राजधानी में लगातार बढ़ रही वाहनों की संख्या, वॉल्यूम ट्रैफिक सिस्टम फेल

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रायपुर में वाहनों की बढ़ती संख्या के बीच वॉल्यूम ट्रैफिक सिस्टम फेल, कम गाड़ियों पर भी सिग्नल पर डेढ़ मिनट इंतजार, लोगों को रोजाना परेशानी।

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन ट्रैफिक को सुचारु बनाने के लिए लगाया गया वॉल्यूम बेस्ड ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम अब अपनी उपयोगिता खोता नजर आ रहा है। कई प्रमुख चौक-चौराहों पर हालात ऐसे बन गए हैं कि सड़क पर वाहनों की संख्या कम होने के बावजूद भी लोगों को सिग्नल पर डेढ़ मिनट तक इंतजार करना पड़ रहा है।

शहर के जीई रोड, पंडरी, तेलीबांधा, शंकर नगर, जयस्तंभ चौक, गोलबाजार और एमजी रोड जैसे व्यस्त इलाकों में सुबह और शाम के समय ट्रैफिक का दबाव सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। पहले जहां वॉल्यूम ट्रैफिक सिस्टम को इस उद्देश्य से लगाया गया था कि सड़क पर वाहनों की संख्या के अनुसार सिग्नल का समय अपने आप तय हो जाएगा, वहीं अब यह सिस्टम वास्तविक ट्रैफिक लोड को ठीक से पढ़ ही नहीं पा रहा है।

वॉल्यूम ट्रैफिक सिस्टम का उद्देश्य हुआ बेअसर

नगर में लगाए गए स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम में सेंसर और कैमरों की मदद से सड़क पर खड़ी और गुजरने वाली गाड़ियों की संख्या का आंकलन कर सिग्नल टाइम तय किया जाता है। लेकिन मौजूदा स्थिति में कई सिग्नल ऐसे हैं, जहां सड़क खाली होने के बावजूद भी रेड लाइट लंबे समय तक बनी रहती है।

लोगों का कहना है कि कई बार सामने की सड़क पूरी तरह साफ होने पर भी उन्हें 90 सेकंड से लेकर डेढ़ मिनट तक इंतजार करना पड़ता है। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि ईंधन की खपत भी बढ़ रही है।

लगातार बढ़ रही गाड़ियों की संख्या

परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार राजधानी रायपुर में हर साल हजारों नए दोपहिया और चारपहिया वाहन पंजीकृत हो रहे हैं। बढ़ती आबादी, नई कॉलोनियों और कार्यालयों के विस्तार के कारण शहर की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव तेजी से बढ़ा है। लेकिन सड़क चौड़ीकरण, फ्लाईओवर और ट्रैफिक प्रबंधन उसी रफ्तार से विकसित नहीं हो पाया है।

व्यस्त चौकों पर ज्यादा परेशानी

शंकर नगर चौक, तेलीबांधा चौक, जयस्तंभ चौक और पंडरी चौक जैसे इलाकों में स्थिति और ज्यादा खराब है। यहां सुबह दफ्तर जाने के समय और शाम को घर लौटते वक्त लंबी कतारें लग जाती हैं। कई बार सिग्नल खुलने के बाद भी जाम के कारण गाड़ियां आगे नहीं बढ़ पातीं, जबकि दूसरी ओर की लेन में वाहन लगभग नहीं के बराबर होते हैं।

आम लोगों की शिकायत

स्थानीय वाहन चालकों का कहना है कि वॉल्यूम ट्रैफिक सिस्टम होने के बावजूद ट्रैफिक पुलिस को मैनुअल रूप से सिग्नल संचालन करना चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति के अनुसार ट्रैफिक को नियंत्रित किया जा सके। लोगों का मानना है कि तकनीकी खराबी या सेंसर की गलत रीडिंग के कारण यह सिस्टम ट्रैफिक दबाव को सही तरीके से नहीं आंक पा रहा है।

कई नागरिकों ने यह भी कहा कि जब सिग्नल खाली सड़क पर भी लंबा रेड रहता है, तो लोग मजबूरी में नियम तोड़ने लगते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।

ट्रैफिक विभाग का पक्ष

ट्रैफिक विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वॉल्यूम बेस्ड सिग्नल सिस्टम की समय-समय पर तकनीकी जांच की जाती है। कुछ चौराहों पर सेंसर और कैमरों में तकनीकी समस्या सामने आई है, जिन्हें जल्द ठीक कराया जाएगा। विभाग ने यह भी बताया कि शहर के कुछ प्रमुख सिग्नलों पर ट्रायल के तौर पर नए सॉफ्टवेयर अपडेट किए जा रहे हैं, ताकि वाहनों की गिनती और सिग्नल टाइमिंग अधिक सटीक हो सके।

अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में व्यस्त चौराहों पर मैनुअल मॉनिटरिंग भी बढ़ाई जाएगी, ताकि ट्रैफिक जाम की स्थिति को तुरंत संभाला जा सके।

बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल स्मार्ट सिग्नल सिस्टम पर निर्भर रहने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके साथ-साथ पार्किंग प्रबंधन, अवैध कट, सड़कों पर अतिक्रमण और बस-ऑटो स्टॉपेज के अव्यवस्थित संचालन पर भी सख्त नियंत्रण जरूरी है। तभी राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था वास्तव में सुचारु बन पाएगी।

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