रायपुर की जल विहार कॉलोनी में अवैध कमर्शियल दुकानों पर हाई कोर्ट सख्त, नगर निगम से रिपोर्ट तलब, रिहायशी क्षेत्र में व्यवसाय पर कार्रवाई के संकेत।
रायपुर। राजधानी रायपुर की पॉश और आवासीय मानी जाने वाली जल विहार कॉलोनी में नियमों के खिलाफ संचालित हो रही कमर्शियल दुकानों को लेकर अब छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए नगर प्रशासन और संबंधित विभागों से जवाब तलब किया है और साफ संकेत दिए हैं कि रिहायशी कॉलोनी में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह मामला लंबे समय से स्थानीय रहवासियों की शिकायतों के बाद सामने आया है, जिसमें कॉलोनी के भीतर दुकानों, ऑफिस और अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के संचालन को लेकर आपत्ति जताई गई थी।
आवासीय क्षेत्र में चल रही थीं दुकानें
जल विहार कॉलोनी मूल रूप से एक आवासीय क्षेत्र के रूप में विकसित की गई थी। कॉलोनी के ले-आउट और भू-उपयोग (लैंड यूज) के अनुसार यहां केवल आवासीय निर्माण और उससे जुड़ी गतिविधियों की अनुमति है।
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां कई मकानों और प्लॉट्स को दुकानों, ब्यूटी पार्लर, कोचिंग सेंटर, ऑफिस और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा। इससे न केवल कॉलोनी की मूल संरचना प्रभावित हुई, बल्कि रहवासियों को पार्किंग, शोर-शराबे और ट्रैफिक जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ा।
रहवासियों की शिकायत के बाद कोर्ट तक पहुंचा मामला
स्थानीय निवासियों ने नगर निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से कई बार शिकायत की, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर अंततः मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा।
याचिका में कहा गया कि—
- कॉलोनी को रिहायशी घोषित किया गया है
- व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति नहीं ली गई
- नियमों की अनदेखी कर अवैध रूप से दुकानें संचालित की जा रही हैं
हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि किसी भी रिहायशी कॉलोनी में नियमों के विपरीत व्यवसायिक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी क्षेत्र को मास्टर प्लान में आवासीय घोषित किया गया है, तो वहां बिना अनुमति व्यावसायिक उपयोग न केवल अवैध है, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों का भी उल्लंघन है।
कोर्ट ने प्रशासन से यह स्पष्ट करने को कहा है कि—
- जल विहार कॉलोनी का अधिकृत भूमि उपयोग क्या है
- कितनी दुकानों और प्रतिष्ठानों को संचालन की अनुमति दी गई है
- किन मामलों में नियमों का उल्लंघन पाया गया है
नगर निगम और प्रशासन से मांगी रिपोर्ट
अदालत ने रायपुर नगर निगम और टाउन प्लानिंग विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे पूरे क्षेत्र का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करें।
रिपोर्ट में यह बताना होगा कि—
- कितने भवनों का उपयोग आवासीय के बजाय व्यावसायिक रूप में किया जा रहा है
- क्या इन भवनों को किसी प्रकार की अनुमति दी गई है
- यदि अनुमति नहीं है, तो अब तक क्या कार्रवाई की गई
कॉलोनी में बढ़ रही थीं समस्याएं
रहवासियों का कहना है कि दुकानों और कार्यालयों के खुलने से कॉलोनी का शांत वातावरण पूरी तरह खत्म हो गया है। सुबह से देर रात तक वाहनों की आवाजाही, सड़क किनारे अवैध पार्किंग और भीड़भाड़ आम हो गई है।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि कई बार एंबुलेंस और अन्य जरूरी सेवाओं के वाहन भी संकरी सड़कों में फंस जाते हैं। इसके अलावा सुरक्षा और निजता से जुड़ी समस्याएं भी लगातार बढ़ रही हैं।
नियमों के तहत क्या कहता है कानून
नगर विकास नियमों के अनुसार किसी भी कॉलोनी को जिस उद्देश्य से विकसित किया गया है, उसी उद्देश्य के अनुरूप उसका उपयोग किया जाना जरूरी होता है। आवासीय क्षेत्र में बिना अनुमति दुकान, कार्यालय या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करना अवैध माना जाता है।
यदि किसी भवन का उपयोग बदलना है, तो इसके लिए संबंधित प्राधिकरण से भू-उपयोग परिवर्तन (Change of Land Use) की अनुमति अनिवार्य होती है।
प्रशासन की लापरवाही भी कटघरे में
हाई कोर्ट की टिप्पणी से साफ है कि इस मामले में केवल दुकानदार ही नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि यदि बिना अनुमति लंबे समय तक दुकानें चलती रहीं, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
आगे क्या हो सकता है
कोर्ट में अगली सुनवाई पर नगर निगम और प्रशासन को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। यदि रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आती हैं, तो अवैध रूप से संचालित दुकानों को बंद कराने और सीलिंग की कार्रवाई के आदेश भी दिए जा सकते हैं।
इसके अलावा भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश भी जारी हो सकते हैं।
शहर के अन्य इलाकों पर भी पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि जल विहार कॉलोनी का मामला केवल एक कॉलोनी तक सीमित नहीं है। रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में कई रिहायशी क्षेत्रों में इसी तरह नियमों के खिलाफ व्यवसायिक गतिविधियां चल रही हैं।
यदि इस मामले में सख्त आदेश जारी होते हैं, तो इसका असर अन्य कॉलोनियों पर भी पड़ेगा और वहां भी कार्रवाई तेज हो सकती है।
रहवासियों को मिली उम्मीद
हाई कोर्ट की सख्ती के बाद जल विहार कॉलोनी के निवासियों को अब राहत की उम्मीद जगी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती है, तो कॉलोनी का मूल स्वरूप और शांति दोनों बचाई जा सकती हैं।

