SIR में बड़ी गड़बड़ी: गलत एंट्री और लापरवाही से कटे 19 लाख वोटरों के नाम, 12 लाख महिलाएं प्रभावित
📑 इस लेख मेंSIR प्रक्रिया में बड़ी चूक, गलत एंट्री और लापरवाही से 19 लाख वोटरों के नाम कटे, इनमें 12 लाख महिलाएं, आयोग पर सवाल।कैसे सामने आई…
SIR प्रक्रिया में बड़ी चूक, गलत एंट्री और लापरवाही से 19 लाख वोटरों के नाम कटे, इनमें 12 लाख महिलाएं, आयोग पर सवाल।
रायपुर। राज्य में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। गलत डाटा एंट्री, तकनीकी खामियों और मैदानी स्तर की लापरवाही के कारण करीब 19 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए, जिनमें से लगभग 12 लाख महिलाएं हैं। इस खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
कैसे सामने आई गड़बड़ी
सूत्रों के अनुसार SIR के दौरान कई स्थानों पर दस्तावेजों की सही तरीके से जांच नहीं की गई। कई मामलों में बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) द्वारा अधूरी जानकारी अपलोड की गई, जबकि कुछ जगहों पर तकनीकी त्रुटियों के चलते वैध मतदाताओं की एंट्री गलत हो गई, जिससे उनके नाम सूची से बाहर हो गए।
महिलाओं पर सबसे ज्यादा असर
आंकड़ों के अनुसार हटाए गए नामों में महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है। ग्रामीण क्षेत्रों में विवाह के बाद पते में बदलाव, दस्तावेजों की कमी और डिजिटल प्रक्रिया की जानकारी न होना महिलाओं के नाम कटने का बड़ा कारण बताया जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में हड़कंप
इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने के बाद विपक्ष ने सरकार और निर्वाचन तंत्र पर सवाल खड़े किए हैं। नेताओं का कहना है कि यह मताधिकार का हनन है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने वाला कदम है।
चुनाव आयोग की सफाई
निर्वाचन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया अस्थायी है और जिन मतदाताओं के नाम गलती से कटे हैं, उन्हें दावे-आपत्ति प्रक्रिया के तहत फिर से जोड़ा जाएगा। आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी स्थिति वेबसाइट या बीएलओ के माध्यम से जांच लें।
दावे-आपत्ति की प्रक्रिया
मतदाता निर्धारित समय सीमा में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर अपने नाम पुनः शामिल करा सकते हैं। इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं।
विशेषज्ञों की राय
चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम कटना प्रशासनिक चूक का संकेत है। डिजिटल सिस्टम के साथ-साथ जमीनी सत्यापन को मजबूत किए बिना SIR जैसी प्रक्रिया में सुधार संभव नहीं है।
सरकार पर बढ़ा दबाव
महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि महिलाओं का नाम बड़ी संख्या में कटना गंभीर विषय है और इसे प्राथमिकता से ठीक किया जाना चाहिए।
आगे की राह
चुनाव आयोग ने संकेत दिए हैं कि दोषी अधिकारियों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी त्रुटियां न हों, इसके लिए प्रशिक्षण और निगरानी प्रणाली को और मजबूत किया जाएगा।
यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक है, बल्कि मतदाताओं के विश्वास को बनाए रखने की बड़ी चुनौती भी पेश करता है।
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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल
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