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बिलासपुर उपभोक्ता आयोग का ऐतिहासिक फैसला: कोविड से हुई मौत पर बीमा कंपनी देगी 1 करोड़ मुआवजा, 12% ब्याज भी अनिवार्य

📑 इस लेख मेंबिलासपुर उपभोक्ता आयोग ने कोविड से मौत के मामले में बीमा कंपनी को 1 करोड़ मुआवजा और 12 प्रतिशत ब्याज देने का ऐतिहासिक आदेश दिया।क्या…

📅 21 January 2026, 11:28 am अपडेट: 16 May 2026
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बिलासपुर उपभोक्ता आयोग ने कोविड से मौत के मामले में बीमा कंपनी को 1 करोड़ मुआवजा और 12 प्रतिशत ब्याज देने का ऐतिहासिक आदेश दिया।

बिलासपुर। कोविड-19 महामारी के दौरान बीमा दावों को लेकर वर्षों से चल रहे विवादों पर बड़ा और राहत भरा फैसला सामने आया है। बिलासपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि वह कोविड संक्रमण से हुई मौत के मामले में मृतक के परिजनों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दे, साथ ही इस राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी अदा करे।

यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय की जीत है, बल्कि देशभर के उन हजारों बीमाधारकों के लिए भी उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है, जिनके कोविड काल के बीमा दावे कंपनियों ने खारिज कर दिए थे।


क्या है पूरा मामला?

मामला बिलासपुर निवासी एक व्यवसायी से जुड़ा है, जिन्होंने अपने जीवनकाल में एक निजी बीमा कंपनी से 1 करोड़ रुपये का जीवन बीमा पॉलिसी लिया था। वर्ष 2021 में कोविड-19 संक्रमण के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी और इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

मृत्यु के बाद परिजनों ने बीमा कंपनी के समक्ष क्लेम प्रस्तुत किया, लेकिन कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि—

  • मृत्यु महामारी के कारण हुई
  • पॉलिसी की शर्तों में महामारी को अपवाद माना गया है
  • कंपनी इस स्थिति में भुगतान के लिए बाध्य नहीं है

इसके बाद पीड़ित परिवार ने उपभोक्ता आयोग की शरण ली।


आयोग की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान उपभोक्ता आयोग ने बीमा पॉलिसी की शर्तों, मेडिकल रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण पत्र का गहन अध्ययन किया। आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि—

  • कोविड से मृत्यु प्राकृतिक कारणों की श्रेणी में आती है
  • पॉलिसी में महामारी को लेकर कोई स्पष्ट अपवाद नहीं दर्शाया गया
  • बीमा कंपनी मनमाने ढंग से दावा खारिज नहीं कर सकती

आयोग ने कहा,
“केवल महामारी का हवाला देकर बीमाधारक के वैध अधिकारों से इनकार करना उपभोक्ता कानून का गंभीर उल्लंघन है।”


1 करोड़ मुआवजा और 12% ब्याज का आदेश

आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि—

  • मृतक के परिजनों को 1 करोड़ रुपये की बीमा राशि का भुगतान किया जाए
  • क्लेम की तारीख से भुगतान की तारीख तक 12% वार्षिक ब्याज दिया जाए
  • मानसिक पीड़ा और मुकदमेबाजी खर्च के लिए अतिरिक्त राशि भी अदा की जाए

आयोग ने भुगतान के लिए निर्धारित समयसीमा भी तय की है, अन्यथा बीमा कंपनी पर अतिरिक्त दंड लगाया जाएगा।


बीमा कंपनियों के लिए सख्त संदेश

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला बीमा कंपनियों के लिए एक नज़ीर (Precedent) बनेगा। इससे—

  • कोविड काल के लंबित दावों को दोबारा खोला जा सकता है
  • मनमाने तरीके से क्लेम खारिज करने पर कंपनियों पर सख्ती बढ़ेगी
  • उपभोक्ताओं का भरोसा न्याय व्यवस्था पर मजबूत होगा

एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा,
“यह फैसला स्पष्ट करता है कि महामारी भी बीमा दायित्व से बीमा कंपनियों को मुक्त नहीं करती।”


पीड़ित परिवार को मिली बड़ी राहत

मृतक के परिजनों ने फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि—

“कठिन समय में जब परिवार का सहारा छिन गया था, तब बीमा कंपनी ने भी साथ छोड़ दिया। यह फैसला हमारे लिए न्याय और सम्मान की जीत है।”


अन्य पीड़ितों के लिए रास्ता खुला

उपभोक्ता आयोग के इस फैसले के बाद—

  • जिन लोगों के कोविड मृत्यु क्लेम खारिज हुए हैं
  • वे पुनः उपभोक्ता आयोग में अपील कर सकते हैं
  • दस्तावेजों के आधार पर न्याय मिलने की संभावना बढ़ी है

यह निर्णय छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश में बीमा विवादों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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