बंसल बंधुओं को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, लेकिन क्या कानून से बच पाएंगे?
गुवाहाटी(असम)। सुप्रीम कोर्ट एक विवादास्पद फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने हरिश बंसल और खुशदीप बंसल को जमानत दे दी है, जिससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या…
गुवाहाटी(असम)। सुप्रीम कोर्ट
एक विवादास्पद फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने हरिश बंसल और खुशदीप बंसल को जमानत दे दी है, जिससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या प्रभावशाली लोग कानून से ऊपर हैं?
क्या है मामला, और कैसे मिली राहत?
कामरूप (मेट्रो) के अतिरिक्त सत्र न्यायालय संख्या-5 में दर्ज सेशन्स केस नंबर 93/2024 में दोनों आरोपियों के खिलाफ गंभीर आरोप थे। बावजूद इसके, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में SLA (Crl.) No. 17962/24 और SLP (Crl.) No. 17698/24 दायर कर 20 जनवरी 2025 को अंतरिम जमानत ले ली, जिसे 12 फरवरी 2025 को नियमित जमानत में बदल दिया गया।
क्यों उठ रहे हैं सवाल?
- गंभीर आरोपों के बावजूद जमानत?
ट्रायल पूरा होने से पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या प्रभावशाली लोगों को विशेष छूट मिल रही है? - जमानत की शर्तें महज़ दिखावा?
गवाहों को प्रभावित न करने की शर्त रखी गई, लेकिन क्या यह सुनिश्चित हो पाएगा?
आरोपियों को हर सुनवाई में उपस्थित रहना होगा, लेकिन कोर्ट में “अनुपस्थित रहने की छूट” लेने के मामले पहले भी देखे गए हैं।
- क्या ट्रायल प्रभावित होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर आरोपी ट्रायल में बाधा डालते हैं, तो ट्रायल कोर्ट इसकी रिपोर्ट भेज सकता है। लेकिन क्या वास्तव में निचली अदालतें इतने प्रभावशाली लोगों के खिलाफ रिपोर्ट भेजने का साहस कर पाएंगी?
न्याय व्यवस्था पर सवाल
कामरूप (मेट्रो) अदालत ने 24 जनवरी 2025 को अंतरिम जमानत दी थी, जिसे अब स्थायी रूप से लागू कर दिया गया है।
अगली सुनवाई 29 मार्च 2025 को होगी, लेकिन क्या इससे कुछ बदलेगा?
क्या न्याय का गला घोंटा जा रहा है?
बंसल बंधुओं पर लगे आरोप गंभीर हैं, लेकिन अभी तक कोर्ट के दस्तावेज़ों में अपराध की पूरी जानकारी उजागर नहीं की गई है।
क्या यह मामला भी उन केसों की फेहरिस्त में जुड़ जाएगा, जहां प्रभावशाली लोग सिस्टम को धत्ता बताकर बच निकलते हैं?
निष्कर्ष:
हरिश बंसल और खुशदीप बंसल को भले ही अस्थायी राहत मिल गई हो, लेकिन जनता के मन में यह सवाल बना रहेगा – क्या कानून सबके लिए बराबर है, या सिर्फ आम आदमी के लिए?







