इस सत्र से रक्षित पाठ्यक्रम में मिलेगा एडमिशन

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रायपुर में छह विश्वविद्यालयों की बैठक के बाद इस सत्र से पीजी डिप्लोमा इन प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स पाठ्यक्रम शुरू होगा

रायपुर। बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और संरक्षण के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करने के उद्देश्य से इस शैक्षणिक सत्र से नए रक्षित पाठ्यक्रम में प्रवेश शुरू किया जाएगा। छह विश्वविद्यालयों की अंतिम बैठक पूरी हो चुकी है और अब जल्द ही पीजी डिप्लोमा इन प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा। इस पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को बाल अधिकारों से जुड़े कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। 🎓

यह निर्णय छत्तीसगढ़ शासन और संबंधित विश्वविद्यालयों के संयुक्त प्रयास से लिया गया है। इस पाठ्यक्रम को लागू करने के लिए विस्तृत रूपरेखा तैयार कर ली गई है और जल्द ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी।

छह विश्वविद्यालयों की बैठक पूरी

जानकारी के अनुसार, प्रदेश के छह विश्वविद्यालयों के अधिकारियों और विशेषज्ञों की अंतिम बैठक आयोजित की गई, जिसमें पाठ्यक्रम की रूपरेखा, प्रवेश प्रक्रिया और अध्ययन अवधि पर चर्चा की गई। बैठक में यह तय किया गया कि इस शैक्षणिक सत्र से ही पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। 📚

बैठक में निम्न बिंदुओं पर चर्चा हुई:

  • पाठ्यक्रम की संरचना
  • अध्ययन अवधि
  • प्रवेश प्रक्रिया
  • मूल्यांकन प्रणाली
  • प्रशिक्षण व्यवस्था

इन सभी बिंदुओं पर सहमति बनने के बाद पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया गया।

पीजी डिप्लोमा इन प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स

इस नए पाठ्यक्रम के तहत छात्रों को “पीजी डिप्लोमा इन प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स” की डिग्री प्रदान की जाएगी। इस पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को बच्चों के अधिकारों से जुड़े विभिन्न विषयों की जानकारी दी जाएगी।

मुख्य विषयों में शामिल होंगे:

  • बाल संरक्षण कानून
  • बाल अधिकार नीति
  • बाल श्रम रोकथाम
  • बाल तस्करी रोकथाम
  • बाल कल्याण योजनाएं
  • किशोर न्याय अधिनियम

इससे छात्रों को बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में विशेषज्ञता मिलेगी।

रोजगार के नए अवसर

इस पाठ्यक्रम के शुरू होने से युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद छात्र निम्न क्षेत्रों में कार्य कर सकेंगे:

  • बाल संरक्षण विभाग
  • सामाजिक संगठन
  • एनजीओ
  • बाल कल्याण समिति
  • शैक्षणिक संस्थान

इससे बाल अधिकारों की रक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होंगे। 👨‍🎓

प्रशिक्षण और प्रायोगिक अध्ययन

पाठ्यक्रम में थ्योरी के साथ-साथ प्रायोगिक प्रशिक्षण भी शामिल किया जाएगा। छात्रों को फील्ड विजिट, केस स्टडी और इंटर्नशिप के माध्यम से व्यावहारिक अनुभव दिया जाएगा।

इससे छात्रों को वास्तविक परिस्थितियों को समझने में मदद मिलेगी।

बाल अधिकार संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

इस पाठ्यक्रम के शुरू होने से प्रदेश में बाल अधिकारों की सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षित पेशेवरों की कमी को यह पाठ्यक्रम पूरा करेगा।

जल्द शुरू होगी प्रवेश प्रक्रिया

अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही प्रवेश प्रक्रिया की तिथि घोषित की जाएगी। पात्र विद्यार्थियों को विश्वविद्यालयों के माध्यम से आवेदन करना होगा।

शिक्षा क्षेत्र में नई पहल

यह पहल शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे बाल संरक्षण के क्षेत्र में जागरूकता और विशेषज्ञता दोनों बढ़ेगी। 🌟

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