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‘महिला की शारीरिक संरचना पर टिप्पणी को उत्पीड़न माना जाएगा’, केरल हाईकोर्ट का फैसला

नई दिल्ली। केरल हाईकोर्ट ने महिलाओं की शारीरिक संरचना पर टिप्प्णी को यौन उत्पीड़न करार दिया है। केरल हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति ए बदरुद्दीन ने एक याचिका पर सुनवाई…

📅 7 January 2025, 10:50 pm अपडेट: 16 May 2026
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नई दिल्ली।

केरल हाईकोर्ट ने महिलाओं की शारीरिक संरचना पर टिप्प्णी को यौन उत्पीड़न करार दिया है। केरल हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति ए बदरुद्दीन ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि ऐसी टिप्पणी को यौन उत्पीड़न का अपराध मानते हुए कार्रवाई की जानी चाहिए।

केरल राज्य विद्युत बोर्ड (केएसईबी) के एक पूर्व कर्मचारी पर उसी कार्यालय की एक महिला कर्मचारी ने आरोप लगाए थे। महिला ने कहा था कि आरोपी पूर्व कर्मचारी ने 2013 से उसके खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। इसके बाद 2016-17 में आपत्तिजनक संदेश और वॉयस कॉल करना शुरू कर दिया। केएसईबी और पुलिस में शिकायत के बावजूद वह उसे आपत्तिजनक संदेश भेजता रहा। कई शिकायतों के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 354 ए (यौन उत्पीड़न) और 509 (महिला की शील का अपमान) और केरल पुलिस अधिनियम की धारा 120 (ओ) (अवांछित कॉल, पत्र, लिखित, संदेश द्वारा संचार के किसी भी माध्यम से उपद्रव पैदा करना) के तहत मामला दर्ज किया। आरोपी ने यौन उत्पीड़न के मामले को रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। आरोपी ने याचिका में दावा किया कि किसी व्यक्ति के शरीर की अच्छी संरचना होने का मात्र उल्लेख करने पर उसे आईपीसी की धारा 354 ए और 509 तथा केरल पुलिस अधिनियम की धारा 120 (ओ) के दायरे में यौन उत्पीड़न के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। वहीं अभियोजन पक्ष और महिला ने तर्क दिया कि आरोपी के कॉल और संदेशों में अभद्र टिप्पणियां थीं। वह उसे परेशान करता था। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया आईपीसी की धारा 354ए और 509 तथा केरल पुलिस अधिनियम की धारा 120 (ओ) के तहत अपराध के लिए उपयुक्त तत्व सामने आते हैं। अदालत ने आरोपी की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने 6 जनवरी के आदेश में कहा कि मामले के तथ्यों पर गौर करने के बाद यह स्पष्ट है कि प्रथम दृष्टया अभियोजन पक्ष का मामला कथित अपराधों को आकर्षित करने के लिए बनाया गया है। इसके चलते आपराधिक विविध मामला खारिज हो जाता है।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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