छत्तीसगढ़ में 72 हजार जवानों के अभियान से नक्सलवाद कमजोर, 535 नक्सली ढेर, 2898 ने सरेंडर किया, अब केवल 23 सक्रिय बचे।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। बीते वर्षों में 72 हजार से अधिक जवानों के साहस, रणनीति और लगातार चलाए गए अभियानों से नक्सल नेटवर्क कमजोर हुआ है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 535 नक्सली मारे गए हैं, जबकि 2898 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। अब सक्रिय नक्सलियों की संख्या घटकर महज 23 रह गई है। इसे लोकतंत्र की बड़ी जीत माना जा रहा है। 🇮🇳
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, लगातार चलाए गए ऑपरेशन, सड़क निर्माण, कैंप विस्तार और स्थानीय लोगों के सहयोग से यह सफलता मिली है। पहले जहां नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास कार्य करना मुश्किल था, वहीं अब हालात तेजी से बदल रहे हैं।
72 हजार जवानों का बड़ा अभियान
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बलों के करीब 72 हजार जवान तैनात किए गए। इन जवानों ने दुर्गम जंगलों और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार अभियान चलाए।
अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने संयुक्त रणनीति के तहत ऑपरेशन चलाए, जिससे नक्सलियों की गतिविधियां सीमित हो गईं।
535 नक्सली ढेर
अभियानों के दौरान 535 नक्सली मारे गए। सुरक्षा बलों ने कई बड़े नक्सली नेताओं को भी ढेर किया। इससे संगठन की कमान कमजोर हुई और नेटवर्क टूटने लगा।
2898 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
लगातार कार्रवाई और सरकार की पुनर्वास नीति के चलते 2898 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। सरकार की ओर से उन्हें पुनर्वास, रोजगार और मुख्यधारा से जुड़ने के अवसर दिए गए।
अधिकारियों का कहना है कि आत्मसमर्पण की यह संख्या बताती है कि नक्सलियों का भरोसा खत्म हो रहा है और वे सामान्य जीवन की ओर लौटना चाहते हैं।
अब सिर्फ 23 सक्रिय नक्सली
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, अब सक्रिय नक्सलियों की संख्या घटकर 23 रह गई है। यह राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
विकास कार्यों को मिली गति
नक्सलवाद कमजोर होने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हुआ है।
विशेषकर बस्तर संभाग में विकास कार्यों को नई गति मिली है। गांवों तक सड़क और मोबाइल नेटवर्क पहुंच रहा है।
स्थानीय लोगों का बढ़ा विश्वास
सुरक्षा बलों की कार्रवाई और विकास कार्यों से स्थानीय लोगों का विश्वास बढ़ा है। ग्रामीण अब खुलकर प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं।
लोकतंत्र की बड़ी जीत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह लोकतंत्र की बड़ी जीत है। लंबे समय से प्रभावित क्षेत्रों में अब शांति और विकास का माहौल बन रहा है।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नक्सलवाद पूरी तरह खत्म होने तक अभियान जारी रहेगा। शेष बचे नक्सलियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
72 हजार जवानों के साहस, रणनीति और जनसहयोग से छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद कमजोर हुआ है। 535 नक्सलियों के मारे जाने और 2898 के आत्मसमर्पण से लोकतंत्र मजबूत हुआ है।

