रायपुर के 70 वार्डों में जमीन की कीमत में बड़ा बदलाव नहीं, आउटर में प्रति हेक्टेयर 30 लाख रुपए तक की कमी

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रायपुर के 70 वार्डों में जमीन की कीमतें स्थिर रहीं, जबकि आउटर इलाकों में गाइडलाइन दरों में प्रति हेक्टेयर 30 लाख रुपये तक की कमी की गई।

रायपुर। रायपुर शहर के रियल एस्टेट बाजार को लेकर जारी नई गाइडलाइन दरों में बड़ा उलटफेर देखने को नहीं मिला है। शहर के 70 वार्डों में जमीन की कीमतों में किसी बड़े बदलाव की घोषणा नहीं की गई है, जबकि शहर के बाहरी इलाकों (आउटर क्षेत्र) में जमीन की दरों में उल्लेखनीय कटौती की गई है।

राजस्व विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, रायपुर नगर निगम क्षेत्र के अधिकांश वार्डों में पूर्व निर्धारित गाइडलाइन दरें यथावत रखी गई हैं। इससे यह साफ है कि शहर के भीतर जमीन खरीदने वालों को फिलहाल किसी बड़ी राहत या अतिरिक्त भार का सामना नहीं करना पड़ेगा।

आउटर इलाकों में मिली राहत

शहर से सटे बाहरी क्षेत्रों में जमीन खरीदने वालों के लिए अच्छी खबर है। आउटर इलाकों में प्रति हेक्टेयर 30 लाख रुपये तक की कमी की गई है। इससे उन लोगों को सीधा लाभ मिलेगा, जो भविष्य में आवासीय कॉलोनी, फार्महाउस या निवेश के उद्देश्य से जमीन खरीदने की योजना बना रहे हैं।

अधिकारियों का कहना है कि आउटर क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से जमीन के लेन-देन में गिरावट देखी जा रही थी। बाजार की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही दरों में संशोधन किया गया है।

गाइडलाइन दरों में संतुलन बनाने की कोशिश

राजस्व विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, गाइडलाइन दरों का उद्देश्य जमीन की सरकारी दरों और बाजार भाव के बीच संतुलन बनाना है। आउटर क्षेत्रों में बाजार भाव अपेक्षाकृत कम होने के कारण वहां दरों में कटौती की गई, जबकि शहर के भीतरी इलाकों में कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।

खरीदारों और निवेशकों को क्या फायदा

नई दरों से:

  • आउटर क्षेत्रों में स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क कम होगा
  • निवेशकों के लिए जमीन खरीदना आसान होगा
  • रियल एस्टेट गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है

विशेषज्ञों का मानना है कि आउटर क्षेत्रों में दरों में कमी से वहां विकास गतिविधियों को गति मिलेगी।

रियल एस्टेट कारोबारियों की प्रतिक्रिया

स्थानीय रियल एस्टेट कारोबारियों ने कहा कि शहर के भीतर पहले से ही दरें काफी ऊंची हैं और बाजार स्थिर है, इसलिए वहां बदलाव न होना स्वाभाविक है। वहीं, आउटर क्षेत्रों में कटौती से जमीन की बिक्री में बढ़ोतरी की संभावना है।

एक प्रॉपर्टी डीलर के अनुसार,
“आउटर इलाकों में दरें कम होने से मध्यम वर्ग और छोटे निवेशकों को बड़ा फायदा मिलेगा।”

आम लोगों पर सीधा असर

नई गाइडलाइन दरों का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है, क्योंकि जमीन खरीदते समय स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क इन्हीं दरों के आधार पर तय होता है। ऐसे में आउटर इलाकों में जमीन लेने वाले खरीदारों को अब पहले की तुलना में कम खर्च करना होगा।

प्रशासन की अपील

प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि जमीन खरीदने से पहले अपने संबंधित तहसील या सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से नई गाइडलाइन दरों की जानकारी अवश्य प्राप्त करें, ताकि किसी प्रकार की गलतफहमी न हो।

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