जशपुर। स्वस्थ माता-तंदुरुस्त बच्चा अभियान
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले में ‘स्वस्थ माता-तंदुरुस्त बच्चा’ अभियान का शुभारंभ किया। यह पहल आईआईटी बॉम्बे के सहयोग से शुरू की गई है और इसका उद्देश्य माताओं और बच्चों के पोषण स्तर को बेहतर बनाना तथा जशपुर को कुपोषण मुक्त जिला बनाना है। मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश की समृद्धि और उन्नति के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
माताओं और बच्चों के उत्तम स्वास्थ्य पर जोर
मुख्यमंत्री साय ने कहा, “माताओं और बच्चों का उत्तम स्वास्थ्य प्रदेश की समृद्धि का आधार है। यह अभियान न केवल जशपुर बल्कि पूरे राज्य के लिए एक आदर्श पहल बनेगा।” उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार मातृ और शिशु स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए लोक कल्याणकारी योजनाओं को लागू कर रही है।
इस अभियान के तहत गर्भवती और शिशुवती माताओं तथा 6 वर्ष तक के बच्चों को पोषण आहार, पूरक आहार और स्तनपान की महत्ता के बारे में जानकारी दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सही पोषण से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर हो सकेगा।
स्वास्थ्य और पोषण के लिए नई पहल
स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से चलाए जा रहे इस अभियान में 9500 से अधिक स्वास्थ्य और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भाग ले रहे हैं। इन सभी को आईआईटी बॉम्बे द्वारा पोषण संबंधी ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
इसके अलावा, 300 से अधिक मास्टर ट्रेनर जशपुर जिले में कार्यरत मैदानी कार्यकर्ताओं को सतत प्रशिक्षण देंगे। यह प्रशिक्षण पोषण आहार, पूरक आहार और स्तनपान जैसे मुद्दों पर केंद्रित होगा, ताकि कुपोषण की समस्या को प्रभावी ढंग से खत्म किया जा सके।
कुपोषण मुक्त जशपुर का लक्ष्य
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जशपुर जिले में कुपोषण को पूरी तरह समाप्त करना है। इसके तहत विशेष रूप से गर्भवती और शिशुवती माताओं तथा छोटे बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। अभियान का फोकस पोषण आहार की जानकारी देना और सही समय पर पूरक आहार प्रदान करना है।
आईआईटी बॉम्बे का सहयोग
अभियान को सफल बनाने के लिए आईआईटी बॉम्बे की विशेषज्ञता का उपयोग किया जा रहा है। यह संस्थान कार्यकर्ताओं और मास्टर ट्रेनरों को पोषण और स्वास्थ्य संबंधी नवीनतम तकनीकों और उपायों की जानकारी प्रदान कर रहा है। इस पहल से न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि जिले के ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में पोषण संबंधी जागरूकता भी बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री ने अभियान की सराहना की
साय ने कहा कि यह अभियान जिले में स्वास्थ्य और पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और कुपोषण को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस पहल को अन्य जिलों में भी लागू करने पर विचार कर रही है, ताकि पूरे प्रदेश में मातृ और शिशु स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सके।
उन्होंने कहा, “यह पहल माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने और कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
स्थानीय समुदाय की प्रतिक्रिया
जशपुर के बगिया गांव में आयोजित शुभारंभ कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और ग्रामीण उपस्थित थे। उन्होंने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला कदम बताया।
गर्भवती महिला सुनीता देवी ने कहा, “पहले पोषण के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। अब हमें सही पोषण आहार की जानकारी मिल रही है। यह हमारे और हमारे बच्चों के लिए बहुत मददगार होगा।”
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रजनी कुमारी ने कहा, “आईआईटी बॉम्बे से मिला प्रशिक्षण हमारे काम को और बेहतर बनाएगा। हम अब गांवों में माताओं और बच्चों को अधिक प्रभावी ढंग से मार्गदर्शन दे सकेंगे।”
सरकार की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए सरकार स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी योजनाओं को और सुदृढ़ करेगी।

अभियान का महत्व
‘स्वस्थ माता-तंदुरुस्त बच्चा’ अभियान प्रदेश में पोषण स्तर सुधारने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। यह न केवल कुपोषण को समाप्त करने में मदद करेगा, बल्कि माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाकर प्रदेश की समृद्धि और विकास को नई ऊंचाई देगा।
इस पहल से जुड़े सभी विभागों और कार्यकर्ताओं को उनके योगदान के लिए सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें प्रेरित किया कि वे इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी मेहनत और समर्पण के साथ काम करें।
निष्कर्ष
‘स्वस्थ माता-तंदुरुस्त बच्चा’ अभियान छत्तीसगढ़ में मातृ और शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम है। आईआईटी बॉम्बे के सहयोग से यह पहल जशपुर को कुपोषण मुक्त जिला बनाने के साथ-साथ राज्य के विकास और समृद्धि के लिए एक आदर्श मॉडल साबित होगी।

