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बाघों की गिनती के लिए जंगलों में उतरेगी टाइगर एस्टीमेशन टीम 12 जनवरी से कवर्धा जिले में शुरू होगा फेज-1, कैमरा ट्रैप और ट्रैकिंग से होगी गणना

📑 इस लेख मेंकवर्धा जिले में 12 जनवरी से टाइगर एस्टीमेशन का फेज-1 शुरू होगा, जंगलों में टीम उतरकर कैमरा ट्रैप से बाघों की गिनती करेगी।कैमरा ट्रैप और…

📅 12 January 2026, 6:09 pm अपडेट: 16 May 2026
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कवर्धा जिले में 12 जनवरी से टाइगर एस्टीमेशन का फेज-1 शुरू होगा, जंगलों में टीम उतरकर कैमरा ट्रैप से बाघों की गिनती करेगी।

कवर्धा। छत्तीसगढ़ के जंगलों में बाघों की वास्तविक संख्या जानने के लिए एक बार फिर टाइगर एस्टीमेशन (Tiger Estimation) अभियान शुरू होने जा रहा है। इस अभियान के फेज-1 की शुरुआत 12 जनवरी से कवर्धा जिले में की जाएगी। इसके लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित टाइगर एस्टीमेशन टीम जंगलों में उतरेगी, जो आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों से बाघों की उपस्थिति और गतिविधियों का आकलन करेगी।

वन विभाग द्वारा यह अभियान राष्ट्रीय बाघ संरक्षण कार्यक्रम के तहत संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य न केवल बाघों की संख्या का आंकलन करना है, बल्कि उनके आवास, मूवमेंट कॉरिडोर, शिकार प्रजातियों और जंगलों की स्थिति की भी जानकारी एकत्र करना है।


कैमरा ट्रैप और पैरों के निशान से होगी पहचान

वन अधिकारियों के अनुसार फेज-1 में कैमरा ट्रैप, पगमार्क (पैरों के निशान), स्कैट एनालिसिस (मल परीक्षण) और अन्य फील्ड तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। जंगल के संवेदनशील इलाकों में कैमरे लगाए जाएंगे, जिससे बाघों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड किए जा सकें।

इन आंकड़ों के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि जिले में कितने बाघ मौजूद हैं, उनकी उम्र, लिंग और मूवमेंट पैटर्न क्या है।


कवर्धा के जंगलों पर विशेष फोकस

कवर्धा जिला पहले से ही जैव विविधता के लिहाज से समृद्ध माना जाता है। यहां के जंगल बाघों के लिए उपयुक्त आवास माने जाते हैं। वन विभाग का मानना है कि इस जिले में बाघों की संख्या में स्थिरता या वृद्धि हुई है, जिसकी पुष्टि इस गणना से होगी।

वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान के दौरान स्थानीय वन कर्मियों, ट्रैकर्स और विशेषज्ञों की टीम लगातार जंगलों में गश्त करेगी।


सुरक्षा और प्रशिक्षण के पुख्ता इंतजाम

टाइगर एस्टीमेशन टीम में शामिल सभी सदस्यों को पहले से प्रशिक्षण दिया गया है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए टीम को जीपीएस, वायरलेस सेट और जरूरी सुरक्षा उपकरणों से लैस किया गया है। साथ ही किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल टीम भी अलर्ट मोड पर रहेगी।


बाघ संरक्षण की दिशा में अहम कदम

वन विभाग का कहना है कि बाघों की गणना केवल संख्या जानने के लिए नहीं, बल्कि संरक्षण रणनीति तैयार करने के लिए बेहद जरूरी है। इससे यह तय किया जा सकेगा कि किन इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत है और कहां नए संरक्षण उपाय अपनाए जाने चाहिए।


आम लोगों से सहयोग की अपील

वन विभाग ने ग्रामीणों और जंगल से सटे इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे अभियान के दौरान टीम का सहयोग करें। किसी भी प्रकार की वन्यजीव गतिविधि या बाघ से जुड़े संकेत मिलने पर तुरंत वन विभाग को सूचना दें।


आगे होंगे अन्य फेज

अधिकारियों ने बताया कि फेज-1 के बाद अन्य चरणों में भी राज्य के अलग-अलग जिलों में टाइगर एस्टीमेशन किया जाएगा। इसके बाद सभी आंकड़ों को एकत्र कर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे केंद्र सरकार और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को भेजा जाएगा।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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