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ठग ने डराने के लिए कहा – मनी लॉन्ड्रिंग का केस है: आरटीओ एजेंट 24 घंटे ‘डिजिटल अरेस्ट’, 17.15 लाख रुपए गंवाए

📑 इस लेख मेंडिजिटल अरेस्ट और मनी लॉन्ड्रिंग केस का डर दिखाकर साइबर ठगों ने आरटीओ एजेंट को 24 घंटे फंसाकर 17.15 लाख रुपए ठग लिए।कैसे शुरू हुआ…

📅 19 February 2026, 11:09 am अपडेट: 16 May 2026
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डिजिटल अरेस्ट और मनी लॉन्ड्रिंग केस का डर दिखाकर साइबर ठगों ने आरटीओ एजेंट को 24 घंटे फंसाकर 17.15 लाख रुपए ठग लिए।

रायपुर। एक आरटीओ एजेंट को साइबर ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर करीब 24 घंटे तक मानसिक दबाव में रखा और ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 17.15 लाख रुपए की ठगी कर ली। मामला सामने आने के बाद पीड़ित ने साइबर अपराध शाखा में शिकायत दर्ज कराई है।

पीड़ित एजेंट के मुताबिक, उसके मोबाइल पर कॉल कर खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने कहा कि उसके बैंक खाते और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल अवैध लेन-देन में हुआ है। कॉल करने वाले ने गिरफ्तारी और खाते सील करने की धमकी देते हुए वीडियो कॉल पर लगातार बने रहने का दबाव बनाया।


कैसे शुरू हुआ ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खेल

ठग ने सबसे पहले पीड़ित को यह कहकर डराया कि उसके नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज हो चुका है। इसके बाद कहा गया कि जांच पूरी होने तक वह किसी से संपर्क नहीं कर सकता।
ठगों ने पीड़ित को यह भरोसा दिलाया कि अगर वह सहयोग करेगा तो उसका नाम केस से हटा दिया जाएगा।


24 घंटे तक डर और तनाव में रहा पीड़ित

ठगों ने पीड़ित को लगातार वीडियो कॉल पर बने रहने को कहा और हर गतिविधि पर नजर रखने का दावा किया। उसे डराया गया कि अगर उसने कॉल काटी या किसी को जानकारी दी, तो तुरंत पुलिस उसके घर पहुंच जाएगी।

इसी मानसिक दबाव के बीच ठगों ने अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कराने शुरू कर दिए।


किस तरह निकाले गए 17.15 लाख रुपए

पीड़ित से कहा गया कि उसे अपनी “निर्दोषता साबित” करने के लिए खातों का वेरिफिकेशन कराना होगा। इसी बहाने उससे कई बार में कुल 17.15 लाख रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए।

जब अगली किस्त के लिए फिर दबाव बनाया गया, तब पीड़ित को संदेह हुआ और उसने परिजनों से बात की। इसके बाद पूरा मामला सामने आया।


ठगों ने पुलिस और एजेंसी का फर्जी डर दिखाया

पीड़ित के अनुसार, ठगों ने वीडियो कॉल के दौरान फर्जी आईडी कार्ड और नकली कार्यालय का बैकग्राउंड दिखाया। उन्होंने जांच एजेंसी और पुलिस का नाम लेकर यह भरोसा दिलाया कि पूरा मामला “सरकारी प्रक्रिया” के तहत चल रहा है।

डर के कारण पीड़ित ने न तो बैंक से संपर्क किया और न ही किसी जानकार को इसकी जानकारी दी।


साइबर पुलिस ने दर्ज किया मामला

पीड़ित की शिकायत पर अज्ञात ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि जिन खातों में पैसा ट्रांसफर हुआ है, वे किसके नाम पर हैं और उनका नेटवर्क किन राज्यों में फैला है।


‘डिजिटल अरेस्ट’ बना नया साइबर जाल

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। यह पूरी तरह से ठगों द्वारा गढ़ा गया शब्द है, जिसके जरिए वे लोगों को मानसिक रूप से डराकर पैसे ऐंठते हैं।

अधिकतर मामलों में ठग खुद को सीबीआई, ईडी, पुलिस या किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर कॉल करते हैं और वीडियो कॉल पर फंसाकर लोगों से रकम वसूलते हैं।


पुलिस की अपील – ऐसे कॉल से रहें सतर्क

पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि –

  • किसी भी जांच एजेंसी का अधिकारी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहता।
  • गिरफ्तारी, केस या खाते सील होने की धमकी देकर पैसा मांगा जाए तो तुरंत कॉल काटें।
  • नजदीकी पुलिस थाने या साइबर हेल्पलाइन में तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।

समय पर जानकारी मिलती तो बच सकते थे लाखों

पीड़ित ने बताया कि अगर उसे पहले से इस तरह की ठगी की जानकारी होती तो वह कभी भी इतनी बड़ी रकम ट्रांसफर नहीं करता। डर और दबाव में आकर उसने बिना किसी से पूछे पैसे भेज दिए।

फिलहाल पुलिस तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कॉल डिटेल, आईपी एड्रेस और बैंक खातों की जांच कर रही है।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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