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पीएम मोदी का 2011 का ट्वीट बना सुर्खियों का केंद्र, तहव्वुर राणा की प्रत्यर्पण कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर वायरल

पीएम मोदी का 2011 का ट्वीट बना सुर्खियों का केंद्र, तहव्वुर राणा की प्रत्यर्पण कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर वायरल 26/11 हमले के आरोपी राणा की प्रत्यर्पण…

📅 11 April 2025, 11:53 am
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पीएम मोदी का 2011 का ट्वीट बना सुर्खियों का केंद्र, तहव्वुर राणा की प्रत्यर्पण कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर वायरल

26/11 हमले के आरोपी राणा की प्रत्यर्पण के बाद पीएम मोदी का पुराना ट्वीट वायरल हुआ।

हाल ही में अमेरिका से 26/11 मुंबई हमलों के आरोपी तहव्वुर राणा की भारत को प्रत्यर्पण की खबर सामने आते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक पुराना ट्वीट अचानक सोशल मीडिया पर छा गया। यह ट्वीट वर्ष 2011 का है, जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। ट्वीट में उन्होंने मुंबई हमलों को लेकर तत्कालीनी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए थे। अब जब अमेरिका ने राणा के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है, उस ट्वीट को एक नई राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से देखा जा रहा है।

तहव्वुर राणा: कौन है यह चेहरा?

तहव्वुर हुसैन राणा एक पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक है, जो अमेरिका में एक व्यवसायी के रूप में काम कर रहा था। उस पर आरोप है कि उसने 2008 के मुंबई आतंकी हमलों में शामिल आतंकियों को लॉजिस्टिक और वित्तीय सहायता पहुंचाई थी। अमेरिकी न्याय विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि राणा ने जानबूझकर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से संबंध बनाए थे और भारत में हिंसक गतिविधियों के लिए उन्हें समर्थन दिया।

राणा के दोस्त और सह-अभियुक्त डेविड कोलमैन हेडली पहले ही इन हमलों की साजिश रचने का गुनाह कबूल कर चुका है। हेडली ने अपनी गवाही में कहा था कि राणा को हमले की योजना की जानकारी थी और उसने यात्रा दस्तावेजों और कवर स्टोरी के जरिए उसकी मदद की थी।

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पीएम मोदी का 2011 का ट्वीट बना सुर्खियों का केंद्र, तहव्वुर राणा की प्रत्यर्पण कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर वायरल 3

अमेरिका का बड़ा फैसला: भारत को सौंपा जाएगा राणा

लगभग एक दशक की कानूनी प्रक्रिया के बाद, अमेरिका के न्याय विभाग ने घोषणा की कि तहव्वुर राणा को भारत को प्रत्यर्पित किया जाएगा। अमेरिकी अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत ने पर्याप्त सबूत पेश किए हैं जो यह दर्शाते हैं कि राणा ने मुंबई हमलों में अपनी भूमिका निभाई थी और उस पर भारत में मुकदमा चलाया जा सकता है।

यह फैसला भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है, खासकर आतंकवाद के खिलाफ उसकी जीरो टॉलरेंस नीति के संदर्भ में।

पीएम मोदी का 2011 का ट्वीट फिर हुआ प्रासंगिक

राणा की प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू होने के बाद सोशल मीडिया पर अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 2011 का ट्वीट वायरल होने लगा। उस समय वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे और उन्होंने लिखा था:

“हमारा देश 26/11 के दोषियों को सजा दिलाने में असफल क्यों हो रहा है? कांग्रेस सरकार की कमजोरी और वोट बैंक की राजनीति के कारण न्याय अधूरा है।”

यह ट्वीट उस समय यूपीए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए किया गया था। आज, जब राणा के प्रत्यर्पण की खबर आई है, उस ट्वीट को मोदी समर्थक एक “पूर्वदृष्टि” और “राजनीतिक दूरदर्शिता” के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। वहीं, विपक्ष इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है।

राजनीति और सोशल मीडिया की गूंज

सोशल मीडिया पर मोदी के पुराने ट्वीट को लेकर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। बीजेपी समर्थक इसे मोदी की आतंकवाद के खिलाफ मजबूत नीति और संकल्प का प्रमाण बता रहे हैं। ट्विटर, फेसबुक और व्हाट्सऐप पर इस ट्वीट के स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए कई यूजर्स लिख रहे हैं — “मोदी जो कहते हैं, वो करके दिखाते हैं।”

दूसरी ओर, कुछ आलोचक इसे एक अवसरवादी प्रचार कह रहे हैं। उनका मानना है कि इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए उछाला जा रहा है, जबकि राणा की प्रत्यर्पण प्रक्रिया पूरी तरह अमेरिका की न्यायिक प्रणाली पर आधारित रही है।

भारत की आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक छवि

राणा का प्रत्यर्पण भारत की वैश्विक कूटनीति की सफलता के रूप में देखा जा रहा है। 26/11 जैसे बड़े आतंकी हमले के दोषियों को सजा दिलाने की भारत की कोशिशें वर्षों से जारी हैं। इससे भारत की आतंकवाद विरोधी नीति को न केवल घरेलू स्तर पर बल्कि वैश्विक मंच पर भी समर्थन मिला है।

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों और उनकी गतिविधियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार आवाज उठाई है। अमेरिका, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने भारत की चिंताओं का समर्थन किया है और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाया है।

कानूनी प्रक्रिया और आगे की राह

राणा को भारत लाने की प्रक्रिया अब तेजी से आगे बढ़ेगी। प्रत्यर्पण के बाद उसे भारतीय अदालत में पेश किया जाएगा और उसके खिलाफ विशेष न्यायालय में मुकदमा चलाया जाएगा। 2008 में 10 आतंकियों द्वारा किए गए इस हमले में 170 से अधिक लोग मारे गए थे और सैकड़ों घायल हुए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और आज भी वह हमला भारत के सामूहिक मन में एक गहरे जख्म के रूप में दर्ज है।

निष्कर्ष के स्थान पर एक सवाल

क्या तहव्वुर राणा को सजा मिलने से 26/11 के पीड़ितों को न्याय मिलेगा? क्या यह भारत की आतंकी विरोधी नीति को और मज़बूत करेगा? यह सवाल आने वाले समय में देश की राजनीति, कूटनीति और सुरक्षा नीति के केंद्र में रहेगा।

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में एक बात तो स्पष्ट है — सोशल मीडिया के युग में एक दशक पुराना ट्वीट भी आज की बड़ी खबर बन सकता है, और राजनीतिक विमर्श को दिशा दे सकता है।