यूपीआई सेवा में तीसरी बार आई तकनीकी खामी, देशभर में डिजिटल भुगतान प्रभावित
12 अप्रैल 2025 को यूपीआई सेवाओं में तकनीकी खामी के कारण देशभर में डिजिटल भुगतान प्रभावित हुए। यह पिछले 30 दिनों में तीसरी बार है जब यूपीआई सेवाएं…
12 अप्रैल 2025 को यूपीआई सेवाओं में तकनीकी खामी के कारण देशभर में डिजिटल भुगतान प्रभावित हुए। यह पिछले 30 दिनों में तीसरी बार है जब यूपीआई सेवाएं बाधित ुई हैं।
12 अप्रैल 2025 को शनिवार सुबह, भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) सेवाओं में एक बार फिर तकनीकी खामी आई, जिससे लाखों उपयोगकर्ताओं को लेन-देन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। यह पिछले 30 दिनों में तीसरी बार है जब यूपीआई सेवाएं बाधित हुई हैं, जिससे डिजिटल भुगतान पर निर्भरता की चुनौतियाँ सामने आई हैं।
सेवाओं में व्यापक बाधा
डाउनडिटेक्टर (DownDetector) के अनुसार, दोपहर 12:56 बजे तक 2,147 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें लगभग 80% उपयोगकर्ताओं ने भुगतान प्रयासों के दौरान समस्याओं की सूचना दीप्रमुख डिजिटल भुगतान ऐप्स जैसे Google Pay, PhonePe और Paytm के उपयोगकर्ताओं ने लेन-देन में असमर्थता की शिकायत की
प्रमुख बैंकों पर प्रभाव
इस तकनीकी खामी का प्रभाव प्रमुख वित्तीय संस्थानों पर भी पड़ा, जिनमें HDFC बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा और कोटक महिंद्रा बैंक शामिल है। इन बैंकों के ग्राहक भी यूपीआई सेवाओं में व्यवधान के कारण प्रभावित हु।
पिछले आउटेज की पुनरावृत्ति
- *26 मार्च 2025: इस दिन एक बड़े आउटेज के कारण उपयोगकर्ताओं को 2-3 घंटे तक यूपीआई सेवाओं का उपयोग करने में कठिनाई हई।
- *2 अप्रैल 2025: एक अन्य आउटेज में 514 शिकायतें दर्ज की गईं, जिसमें उपयोगकर्ताओं ने फंड ट्रांसफर में समस्याओं की सूचना ी।
इन घटनाओं से स्पष्ट है कि यूपीआई सेवाओं में बार-बार आ रही तकनीकी खामियाँ उपयोगकर्ताओं के लिए चिंता का विषय बन गई हं।

*एनपीसीआई की प्रतिक्रिया
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने अभी तक इस नवीनतम आउटेज के कारणों की स्पष्ट जानकारी नहीं दीह। हालांकि, 8 अप्रैल को एनपीसीआई ने अंतरराष्ट्रीय यूपीआई लेन-देन के लिए क्यूआर कोड के उपयोग पर कुछ प्रतिबंध लगाए थे, ताकि भुगतानकर्ता की पहचान सुनिश्चित की जा क। इन बदलावों का घरेलू यूपीआई लेन-देन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ाहै।
डिजिटल भुगतान पर निर्भरता की चुनौतिया
यूपीआई भारत में डिजिटल भुगतान का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है, जिससे लाखों लोग और व्यवसाय जुड़े हुएहं। ऐसे में बार-बार की तकनीकी खामियाँ न केवल उपयोगकर्ताओं की सुविधा में बाधा डालती हैं, बल्कि डिजिटल भुगतान प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगातीहैं।
️ भविष्य की दिा
डिजिटल भुगतान प्रणाली की स्थिरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि एनपीसीआई और संबंधित संस्थान तकनीकी खामियों की पहचान कर उन्हें शीघ्रता से सुाें। साथ ही, उपयोगकर्ताओं को वैकल्पिक भुगतान विकल्पों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए, ताकि ऐसी परिस्थितियों में वे अन्य माध्यमों का उपयोग करसकें।

