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महावीर जयंती पर गुरचरण सिंह होरा ने प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं, कहा – यह पर्व मानवता, अहिंसा और शांति का प्रतीक

📑 इस लेख मेंरायपुर। महावीर जयंतीभगवान महावीर का जीवन दर्शनअहिंसा का सर्वोच्च आदर्शअपरिग्रह – आत्मसंयम की सीखशांति और सह-अस्तित्व का मार्गयुवाओं के लिए प्रेरणासामाजिक समरसता का संदेशजनकल्याण की…

📅 10 April 2025, 11:19 am अपडेट: 16 May 2026
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रायपुर। महावीर जयंती

महावीर जयंती के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ टेनिस संघ के महासचिव एवं ग्रैंड ग्रुप के चेयरमैन गुरचरण सिंह होरा ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर स्वामी का जीवन दर्शन आज भी समाज को दिशा दिखाने वाला है। उनके उपदेश, विशेष रूप से अहिंसा, अपरिग्रह, सत्य और करुणा के सिद्धांत न केवल जैन समाज के लिए, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए अनुकरणीय हैं।

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गुरचरण सिंह होरा ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी ने जीवन के प्रत्येक क्षण को लोक कल्याण और आत्मकल्याण में समर्पित किया। उन्होंने सत्य और अहिंसा को न केवल अपने जीवन में उतारा, बल्कि उन्हें समाज के लिए मूल मंत्र बना दिया। उनके अनुसार, “यह पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह हमें आत्मनिरीक्षण का अवसर भी देता है। हम किस तरह से अपने जीवन को बेहतर, शांतिपूर्ण और सह-अस्तित्वपूर्ण बना सकते हैं, यह महावीर जयंती के संदेशों से सीखा जा सकता है।”

भगवान महावीर का जीवन दर्शन

भगवान महावीर का जन्म 599 ईसा पूर्व वैशाली गणराज्य के क्षत्रियकुंड नामक स्थान पर हुआ था। वे जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर माने जाते हैं। महावीर स्वामी का असली नाम वर्धमान था। उन्होंने 30 वर्ष की उम्र में सांसारिक जीवन का त्याग कर दीक्षा ली और 12 वर्षों तक कठोर तपस्या और साधना की। अंततः उन्हें केवलज्ञान की प्राप्ति हुई और वे ‘महावीर’ के रूप में प्रसिद्ध हुए।

गुरचरण सिंह होरा ने उनके जीवन को लेकर कहा कि महावीर स्वामी का समर्पण, संयम और त्याग भाव आज के युग में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है। जब समाज में असहिष्णुता, अशांति और अहंकार बढ़ रहा है, ऐसे समय में भगवान महावीर के सिद्धांतों को अपनाकर हम व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में स्थायित्व, सामंजस्य और शांति ला सकते हैं।

अहिंसा का सर्वोच्च आदर्श

महावीर स्वामी ने अहिंसा को सर्वोच्च धर्म बताया। उनका मानना था कि सभी जीवों में आत्मा है, और हर आत्मा को जीने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि किसी भी रूप में हिंसा – चाहे वह विचारों में हो, वाणी में हो या कर्मों में – त्याज्य है।

गुरचरण सिंह होरा ने इस विचार को आज के सामाजिक परिदृश्य से जोड़ते हुए कहा कि वर्तमान समय में जब समाज में वैचारिक टकराव और असहिष्णुता बढ़ रही है, तब भगवान महावीर की अहिंसा की शिक्षा न केवल व्यक्तिगत बल्कि सामूहिक जीवन के लिए भी एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक बन सकती है।

अपरिग्रह – आत्मसंयम की सीख

महावीर स्वामी ने अपरिग्रह यानी संग्रह-विनिमय से दूर रहने की शिक्षा दी। उनका मानना था कि जितना अधिक हम भौतिक वस्तुओं के पीछे भागते हैं, उतनी ही हमारी मानसिक शांति प्रभावित होती है।

गुरचरण सिंह होरा का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली, जिसमें उपभोगवाद हावी है, उसमें भगवान महावीर की अपरिग्रह की शिक्षा अत्यधिक उपयोगी है। “अगर हम भौतिक सुखों से ऊपर उठकर आत्मिक संतोष की ओर बढ़ें, तो न केवल व्यक्तिगत जीवन संतुलित होगा, बल्कि सामाजिक विषमता भी घटेगी,” उन्होंने कहा।

शांति और सह-अस्तित्व का मार्ग

महावीर स्वामी का जीवन सहिष्णुता, समरसता और सर्वधर्म समभाव का प्रतीक है। उन्होंने किसी भी प्रकार के भेदभाव – चाहे वह जाति, धर्म या वर्ग के आधार पर हो – का विरोध किया। वे सभी प्राणियों के प्रति दया और करुणा के पक्षधर थे।

गुरचरण सिंह होरा ने कहा कि वर्तमान समय में, जब विश्व के अनेक हिस्से संघर्ष और अस्थिरता से जूझ रहे हैं, ऐसे समय में भगवान महावीर के उपदेश वैश्विक स्तर पर शांति और सौहार्द के निर्माण में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा, “आज जरूरत इस बात की है कि हम धर्म को केवल कर्मकांड तक सीमित न रखें, बल्कि उसके सार को जीवन में उतारें।”

युवाओं के लिए प्रेरणा

गुरचरण सिंह होरा ने विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि वे भगवान महावीर के विचारों को समझें और उन्हें अपने जीवन में लागू करें। “आज की युवा पीढ़ी तकनीकी रूप से सक्षम है, लेकिन यदि उसमें नैतिकता और मानवीय मूल्यों की नींव मजबूत हो, तो वह देश और समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने यह भी कहा कि युवा यदि भगवान महावीर के सिद्धांतों – जैसे कि संयम, आत्म-नियंत्रण, विचारों की पवित्रता और सेवा भावना – को आत्मसात करें, तो उनका व्यक्तित्व समृद्ध होगा और वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकेंगे।

सामाजिक समरसता का संदेश

महावीर जयंती का पर्व सामाजिक समरसता और परस्पर सहयोग का संदेश देता है। यह अवसर है जब विभिन्न धर्मों, वर्गों और समुदायों के लोग एकजुट होकर भगवान महावीर के संदेशों को स्मरण करते हैं।

गुरचरण सिंह होरा ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक बहु-सांस्कृतिक और बहु-धार्मिक राज्य है, जहां सभी धर्मों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं। “महावीर जयंती जैसे पर्व हमें इस एकता को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करते हैं,” उन्होंने कहा।

जनकल्याण की दिशा में ग्रैंड ग्रुप की पहल

गुरचरण सिंह होरा, जो कि ग्रैंड ग्रुप के चेयरमैन भी हैं, ने इस अवसर पर सामाजिक दायित्व की भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि ग्रैंड ग्रुप लगातार विभिन्न क्षेत्रों में जनकल्याण के कार्य कर रहा है – चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो, स्वास्थ्य सेवाएं हों या पर्यावरण संरक्षण। “हम अपने स्तर पर प्रयासरत हैं कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुंचे,” उन्होंने कहा।

निष्कर्ष नहीं, प्रेरणा

गुरचरण सिंह होरा ने अंत में कहा कि भगवान महावीर के सिद्धांत किसी निष्कर्ष तक नहीं, बल्कि एक प्रेरणात्मक यात्रा की ओर ले जाते हैं। उनका जीवन और शिक्षाएं हर युग में प्रासंगिक रहेंगी। उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि वे इस पावन अवसर पर भगवान महावीर की शिक्षाओं को अपनाएं और अपने जीवन को सार्थक बनाएं।


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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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