कायाकल्प रिपोर्ट में राजधानी के हेल्थ सेंटर टॉप रैंकिंग से बाहर हुए, जिला अस्पताल छठवें नंबर पर रहा, ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थानों ने बेहतर प्रदर्शन किया।
रायपुर। स्वास्थ्य संस्थानों की स्वच्छता, प्रबंधन और मरीज सुविधाओं को परखने वाली केंद्र सरकार की कायाकल्प योजना की ताजा रिपोर्ट ने छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था की नई तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट के अनुसार इस बार प्रदेश के कई प्रमुख शहरी हेल्थ सेंटर टॉप रैंकिंग से बाहर हो गए हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों ने बेहतर प्रदर्शन कर बाजी मार ली है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि राजधानी रायपुर के कई बड़े हेल्थ सेंटर शीर्ष 5 की सूची से बाहर हो गए, वहीं रायपुर का जिला अस्पताल भी इस बार छठवें स्थान पर सिमट गया है।
क्या है कायाकल्प योजना?
कायाकल्प योजना केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही वह पहल है, जिसके तहत—
- सरकारी अस्पतालों और हेल्थ सेंटरों की
- स्वच्छता
- संक्रमण नियंत्रण
- जैव चिकित्सा कचरा प्रबंधन
- मरीज सुविधाएं
- प्रबंधन प्रणाली
का मूल्यांकन किया जाता है।
इसमें राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर के अस्पतालों को अंक देकर रैंकिंग जारी की जाती है।
शहरी संस्थान पिछड़े, ग्रामीणों ने दिखाया दम
रिपोर्ट के अनुसार—
- कई शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
- बड़े सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
- और कुछ जिला मुख्यालय के अस्पताल
इस बार टॉप रैंकिंग में जगह नहीं बना सके।
वहीं दूसरी ओर—
- दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पताल
- आदिवासी अंचलों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
- छोटे ब्लॉक स्तरीय अस्पताल
ने बेहतर स्वच्छता, अनुशासित स्टाफ और नियमित निरीक्षण के दम पर ऊंची रैंकिंग हासिल की।
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया—
“ग्रामीण क्षेत्रों में हाल के वर्षों में बुनियादी ढांचे और निगरानी पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसका असर अब रैंकिंग में दिख रहा है।”
जिला अस्पताल छठवें नंबर पर
राजधानी रायपुर का जिला अस्पताल, जो पिछले वर्षों में टॉप 3 में शामिल रहा था, इस बार छठवें स्थान पर पहुंच गया। रिपोर्ट में इसके लिए—
- मरीजों की अधिक भीड़
- सीमित स्टाफ
- नियमित मॉनिटरिंग की कमी
- और संक्रमण नियंत्रण में लापरवाही
को प्रमुख कारण माना गया है।
हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने दावा किया है कि सुधारात्मक कदम तेजी से उठाए जा रहे हैं।
किन बिंदुओं पर कटे अंक?
कायाकल्प मूल्यांकन में जिन क्षेत्रों में शहरी अस्पताल पिछड़े, उनमें प्रमुख रूप से—
- शौचालयों की साफ-सफाई
- वेस्ट सेग्रीगेशन में कमी
- हाथ धोने की व्यवस्था
- संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल
- मरीज फीडबैक
जैसे बिंदुओं पर अंक कटे।
ग्रामीण अस्पतालों ने इन मानकों पर अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया।
स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि—
- कमजोर प्रदर्शन करने वाले अस्पतालों को सुधार नोटिस जारी किए जाएंगे
- विशेष निरीक्षण दल भेजे जाएंगे
- अगले छह महीनों में रैंकिंग सुधारने के लिए एक्शन प्लान लागू होगा
विभाग का कहना है कि रैंकिंग केवल पुरस्कार के लिए नहीं, बल्कि मरीजों को सुरक्षित और स्वच्छ इलाज देने की दिशा में सुधार का जरिया है।
मरीजों के लिए क्या मायने?
विशेषज्ञों का मानना है कि—
- बेहतर रैंकिंग वाले अस्पतालों में संक्रमण का खतरा कम होता है
- इलाज की गुणवत्ता बेहतर होती है
- मरीजों को साफ-सुथरा और सुरक्षित माहौल मिलता है
इस रिपोर्ट से मरीजों को यह भी समझने में मदद मिलेगी कि किन संस्थानों में सुविधाएं बेहतर हैं।
आगे की चुनौती
अब स्वास्थ्य विभाग के सामने चुनौती है कि—
- शहरी अस्पतालों में सुधार तेज किया जाए
- स्टाफ ट्रेनिंग बढ़ाई जाए
- नियमित ऑडिट और निगरानी हो
- मरीजों की शिकायतों का त्वरित समाधान किया जाए
ताकि अगली कायाकल्प रिपोर्ट में प्रदेश की रैंकिंग फिर से सुधारी जा सके।

