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उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा कर रहे नक्सल ऑपरेशन और कानून व्यवस्था की समीक्षा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था और नक्सल विरोधी अभियान को लेकर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा आज मंत्रालय में पुलिस विभाग की एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक ले रहे हैं। यह बैठक…

📅 8 January 2025, 1:45 am अपडेट: 19 May 2026
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था और नक्सल विरोधी अभियान को लेकर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा आज मंत्रालय में पुलिस विभाग की एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक ले रहे हैं। यह बैठक देर शाम तक जारी रहने की संभावना है। बैठक में अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुवा, पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, और अन्य कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं।

गौरतलब है कि दो दिन पहले बीजापुर में एक बड़ी नक्सली घटना हुई थी, जिसमें डीआरजी के 8 जवान और एक ड्राइवर शहीद हो गए थे। इस त्रासदीपूर्ण घटना के बाद आयोजित यह बैठक रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा नक्सल-विरोधी अभियान की विस्तार से समीक्षा करेंगे और पुलिस के आला अधिकारियों के साथ प्रदेश की समग्र कानून-व्यवस्था पर भी गहन चर्चा करेंगे।

बीजापुर हमला: एक झटका

हाल के महीनों में सुरक्षा बलों को एक के बाद एक मिल रही सफलताओं के बीच बीजापुर में हुआ नक्सली हमला एक बड़ा झटका है। नक्सलियों द्वारा सड़क के नीचे लगाए गए शक्तिशाली आईईडी (Improvised Explosive Device) ने सुरक्षा बल के वाहन को निशाना बनाया, जिसमें डीआरजी के जवान सवार थे। यह घटना दर्शाती है कि बस्तर में निर्णायक सैन्य सफलताओं के बावजूद नक्सली अभी भी छिपी हुई आईईडी रणनीति के माध्यम से सुरक्षा बलों को नुकसान पहुँचाने की क्षमता रखते हैं।

विजय शर्मा का दोहरा प्रभार

विजय शर्मा छत्तीसगढ़ सरकार में उपमुख्यमंत्री होने के साथ-साथ गृह विभाग का भी कार्यभार सँभाल रहे हैं। इस कारण नक्सल-विरोधी अभियान की समीक्षा करना और राज्य की कानून-व्यवस्था की दैनिक निगरानी उनकी सीधी जिम्मेदारी है। उन्होंने पहले भी कई बार बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा का दौरा करते हुए सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाने का कार्य किया है।

बैठक के संभावित एजेंडे

सूत्रों के अनुसार आज की बैठक में निम्न मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है:
(1) आईईडी पहचान और निष्क्रियकरण क्षमता को कैसे बढ़ाया जाए,
(2) खुफिया तंत्र को और मजबूत करना ताकि नक्सली गतिविधियों की पूर्व सूचना मिल सके,
(3) सुरक्षा बलों के लिए आधुनिक उपकरण और बख्तरबंद वाहन उपलब्ध कराना,
(4) आत्मसमर्पण नीति को और आकर्षक बनाना ताकि निचले स्तर के नक्सली कैडर मुख्यधारा में लौट सकें,
(5) नक्सल-प्रभावित गाँवों में विकास परियोजनाओं को तेज करना।

“मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त” का लक्ष्य

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार दोहराया है कि मार्च 2026 तक देश को नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य पूरा किया जाएगा। छत्तीसगढ़ इस लक्ष्य की दिशा में अग्रिम मोर्चा है क्योंकि देश में सबसे अधिक नक्सल प्रभावित जिले इसी राज्य में हैं। बीजापुर हमले जैसी घटनाएँ भले ही अस्थायी झटका दें, परंतु इन्हें रणनीतिक समीक्षा के अवसर के रूप में लेकर सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत किया जा सकता है।

शहीद जवानों के परिवारों के लिए सहायता

राज्य सरकार ने पहले से ही शहीद जवानों के परिवारों के लिए विशेष नीति लागू कर रखी है, जिसमें वित्तीय मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, बच्चों की शिक्षा, और आवास सुविधाएँ शामिल हैं। उपमुख्यमंत्री शर्मा से अपेक्षा है कि वे शहीद जवानों के परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर सरकारी सहायता पहुँचाने की प्रक्रिया को तीव्र करेंगे।

विरात महानगर का विश्लेषण: बीजापुर हमले के बाद की समीक्षा बैठक एक प्रशासनिक प्रतिक्रिया से अधिक एक रणनीतिक मोड़ है। नक्सल-विरोधी अभियान के अंतिम चरण में जब प्रमुख नक्सली नेता या तो मारे जा चुके हैं या आत्मसमर्पण कर चुके हैं, तब बचे हुए कैडर “गुरिल्ला युद्ध” और आईईडी-आधारित हमलों पर अधिक निर्भर हो गए हैं। ऐसे में सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है — एक तरफ अभियान को तीव्र बनाए रखना, और दूसरी तरफ अपनी क्षति को न्यूनतम करना। तकनीकी उन्नयन, खुफिया एकीकरण, और स्थानीय सहयोग के बिना यह संतुलन साधना संभव नहीं है। राज्य सरकार के सामने यह दोहरी जिम्मेदारी है — जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और बस्तर के नागरिकों को भयमुक्त जीवन देना।

छत्तीसगढ़, उपमुख्यमंत्री, विजय, शर्मा, कर, रहे, नक्सल, ऑपरेशन, और, कानून — संक्षेप और और पढ़ें

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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