परीक्षा-पे-चर्चा में छत्तीसगढ़ का कमजोर प्रदर्शन: रजिस्ट्रेशन लक्ष्य से 5% पीछे, कोरिया जिला टॉप पर
📑 इस लेख मेंपरीक्षा-पे-चर्चा रजिस्ट्रेशन में छत्तीसगढ़ लक्ष्य से 5% पीछे रहा, कोरिया जिला टॉप पर, रायपुर 26वें और बिलासपुर 25वें स्थान पर रहे।क्या है परीक्षा-पे-चर्चा?राज्य का प्रदर्शन…
परीक्षा-पे-चर्चा रजिस्ट्रेशन में छत्तीसगढ़ लक्ष्य से 5% पीछे रहा, कोरिया जिला टॉप पर, रायपुर 26वें और बिलासपुर 25वें स्थान पर रहे।
रायपुर/बिलासपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम “परीक्षा-पे-चर्चा” के लिए छत्तीसगढ़ में इस बार रजिस्ट्रेशन लक्ष्य से करीब 5 प्रतिशत कम आवेदन दर्ज किए गए हैं। राज्य के 33 जिलों में रजिस्ट्रेशन के आंकड़ों ने शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को सामने ला दिया है। हैरानी की बात यह है कि राजधानी रायपुर 26वें स्थान पर रहा, जबकि शिक्षा का बड़ा केंद्र माने जाने वाला बिलासपुर 25वें नंबर पर ही सिमट गया।
इसके उलट कोरिया जिला पूरे राज्य में पहले स्थान पर रहा है, जिसने निर्धारित लक्ष्य से अधिक रजिस्ट्रेशन कर शीर्ष स्थान हासिल किया।
क्या है परीक्षा-पे-चर्चा?
परीक्षा-पे-चर्चा केंद्र सरकार का वार्षिक कार्यक्रम है, जिसमें प्रधानमंत्री स्वयं छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से संवाद कर परीक्षा के तनाव, पढ़ाई की रणनीति और करियर मार्गदर्शन पर चर्चा करते हैं। इसके लिए देशभर में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराए जाते हैं और चयनित छात्रों को सीधे संवाद का अवसर मिलता है।
राज्य का प्रदर्शन लक्ष्य से पीछे
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार—
- छत्तीसगढ़ को जितना रजिस्ट्रेशन लक्ष्य मिला था, उससे करीब 5% कम आवेदन दर्ज हुए
- कई जिलों में स्कूलों द्वारा अपेक्षित प्रचार-प्रसार नहीं किया गया
- शहरी जिलों में भी भागीदारी उम्मीद से कम रही
एक अधिकारी के मुताबिक,
“कुछ जिलों में स्कूलों ने समय पर छात्रों को जागरूक नहीं किया, जिससे लक्ष्य पूरा नहीं हो सका।”
जिलावार स्थिति: कोरिया अव्वल, बड़े जिले पीछे
राज्य की जिलावार रैंकिंग में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए—
- कोरिया जिला – पहला स्थान
- कई छोटे और आदिवासी बहुल जिलों ने बेहतर प्रदर्शन किया
- रायपुर – 26वां स्थान
- बिलासपुर – 25वां स्थान
राजधानी और संभाग मुख्यालय होने के बावजूद रायपुर और बिलासपुर का निचले पायदान पर रहना शिक्षा विभाग के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।
बड़े शहरों में कम रुचि क्यों?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि—
- निजी स्कूलों में सरकारी अभियानों को कम महत्व दिया जाता है
- छात्रों में कार्यक्रम को लेकर जागरूकता की कमी रही
- ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में तकनीकी दिक्कतें भी आईं
एक शिक्षाविद् ने कहा,
“ग्रामीण जिलों में शिक्षकों ने व्यक्तिगत रुचि ली, जबकि शहरी इलाकों में यह सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया।”
शिक्षा विभाग करेगा समीक्षा
स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिलों से रिपोर्ट मंगाई है। आने वाले दिनों में—
- कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों की समीक्षा
- स्कूल स्तर पर जिम्मेदारी तय
- भविष्य में लक्ष्य हासिल करने की नई रणनीति
तैयार की जाएगी।
छात्रों के लिए अवसर फिर भी खुला
हालांकि रजिस्ट्रेशन लक्ष्य से कम रहा, लेकिन शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी और योग्य छात्रों को समान अवसर मिलेगा।
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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल
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