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शीर्षक: पेयजल संकट: 20 हजार करोड़ खर्च के बाद भी सूखे नल और बोर, अब सरकार का फोकस मल्टी विलेज प्रोजेक्ट पर

📑 इस लेख मेंछत्तीसगढ़ में पेयजल संकट गहराया, 20 हजार करोड़ खर्च के बाद भी कई जगह नल और बोर सूखे। अब समाधान के लिए मल्टी विलेज प्रोजेक्ट…

📅 7 March 2026, 11:04 am अपडेट: 16 May 2026
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छत्तीसगढ़ में पेयजल संकट गहराया, 20 हजार करोड़ खर्च के बाद भी कई जगह नल और बोर सूखे। अब समाधान के लिए मल्टी विलेज प्रोजेक्ट पर जोर।


करोड़ों खर्च के बावजूद पेयजल संकट बरकरार

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित कई जिलों में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। राज्य में पिछले कुछ वर्षों में पानी की योजनाओं पर करीब 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन इसके बावजूद कई गांवों और शहरों में नल और बोरवेल सूखे पड़े हैं।

स्थिति यह है कि गर्मी शुरू होते ही लोगों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। कई इलाकों में लोगों को टैंकरों के भरोसे रहना पड़ रहा है, जबकि कुछ गांवों में महिलाओं और बच्चों को रोजाना दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है।

योजनाओं पर भारी खर्च, लेकिन परिणाम सीमित

राज्य सरकार द्वारा पेयजल आपूर्ति के लिए कई योजनाएं चलाई गईं। इनमें नल-जल योजना, हैंडपंप, बोरवेल और पाइपलाइन परियोजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए।

हालांकि जमीनी स्तर पर कई परियोजनाएं उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हो सकीं। कई स्थानों पर बोरवेल सूख गए हैं, जबकि कुछ जगहों पर पाइपलाइन तो बिछाई गई लेकिन नियमित जल आपूर्ति नहीं हो पा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भूजल स्तर में लगातार गिरावट और जल स्रोतों के संरक्षण की कमी भी संकट का बड़ा कारण है।

गर्मी में और बढ़ जाती है परेशानी

हर साल गर्मियों के मौसम में पानी की समस्या और गंभीर हो जाती है। मार्च से ही कई क्षेत्रों में जल स्रोतों का स्तर कम होने लगता है और मई-जून तक स्थिति काफी कठिन हो जाती है।

कई ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप बंद हो जाते हैं और बोरवेल में पानी नहीं निकलता। इससे लोगों को कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता है। शहरी क्षेत्रों में भी कई कॉलोनियों में जल आपूर्ति प्रभावित होती है।

अब मल्टी विलेज प्रोजेक्ट पर जोर

पेयजल संकट को देखते हुए सरकार अब मल्टी विलेज वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट पर जोर दे रही है। इस परियोजना के तहत एक बड़े जल स्रोत से कई गांवों को पाइपलाइन के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जाएगा।

इस योजना का उद्देश्य यह है कि जिन गांवों में स्थानीय जल स्रोत कमजोर हैं, वहां दूरस्थ जल स्रोतों से पानी पहुंचाया जा सके। इससे स्थायी समाधान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

दीर्घकालिक समाधान की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नई योजनाएं शुरू करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण जैसे उपायों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

यदि जल स्रोतों का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में पेयजल संकट और गंभीर हो सकता है।

लोगों को भी निभानी होगी जिम्मेदारी

जल संकट से निपटने के लिए केवल सरकार के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। लोगों को भी पानी के संरक्षण के लिए जागरूक होना होगा। पानी का विवेकपूर्ण उपयोग और वर्षा जल संग्रहण जैसे कदम इस समस्या को कम करने में मदद कर सकते हैं।

रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में पेयजल संकट एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में मल्टी विलेज प्रोजेक्ट से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में लोगों को राहत मिल सकेगी।


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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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