रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीतिक गलियारों में युवासेना शिवसेना (यूबीटी) रायपुर महानगर के अध्यक्ष यशराज ठाकुर के बयान ने एक नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए यह सवाल उठाया है कि गौमाता को ‘राज्यमाता’ का दर्जा क्यों नहीं दिया जा रहा है। ठाकुर ने अपने बयान में सीधे तौर पर भाजपा की विचारधारा और नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
भाजपा की हिंदूवादी छवि पर सवाल
यशराज ठाकुर ने भाजपा पर यह आरोप लगाया है कि पार्टी चुनावों के समय खुद को कट्टर हिंदूवादी पार्टी के रूप में प्रस्तुत करती है, लेकिन सत्ता में आने के बाद अपने वादों और विचारधारा से पलट जाती है। उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के रहते हुए भी गौमाता को सम्मान नहीं मिल रहा है। 40 करोड़ हिंदुओं की मां गौमाता को ‘राज्यमाता’ का दर्जा क्यों नहीं दिया जा रहा है? यह सवाल हर हिंदू के मन में है।”
गौहत्या पर गंभीर आरोप
ठाकुर ने अपने बयान में यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में खुलेआम गौहत्या हो रही है और सरकार इस पर चुप है। उनका मानना है कि भाजपा, जो खुद को हिंदू धर्म की सबसे बड़ी संरक्षक के रूप में प्रस्तुत करती है, उसने सत्ता में आने के बाद इस मुद्दे पर अपनी जिम्मेदारियों को दरकिनार कर दिया है।
उन्होंने कहा, “चुनाव के दौरान भाजपा के नेता धार्मिक मुद्दों को प्रमुखता देते हैं, लेकिन जब सत्ता की बात आती है तो वही नेता गौमाता के प्रति अपनी जिम्मेदारी भूल जाते हैं।”
‘राज्यमाता’ का दर्जा देने की मांग
यशराज ठाकुर ने राज्य सरकार से यह मांग की है कि गौमाता को ‘राज्यमाता’ का दर्जा दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि गौतस्करी और गौहत्या की घटनाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगनी चाहिए। ठाकुर ने कहा, “गौमाता का सम्मान सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि कृत्य में भी दिखना चाहिए। सरकार को इसके लिए एक सख्त नीति बनानी चाहिए।”
भाजपा की नीतियों पर सवालिया निशान
ठाकुर ने भाजपा की नीतियों और उनकी कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सत्ता में आने के बाद अपनी विचारधारा को पूरी तरह से बदल लेती है। उन्होंने कहा, “यह विडंबना है कि भाजपा, जो खुद को हिंदू धर्म का रक्षक बताती है, वह अपने कार्यकाल में हिंदुओं के सबसे प्रमुख मुद्दों को ही नजरअंदाज कर देती है।”
छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई बहस
ठाकुर के इस बयान ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है। जहां भाजपा की सरकार इन आरोपों पर चुप्पी साधे हुए है, वहीं विपक्षी दल और अन्य संगठन इस मुद्दे को लेकर मुखर हो गए हैं।
गौमाता को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देने की मांग पहली बार नहीं उठी है। इससे पहले भी कई धार्मिक संगठनों और नेताओं ने इस विषय पर अपनी राय दी है। लेकिन यशराज ठाकुर जैसे युवा नेता का यह तीखा बयान भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
क्या सरकार करेगी ठोस कदम?
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा सरकार इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देती है। क्या वह इस मांग को गंभीरता से लेते हुए गौमाता को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देने के लिए कदम उठाएगी, या यह मुद्दा भी चुनावी वादों और राजनीतिक बहस तक ही सीमित रह जाएगा?
निष्कर्ष: यशराज ठाकुर के इस बयान ने न केवल भाजपा की नीतियों पर सवाल उठाए हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों को फिर से चर्चा में ला दिया है। गौमाता को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देने की मांग क्या सरकार के एजेंडे में शामिल होगी, यह देखना बाकी है। लेकिन इतना तय है कि यह मुद्दा आने वाले समय में एक बड़ी राजनीतिक बहस का हिस्सा बनने जा रहा है।

