तीन अनिवार्य ऑनलाइन कोर्स नहीं करने पर छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों की अप्रैल की सैलरी रोकी जाएगी, विभागीय सचिवों ने सभी विभागों को सख्त निर्देश जारी किए।
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के हजारों कर्मचारियों की सैलरी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। यदि राज्य के शासकीय कर्मचारी तय समय-सीमा के भीतर तीन अनिवार्य ऑनलाइन कोर्स पूरे नहीं करते हैं, तो उनकी अप्रैल माह की सैलरी रोकी जा सकती है। इस संबंध में विभागीय सचिवों द्वारा सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
शासन ने यह कदम कर्मचारियों की डिजिटल दक्षता, प्रशासनिक पारदर्शिता और ई-गवर्नेंस को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया है। लेकिन आदेश जारी होते ही कर्मचारियों के बीच चिंता और असमंजस का माहौल बन गया है।
कौन से हैं वे तीन अनिवार्य कोर्स?
शासन द्वारा जिन तीन कोर्स को अनिवार्य किया गया है, वे हैं—
- ई-ऑफिस प्रणाली प्रशिक्षण (e-Office Course)
- साइबर सुरक्षा जागरूकता कोर्स (Cyber Security Awareness)
- शासकीय आचरण एवं नैतिकता कोर्स (Code of Conduct & Ethics)
इन तीनों कोर्स को तय पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन पूरा करना अनिवार्य किया गया है। शासन का कहना है कि यह प्रशिक्षण प्रशासनिक कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए आवश्यक है।
विभागीय सचिवों ने जारी किया सख्त पत्र
सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से सभी विभागीय सचिवों को पत्र जारी कर कहा गया है कि—
- सभी अधिकारी और कर्मचारी अनिवार्य रूप से कोर्स पूर्ण करें
- कोर्स पूरा करने का प्रमाण पत्र विभाग में जमा किया जाए
- समय-सीमा के भीतर कोर्स पूरा नहीं करने वालों की अप्रैल माह की सैलरी रोकी जाएगी
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इसमें किसी प्रकार की छूट या रियायत नहीं दी जाएगी।
कर्मचारियों में बढ़ी चिंता
इस आदेश के बाद कई विभागों में कर्मचारियों के बीच बेचैनी बढ़ गई है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ कर्मचारियों ने कहा है कि—
- इंटरनेट की सुविधा सीमित है
- तकनीकी जानकारी का अभाव है
- पोर्टल पर लॉगिन और कोर्स पूरा करने में परेशानी हो रही है
कर्मचारी संगठनों ने शासन से मांग की है कि समय-सीमा बढ़ाई जाए और तकनीकी सहायता केंद्र खोले जाएं।
शासन का पक्ष: सुधार के लिए जरूरी कदम
शासन के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि—
- डिजिटल सिस्टम लागू करने के लिए प्रशिक्षण अनिवार्य है
- बिना प्रशिक्षित कर्मचारियों के ई-गवर्नेंस सफल नहीं हो सकता
- यह आदेश कर्मचारियों के हित में है, न कि दंड के लिए
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो कर्मचारी समय पर कोर्स पूरा कर लेंगे, उनकी सैलरी में कोई रुकावट नहीं आएगी।
समय-सीमा को लेकर बढ़ी अफरातफरी
सूत्रों के मुताबिक, कोर्स पूरा करने की अंतिम तिथि मार्च के अंतिम सप्ताह तक तय की गई है। इसके बाद अप्रैल में वेतन बिल बनाने के समय यह देखा जाएगा कि किस कर्मचारी ने कोर्स पूरा किया है और किसने नहीं।
यदि कर्मचारी कोर्स अधूरा छोड़ देते हैं, तो—
- वेतन रोका जा सकता है
- विभागीय नोटिस जारी होगा
- बाद में कोर्स पूरा करने पर ही वेतन जारी होगा
कर्मचारी संगठनों की चेतावनी
कुछ कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि तकनीकी समस्याओं के बावजूद सैलरी रोकी गई, तो वे प्रदर्शन और आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।
अब देखना होगा कि शासन समय-सीमा में कोई राहत देता है या सख्ती से आदेश लागू करता है।

