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प्राचार्य ने गरीब छात्रों से करवाई पुताई: शिकायत पर परिजनों से कहा – “आपके बच्चों को मुफ्त में बैग-किताबें मिल रही हैं, आप पैसा नहीं देते”

📑 इस लेख मेंसूरजपुर के सरकारी स्कूल में प्राचार्य पर गरीब छात्रों से पुताई कराने का आरोप, शिकायत पर परिजनों से विवादित बयान, मामला रायपुर तक पहुंचा, जांच…

📅 2 March 2026, 11:38 am अपडेट: 16 May 2026
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सूरजपुर के सरकारी स्कूल में प्राचार्य पर गरीब छात्रों से पुताई कराने का आरोप, शिकायत पर परिजनों से विवादित बयान, मामला रायपुर तक पहुंचा, जांच के निर्देश।

सूरजपुर / रायपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। एक सरकारी स्कूल के प्राचार्य पर आरोप है कि उन्होंने गरीब और कमजोर वर्ग के छात्रों से स्कूल भवन की पुताई करवाई। जब इस मामले की शिकायत परिजनों ने की, तो प्राचार्य ने कथित रूप से यह कहकर जवाब दिया कि “आपके बच्चों को तो सरकार से मुफ्त बैग और किताबें मिल रही हैं, आप कोई पैसा नहीं देते।”

मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और जांच के निर्देश दिए गए हैं।


स्कूल में बच्चों से करवाई गई मजदूरी

परिजनों का आरोप है कि स्कूल में पढ़ने वाले कई बच्चों को पढ़ाई के समय कक्षा में बैठाने के बजाय स्कूल परिसर में पुताई और साफ-सफाई जैसे कामों में लगाया गया।
बताया जा रहा है कि इन बच्चों से दीवारों पर रंग-रोगन करवाया गया और ब्रश तथा पेंट पकड़ाकर काम कराया गया।

कुछ अभिभावकों ने बताया कि बच्चे घर आकर थकान और हाथों में जलन की शिकायत कर रहे थे। जब उनसे पूछताछ की गई तो बच्चों ने पूरी बात परिजनों को बताई।


शिकायत करने पर प्राचार्य का विवादित बयान

परिजनों का कहना है कि जब वे इस मामले की शिकायत लेकर स्कूल पहुंचे, तो प्राचार्य ने उल्टा उन्हें ही यह कहकर चुप कराने की कोशिश की कि—

“आपके बच्चों को सरकार की ओर से मुफ्त बैग और किताबें मिलती हैं, आप स्कूल के लिए कोई शुल्क नहीं देते, फिर इतना काम करवाने में क्या दिक्कत है?”

इस बयान के बाद अभिभावकों में नाराजगी और बढ़ गई।


शिक्षा के अधिकार पर सवाल

अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना को बच्चों के शिक्षा अधिकार का सीधा उल्लंघन बताया है। उनका कहना है कि स्कूल बच्चों को पढ़ाने के लिए होता है, न कि उनसे मजदूरी कराने के लिए।

कानूनी जानकारों के अनुसार किसी भी परिस्थिति में बच्चों से शारीरिक श्रम करवाना न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि बाल संरक्षण कानूनों और शिक्षा से जुड़े नियमों का भी उल्लंघन है।


गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों को बनाया गया निशाना

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह काम मुख्य रूप से उन्हीं बच्चों से करवाया गया, जो गरीब परिवारों से आते हैं और सरकारी योजनाओं के तहत पढ़ाई कर रहे हैं।
परिजनों का कहना है कि सक्षम और प्रभावशाली परिवारों के बच्चों को ऐसे किसी काम में नहीं लगाया गया।


मामला पहुंचा जिला शिक्षा अधिकारियों तक

घटना की जानकारी मिलते ही मामला जिला शिक्षा अधिकारियों तक पहुंच गया है। प्रारंभिक स्तर पर स्कूल से जवाब मांगा गया है और पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित प्राचार्य के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।


राजधानी रायपुर तक पहुंची शिकायत

सूरजपुर से यह मामला अब राज्य स्तर तक पहुंच गया है। परिजनों के एक समूह ने रायपुर पहुंचकर वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपी है।
उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारी पर कार्रवाई की जाए और बच्चों से जबरन काम कराने की परंपरा पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।


बाल अधिकार संगठनों ने जताई नाराजगी

इस मामले पर बाल अधिकारों से जुड़े संगठनों ने भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि—

  • बच्चों से शारीरिक श्रम करवाना कानूनन अपराध है
  • इससे बच्चों के मानसिक विकास पर भी बुरा असर पड़ता है
  • ऐसे मामलों में केवल चेतावनी नहीं, बल्कि सख्त कार्रवाई जरूरी है

शिक्षा विभाग ने दिए जांच के संकेत

इस पूरे मामले को लेकर छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग ने गंभीर रुख अपनाया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, प्राथमिक जांच के बाद जरूरत पड़ी तो प्राचार्य को निलंबित कर विस्तृत जांच कराई जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि स्कूलों में बच्चों से किसी भी प्रकार का गैर-शैक्षणिक कार्य कराना स्पष्ट रूप से नियमों के खिलाफ है।


राज्य में पहले भी आ चुके हैं ऐसे मामले

गौरतलब है कि इससे पहले भी छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में स्कूलों में बच्चों से साफ-सफाई, बर्तन धोने और अन्य कार्य करवाने के मामले सामने आते रहे हैं।
हर बार कार्रवाई की बात होती है, लेकिन कुछ समय बाद फिर ऐसे ही आरोप सामने आने लगते हैं।


परिजनों में डर और गुस्सा

परिजनों का कहना है कि वे गरीब जरूर हैं, लेकिन अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देने के लिए स्कूल भेजते हैं। ऐसे में यदि स्कूल में बच्चों से मजदूरी करवाई जाएगी, तो यह उनके भरोसे के साथ धोखा है।

कुछ अभिभावकों ने यह भी बताया कि बच्चों को यह कहकर डराया गया कि यदि उन्होंने काम नहीं किया तो उनके नाम काट दिए जाएंगे।


अब सबकी नजर जांच पर

फिलहाल पूरे मामले में शिक्षा विभाग की जांच शुरू होने की तैयारी है। अब देखना होगा कि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है या नहीं और यदि होती है, तो संबंधित प्राचार्य पर क्या कार्रवाई होती है।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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