भोपाल की मौलाना आज़ाद सेंट्रल लाइब्रेरी में बसंत पंचमी धूमधाम से मनाई गई, माँ सरस्वती की पूजा और प्रसाद वितरण हुआ।
भोपाल (मध्यप्रदेश)। मौलाना आज़ाद सेंट्रल लाइब्रेरी, भोपाल में बसंत पंचमी का पावन पर्व इस वर्ष बड़े ही श्रद्धा, हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। विद्या की देवी माँ सरस्वती को समर्पित इस शुभ अवसर पर पुस्तकालय परिसर को विशेष रूप से सजाया गया और धार्मिक वातावरण में पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत पुस्तकालय की क्षेत्रीय ग्रंथपाल रत्ना बाधवानी द्वारा पुजारी को आमंत्रित कर माँ सरस्वती की प्रतिमा स्थापना से की गई। इसके बाद समस्त स्टाफ सदस्यों और अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की उपस्थिति में विधि-विधान से पूजा संपन्न हुई।
बसंत पंचमी के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश
पूजा के उपरांत रत्ना बाधवानी ने उपस्थित विद्यार्थियों और कर्मचारियों को बसंत पंचमी के धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि—
- बसंत पंचमी के दिन ही विद्या की देवी माँ सरस्वती का प्राकट्य हुआ था
- यह पर्व हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है
- यह दिन ज्ञान, कला, संगीत और शिक्षा को समर्पित होता है
उन्होंने यह भी बताया कि बसंत पंचमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान और संस्कृति का उत्सव है।
ऋतु परिवर्तन और प्रकृति का उत्सव
ग्रंथपाल ने कहा कि बसंत पंचमी—
- बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है
- सर्दियों के अंत और गर्मियों की शुरुआत का संकेत देती है
- प्रकृति में हरियाली और सरसों के पीले फूल इस पर्व को और भी मनमोहक बनाते हैं
यह दिन विशेष रूप से छात्रों, शिक्षकों, लेखकों और कलाकारों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
सरस्वती पूजन का वास्तविक भाव
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि—
बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजन का अर्थ केवल पुस्तकों और कलम की पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक भाव है—
- विचारों की पवित्रता
- वाणी का संयम
- आचरण की मर्यादा
- और अपनी प्रतिभा को समाज के हित में समर्पित करना
माँ सरस्वती की पूजा से विद्या, बुद्धि, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
पीले वस्त्र और पीले प्रसाद की परंपरा
इस अवसर पर—
- सभी उपस्थित लोगों ने पीले वस्त्र धारण किए
- माँ सरस्वती को पीले रंग के पुष्प, मिष्ठान और प्रसाद अर्पित किया गया
- पूजा के बाद सभी को प्रसाद वितरित किया गया
पूरे पुस्तकालय परिसर में भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का वातावरण बना रहा।
स्टाफ और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी
इस कार्यक्रम में—
- ग्रंथपाल निशा बातव
- प्रबंधक रचित मालवीय
- तथा पुस्तकालय के सभी स्टाफ सदस्य
ने सक्रिय भूमिका निभाई। छात्र-छात्राओं ने भी पूजा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और माँ सरस्वती से ज्ञान और सफलता की कामना की।
ज्ञान के मंदिर में आध्यात्मिक उत्सव
मौलाना आज़ाद सेंट्रल लाइब्रेरी जैसे ज्ञान के मंदिर में इस प्रकार का आयोजन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक रहा। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने माना कि—
बसंत पंचमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और संस्कारों का संगम है।

