय राशि जारी की, जिससे हजारों कर्मियों को लाभ मिलेगा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेशभर में कार्यरत स्वच्छता दीदियों को बड़ी राहत देते हुए 93 करोड़ 60 लाख रुपए की मानदेय राशि जारी कर दी है। लंबे समय से मानदेय भुगतान का इंतजार कर रही स्वच्छता दीदियों के लिए यह खबर किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है। सरकार के इस फैसले से हजारों स्वच्छता कर्मियों को आर्थिक संबल मिलेगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार यह राशि नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों के माध्यम से स्वच्छता दीदियों के खातों में सीधे भेजी जाएगी। जारी की गई राशि में लंबित मानदेय के साथ-साथ निर्धारित अवधि का भुगतान भी शामिल है। इससे प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत स्वच्छता दीदियों को बड़ा लाभ मिलेगा।
स्वच्छता दीदियां राज्य के स्वच्छ भारत मिशन और नगरीय स्वच्छता अभियानों की रीढ़ मानी जाती हैं। वे घर-घर कचरा संग्रहण, साफ-सफाई, कचरा प्रबंधन और जन-जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में लगातार योगदान दे रही हैं। इसके बावजूद कई जगहों पर मानदेय भुगतान में देरी की शिकायतें सामने आती रही हैं।
राज्य सरकार ने इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए मानदेय राशि जारी करने का निर्णय लिया। संबंधित विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि राशि का शीघ्र वितरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी स्वच्छता दीदी को भुगतान से वंचित न रहना पड़े।
सरकार का कहना है कि स्वच्छता दीदियों के कार्य का सम्मान करना और उन्हें समय पर मानदेय देना प्रशासन की प्राथमिकता है। स्वच्छ और स्वस्थ छत्तीसगढ़ के निर्माण में उनकी भूमिका को देखते हुए भविष्य में भी उनके हित में योजनाएं लागू की जाएंगी।
मानदेय राशि जारी होने की सूचना मिलते ही स्वच्छता दीदियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। कई दीदियों ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा और वे और अधिक मनोयोग से अपने कार्य को अंजाम दे सकेंगी।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को निर्देश जारी किए हैं कि वे पारदर्शिता के साथ भुगतान प्रक्रिया पूरी करें। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर मानदेय भुगतान से स्वच्छता व्यवस्था में सुधार आएगा और कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा। यह निर्णय राज्य की स्वच्छता रैंकिंग और स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों को हासिल करने में भी सहायक साबित होगा।

