युद्ध से प्रभावित तिलापिया निर्यात, 200 करोड़ नुकसान आशंका

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कवर्धा और कांकेर से अमेरिका भेजी जाने वाली 20 हजार टन तिलापिया मछली निर्यात प्रभावित, युद्ध जारी रहा तो 200 करोड़ नुकसान

रायपुर। छत्तीसगढ़ के कवर्धा और कांकेर जिलों में उत्पादित तिलापिया मछली का निर्यात संयुक्त राज्य अमेरिका तक किया जाता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात और युद्ध जैसी स्थिति के कारण निर्यात प्रभावित हो गया है। करीब 20 हजार टन तिलापिया मछली भेजने में परेशानी आ रही है। यदि जल्द हालात सामान्य नहीं हुए तो मछली उत्पादकों को करीब 200 करोड़ रुपए तक का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। 🐟

अंतरराष्ट्रीय हालात से प्रभावित निर्यात

तिलापिया मछली का उत्पादन करने वाले किसानों और निर्यातकों ने बताया कि विदेशों में मांग बनी हुई है, लेकिन युद्ध और परिवहन संबंधी बाधाओं के कारण निर्यात प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इससे बड़ी मात्रा में तैयार मछली स्टॉक में फंस गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, तिलापिया मछली का निर्यात समय पर करना जरूरी होता है, क्योंकि लंबे समय तक स्टोरेज में रखने से लागत बढ़ जाती है और गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है।

20 हजार टन मछली फंसी

जानकारी के मुताबिक, कवर्धा और कांकेर जिले में बड़े पैमाने पर तिलापिया मछली का उत्पादन किया जाता है। वर्तमान में करीब 20 हजार टन मछली निर्यात के लिए तैयार है, लेकिन शिपमेंट में देरी होने के कारण किसानों और निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है। 📦

मछली उत्पादकों का कहना है कि यदि जल्द निर्यात नहीं हुआ तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

200 करोड़ नुकसान की आशंका

निर्यात प्रभावित होने से करीब 200 करोड़ रुपए तक का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसमें शामिल हैं:

  • मछली उत्पादन लागत
  • फीड और रखरखाव खर्च
  • कोल्ड स्टोरेज खर्च
  • परिवहन लागत

इन सभी कारणों से उत्पादकों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ सकता है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर

तिलापिया मछली उत्पादन से हजारों लोगों को रोजगार मिलता है। इसमें शामिल हैं:

  • मछली पालक
  • श्रमिक
  • परिवहन कर्मी
  • प्रोसेसिंग यूनिट कर्मचारी

निर्यात प्रभावित होने से इन सभी पर असर पड़ सकता है।

अमेरिका में बढ़ती मांग

तिलापिया मछली की संयुक्त राज्य अमेरिका में काफी मांग है। छत्तीसगढ़ से भेजी जाने वाली मछली की गुणवत्ता अच्छी मानी जाती है, जिसके कारण निर्यात लगातार बढ़ रहा था। 🌍

लेकिन वर्तमान हालात ने निर्यात प्रक्रिया को प्रभावित कर दिया है।

सरकार से मदद की मांग

मछली उत्पादकों और निर्यातकों ने सरकार से मदद की मांग की है। उनका कहना है कि:

  • वैकल्पिक बाजार उपलब्ध कराए जाएं
  • निर्यात प्रक्रिया तेज की जाए
  • परिवहन सुविधा दी जाए

ताकि नुकसान से बचा जा सके।

वैकल्पिक बाजार की तलाश

निर्यातकों ने अन्य देशों में भी बाजार तलाशने की कोशिश शुरू कर दी है। हालांकि, नए बाजार विकसित करने में समय लग सकता है।

उत्पादन बढ़ा, लेकिन निर्यात रुका

पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ में तिलापिया मछली उत्पादन तेजी से बढ़ा है। किसानों ने आधुनिक तकनीक अपनाकर उत्पादन बढ़ाया है, लेकिन निर्यात बाधित होने से चिंता बढ़ गई है।

जल्द समाधान की उम्मीद

उत्पादकों को उम्मीद है कि जल्द अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होंगे और निर्यात प्रक्रिया फिर से शुरू हो सकेगी। फिलहाल मछली उत्पादक आर्थिक नुकसान से बचने के प्रयास कर रहे हैं।

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