रायपुर। शासकीय कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभावी उपयोग पर हुई विस्तृत चर्चा
राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग और उसके संभावित लाभों को लेकर राजधानी रायपुर में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का आयोजन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ इंफोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) द्वारा किया गया। राजधानी के एक निजी होटल में आयोजित इस कार्यशाला में प्रदेश के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यशाला में मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, बसवा राजू, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव कमल प्रीत सिंह, तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव एस. भारतीदासन, ऊर्जा विभाग के विशेष सचिव अंकित आनंद, एन.आर.डी.ए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सौरभ कुमार, आई.जी. राम गोपाल गर्ग सहित 100 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों ने भागीदारी की।
एआई के महत्व पर जोर
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका सिंह बारिक ने कहा कि वर्तमान दौर में तकनीक तीव्र गति से बदल रही है, और शासन-प्रशासन को इस परिवर्तन के साथ आगे बढ़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से सरकारी सेवाओं को और अधिक प्रभावी व त्वरित बनाया जा सकता है। यह नीति निर्माण से लेकर सेवा वितरण तक सभी स्तरों पर प्रशासनिक कार्यों में क्रांतिकारी बदलाव लाने में सक्षम है।”
उन्होंने यह भी कहा कि एआई की मदद से समस्याओं का समाधान अधिक तेजी से किया जा सकता है, जिससे सुशासन को मजबूती मिलेगी। इस कार्यशाला के माध्यम से अधिकारियों को एआई के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया जाएगा ताकि वे इसे अपने कार्यों में प्रभावी रूप से अपना सकें।
तकनीक से बढ़ेगी प्रशासनिक दक्षता
कार्यशाला के दौरान चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रभात मलिक ने एआई तकनीक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शासन और प्रशासन में इस तकनीक के समुचित उपयोग से निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक दक्ष और त्वरित हो सकती है। उन्होंने कहा कि चिप्स का यह प्रयास है कि शासन स्तर पर प्रौद्योगिकी का अधिकतम लाभ लिया जाए।
“हमारा उद्देश्य एआई को सरकारी तंत्र में प्रभावी रूप से लागू करना है ताकि विभिन्न विभागों में स्वचालन (ऑटोमेशन) के जरिए कार्यों की दक्षता बढ़े और सेवाओं को अधिक सुलभ बनाया जा सके,” – प्रभात मलिक ने कहा।
एआई विशेषज्ञों की प्रस्तुति
कार्यशाला में नई दिल्ली से आए एआई विशेषज्ञ डॉ. शिवा कक्कर ने प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि टेक्नोलॉजी का उपयोग सबसे पहले टेक्सटाइल उद्योग में किया गया था और वर्ष 2022 के बाद वैश्विक स्तर पर एआई का तेजी से विस्तार हुआ।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अक्सर यह धारणा बनी रहती है कि एआई के उपयोग से रोजगार के अवसर कम होते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि नई तकनीकों से नए कौशल की मांग बढ़ती है, जिससे रोजगार के अधिक अवसर उत्पन्न होते हैं।
डॉ. शिवा ने कार्यशाला में एआई आधारित विभिन्न टूल्स जैसे चैटजीपीटी, मेटा, गूगल नोटबुक एलएम जैसे प्लेटफॉर्म्स की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि इन टूल्स के उपयोग से सरकारी कार्यों को अधिक प्रभावी और स्वचालित बनाया जा सकता है।
एआई पर नियमित कार्यशालाओं का आयोजन होगा
कार्यशाला के समापन सत्र में चिप्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रभात मलिक ने अधिकारियों को धन्यवाद ज्ञापित किया और घोषणा की कि इमर्जिंग टेक्नोलॉजी से संबंधित विषयों पर चिप्स द्वारा नियमित रूप से कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा।
“अगर राज्य के विभिन्न विभाग अपने कार्यक्षेत्र से संबंधित किसी विशेष विषय पर कार्यशाला आयोजित करवाना चाहते हैं, तो वे चिप्स को सूचित कर सकते हैं। चिप्स द्वारा उस विषय पर विशेषज्ञों को बुलाकर कार्यशाला आयोजित की जाएगी,” – उन्होंने कहा।
इस अवसर पर चिप्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कुमार बिश्वरंजन, अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी शशांक पाण्डेय, और संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुपम आशीष टोप्पो भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
इस कार्यशाला के माध्यम से छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को एआई तकनीक के महत्व और उसके प्रभावी उपयोग के बारे में जागरूक किया गया। इस पहल से राज्य में सुशासन को नई दिशा मिलने की संभावना है। एआई के जरिए सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
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