भये प्रकट हनुमंता वीर बलवंता… देशभर में धूमधाम से मनाया गया हनुमान जन्मोत्सव
📑 इस लेख मेंभोपाल(मेघा तिवारी की रिपोर्ट)। हनुमान जन्मोत्सवहनुमान जी का जन्मनाम और उपाधियाँअवतार का उद्देश्यबचपन की दिव्यता और शक्तियाँरामभक्ति और पराक्रमबारह प्रसिद्ध नाम और उनका अर्थधार्मिक महत्वनिष्कर्ष…

भोपाल(मेघा तिवारी की रिपोर्ट)। हनुमान जन्मोत्सव
समूचे देश में शनिवार को महाबली संकटमोचन श्री हनुमानजी महाराज का प्रकटोत्सव अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। मंदिरों में भजन-कीर्तन, सुंदरकांड पाठ, हनुमान चालीसा और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। भक्तों ने उपवास रखकर बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त किया।
हनुमान जी को वानरराज केसरी और माता अंजना के सबसे बड़े पुत्र के रूप में जाना जाता है। रामायण के अनुसार वे भगवान श्रीराम के परमभक्त हैं और देवी सीता के अत्यंत प्रिय।
हनुमान जी का जन्म
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, हनुमान जी का जन्म 85 लाख 58 हजार 112 वर्ष पूर्व, त्रेतायुग के अंतिम चरण में हुआ था। यह जन्म चैत्र पूर्णिमा, मंगलवार, चित्रा नक्षत्र और मेष लग्न में सुबह 6:03 बजे हुआ था। माना जाता है कि उनका जन्मस्थल आज का हरियाणा राज्य है, जिसका प्राचीन नाम कपिस्थल (कैथल) था।
नाम और उपाधियाँ
हनुमान जी को उनके विभिन्न गुणों और कार्यों के अनुसार अनेकों नामों से जाना जाता है –
बजरंगबली, क्योंकि उनका शरीर वज्र के समान कठोर है,
पवनपुत्र, क्योंकि वायु देव ने उनका पालन किया,
अंजनीसुत, संकटमोचन, केसरीनन्दन, कपीश, मारुति, शंकर सुवन आदि।
अवतार का उद्देश्य
हनुमान जी का अवतरण भगवान श्रीराम की सहायता के लिए हुआ। वे उन आठ चिरंजीवियों में से एक हैं जिन्हें अमरत्व का वरदान प्राप्त है। उनका जीवन, त्याग, भक्ति और पराक्रम का अनुपम उदाहरण है।
बचपन की दिव्यता और शक्तियाँ
हनुमान जी बचपन से ही अत्यंत शक्तिशाली और चमत्कारी थे। एक दिन उन्होंने उगते सूर्य को फल समझकर निगलने की चेष्टा की थी, जिससे सम्पूर्ण संसार अंधकारमय हो गया। उनके इस कृत्य से देवगण भयभीत हो उठे। इन्द्र ने अपने वज्र से हनुमान जी पर प्रहार किया जिससे उनकी ठोड़ी (हनु) घायल हो गई। इसी कारण उन्हें हनुमान कहा गया।
उनकी नटखट प्रवृत्ति से परेशान होकर ऋषियों ने उन्हें यह शाप दिया कि वे अपनी शक्तियाँ भूल जाएंगे और केवल स्मरण कराने पर ही उन्हें याद कर सकेंगे। यही कारण है कि रामायण में हनुमान जी की शक्तियाँ समय-समय पर स्मरण कराने पर जागृत होती हैं।
रामभक्ति और पराक्रम
हनुमान जी ने लंका में आग लगाना, सीता माता को संदेश देना, लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए संजीवनी लाना जैसे असंख्य पराक्रम किए। वे भगवान राम के अनन्य भक्त हैं और उनके नाम के जाप से ही अनेकों संकटों का नाश होता है।
बारह प्रसिद्ध नाम और उनका अर्थ
- हनुमान – जिनकी ठोड़ी टूट गई
- रामेष्ट – श्रीराम के परमप्रिय
- उधिकर्मण – उद्धारकर्ता
- अंजनीसुत – अंजना के पुत्र
- फाल्गुनसखा – अर्जुन के मित्र
- सीतासोकविनाशक – सीता के शोक का नाश करने वाले
- वायुपुत्र – वायु देव के पुत्र
- पिंगाक्ष – भूरी आँखों वाले
- लक्ष्मण प्राणदाता – लक्ष्मण के प्राण बचाने वाले
- महाबली – असीम बलशाली
- अमित विक्रम – अतुल पराक्रमी
- दशग्रीव दर्पहारी – रावण के घमंड को चूर करने वाले
धार्मिक महत्व
हनुमान जी की पूजा से भय, रोग, कष्ट और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। माना जाता है कि जो भी भक्त श्रद्धा और विश्वास से उनका स्मरण करता है, उसके समस्त कार्य सिद्ध होते हैं।
निष्कर्ष (आपकी शैली अनुसार नहीं जोड़ा गया)
हनुमान जन्मोत्सव केवल एक पर्व नहीं, बल्कि शक्ति, भक्ति और समर्पण की भावना का प्रतीक है। संकटमोचन की कृपा से समाज और देश में शक्ति, निर्भयता और धर्म की स्थापना होती है। जय बजरंगबली!
“मेघा तिवारी” की विशेष रिपोर्ट
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