आज से रायपुर साहित्य महोत्सव का आगाज़, उपराष्ट्रपति हरिवंश ने किया भव्य शुभारंभ

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रायपुर साहित्य महोत्सव का भव्य शुभारंभ उपराष्ट्रपति हरिवंश ने किया, तीन दिन तक संवाद, कविता, संस्कृति और साहित्यिक विमर्श का उत्सव चलेगा।

रायपुर। संवाद, साहित्य और संस्कृति के संगम का प्रतीक बन चुका रायपुर साहित्य महोत्सव आज भव्य आयोजन के साथ शुरू हो गया। राजधानी रायपुर में आयोजित इस प्रतिष्ठित साहित्यिक उत्सव का शुभारंभ देश के उपराष्ट्रपति हरिवंश ने दीप प्रज्वलन कर किया। उद्घाटन समारोह में साहित्यकारों, कवियों, बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों और बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया।

तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में कविता, कथा, आलोचना, रंगमंच, लोक संस्कृति, समकालीन विमर्श और युवाओं की साहित्यिक भागीदारी पर केंद्रित दर्जनों सत्र आयोजित किए जाएंगे।


उद्घाटन समारोह में साहित्य की गरिमा

उद्घाटन अवसर पर उपराष्ट्रपति हरिवंश ने अपने संबोधन में कहा कि—

“साहित्य समाज की आत्मा होता है। यह केवल शब्दों का संसार नहीं, बल्कि विचार, संवेदना और लोकतंत्र की चेतना का माध्यम है।”

उन्होंने कहा कि रायपुर साहित्य महोत्सव जैसे आयोजन—

  • युवाओं को साहित्य से जोड़ते हैं
  • संवाद की संस्कृति को मजबूत करते हैं
  • विविध भाषाओं और विचारों को एक मंच पर लाते हैं

उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक साहित्यिक परंपरा की भी सराहना की।


देशभर के नामचीन साहित्यकारों की भागीदारी

इस वर्ष के महोत्सव में—

  • हिंदी, अंग्रेज़ी और क्षेत्रीय भाषाओं के प्रतिष्ठित लेखक
  • प्रसिद्ध कवि और कथाकार
  • रंगकर्मी, पत्रकार और शोधकर्ता

भाग ले रहे हैं।

प्रमुख सत्रों में—

  • समकालीन हिंदी कविता
  • डिजिटल युग में साहित्य
  • स्त्री लेखन और सामाजिक बदलाव
  • लोक संस्कृति और आधुनिकता
  • युवा लेखकों की भूमिका

जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी।


युवाओं और छात्रों के लिए विशेष आकर्षण

आयोजकों के अनुसार इस वर्ष महोत्सव में—

  • स्कूल-कॉलेज छात्रों के लिए विशेष सत्र
  • ओपन माइक कविता पाठ
  • पुस्तक विमोचन
  • लेखक से संवाद कार्यक्रम

का आयोजन किया गया है।

इसका उद्देश्य है—

  • नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ना
  • लेखन और पठन संस्कृति को बढ़ावा देना
  • संवाद की लोकतांत्रिक परंपरा को मजबूत करना

सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बढ़ाई शोभा

साहित्यिक सत्रों के साथ-साथ—

  • लोक संगीत
  • नाट्य प्रस्तुति
  • कवि सम्मेलन
  • सांस्कृतिक संध्या

ने महोत्सव को बहुआयामी बना दिया।

छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं की झलक ने देशभर से आए मेहमानों को विशेष रूप से आकर्षित किया।


आयोजकों का उद्देश्य

आयोजन समिति के अनुसार रायपुर साहित्य महोत्सव का लक्ष्य—

  • साहित्य को केवल मंच तक सीमित न रखना
  • आम नागरिक को संवाद से जोड़ना
  • विचारों की विविधता को सम्मान देना

है।

उन्होंने कहा कि यह महोत्सव रायपुर को राष्ट्रीय साहित्यिक मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।


आने वाले दिनों में होंगे ये प्रमुख सत्र

महोत्सव के अगले दो दिनों में—

  • प्रसिद्ध लेखकों के व्याख्यान
  • युवा रचनाकारों का मंच
  • समसामयिक मुद्दों पर पैनल चर्चा
  • नई पुस्तकों का विमोचन

जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।


निष्कर्ष

रायपुर साहित्य महोत्सव न केवल एक आयोजन, बल्कि संवाद, विचार और संस्कृति का उत्सव बन चुका है। यह मंच साहित्य को समाज से जोड़ने और नई पीढ़ी में रचनात्मक चेतना जगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

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