रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रथम डीजीपी श्रीमोहन शुक्ला का निधन
छत्तीसगढ़ के प्रथम पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) श्रीमोहन शुक्ला का आज प्रातः आकस्मिक निधन हो गया। 85 वर्षीय रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी श्री शुक्ला ने भोपाल के वैशाली नगर स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पुलिस महकमे सहित पूरे प्रशासनिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनका अंतिम संस्कार आज दोपहर भोपाल में किया गया, जहां परिवारजनों, मित्रों और पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
छत्तीसगढ़ के पहले डीजीपी थे श्रीमोहन शुक्ला
छत्तीसगढ़ के गठन के बाद प्रदेश के पहले पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के रूप में श्री श्रीमोहन शुक्ला को नियुक्त किया गया था। उन्होंने 1 नवंबर 2000 से 26 मई 2001 तक डीजीपी पद पर सेवाएं दीं और नए राज्य में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पुलिस सेवा में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए, उन्हें 26 मई 2001 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के प्रथम अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया। इस पद पर वे 2 अक्टूबर 2004 तक कार्यरत रहे और प्रदेश में प्रशासनिक सेवाओं के चयन व संगठनात्मक व्यवस्था को मजबूत किया।
पुलिस मुख्यालय में श्रद्धांजलि सभा आयोजित
श्री शुक्ला के निधन पर छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय, नया रायपुर में एक श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। इस दौरान पुलिस महानिदेशक (DGP) श्री अशोक जुनेजा सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सभा में पुलिसकर्मियों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत अधिकारी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
डीजीपी श्री अशोक जुनेजा ने इस मौके पर कहा, ” श्रीमोहन शुक्ला जी ने अपने कार्यकाल के दौरान छत्तीसगढ़ पुलिस को एक संगठित और मजबूत स्वरूप प्रदान किया। उनके प्रशासनिक योगदान और अनुशासनप्रियता के कारण पुलिस बल को नई दिशा मिली। उनका मार्गदर्शन हमेशा हमारे लिए प्रेरणादायक रहेगा।”
पुलिस सेवा में अनुकरणीय योगदान
शुक्ला का पुलिस सेवा में योगदान अविस्मरणीय है। वे अपनी ईमानदारी, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता के लिए जाने जाते थे। छत्तीसगढ़ पुलिस बल को सुदृढ़ करने और नए राज्य की कानून-व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने में उनकी भूमिका सराहनीय रही।
उनके सहयोगियों के अनुसार, शुक्ला ने हमेशा पुलिस कर्मियों के कल्याण, आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण और कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कार्य किया। उन्होंने पुलिस बल में आधुनिक तकनीक और रणनीति को बढ़ावा दिया, जिससे प्रदेश में अपराध नियंत्रण और पुलिसिंग की गुणवत्ता में सुधार हुआ।
निजी जीवन और व्यक्तित्व
श्रीमोहन शुक्ला केवल एक कुशल प्रशासक ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और सामाजिक रूप से जागरूक व्यक्ति भी थे। वे अपने सहकर्मियों और अधीनस्थों को प्रेरित करने वाले नेतृत्वकर्ता माने जाते थे। उनकी सरलता और कर्मठता के कारण उन्हें सभी विभागों में अत्यधिक सम्मान प्राप्त था।
पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने कहा कि शुक्ला का व्यक्तित्व अनुकरणीय था, और वे अपने कार्य के प्रति समर्पित रहने के लिए जाने जाते थे। उन्होंने युवा पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षित करने और नैतिक मूल्यों के साथ सेवा देने की प्रेरणा दी।
छत्तीसगढ़ प्रशासन और पुलिस महकमे में शोक की लहर
उनके निधन से छत्तीसगढ़ प्रशासन और पुलिस विभाग में गहरा शोक व्याप्त है। विभिन्न अधिकारियों ने सोशल मीडिया और आधिकारिक माध्यमों से शुक्ला के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया और उनके परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, ” श्रीमोहन शुक्ला जी छत्तीसगढ़ पुलिस के प्रथम महानिदेशक थे और उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभाई। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।”
गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने भी अपने संदेश में कहा, शुक्ला का नेतृत्व और प्रशासनिक क्षमता अनुकरणीय रही है। उन्होंने छत्तीसगढ़ पुलिस के संगठन को मजबूत किया और कानून व्यवस्था को नई दिशा दी। उनका निधन एक अपूरणीय क्षति है।”
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ के पहले डीजीपी श्रीमोहन शुक्ला का निधन पुलिस और प्रशासन के लिए एक बड़ी क्षति है। उनके योगदान और नेतृत्व को हमेशा याद किया जाएगा। उनके दिखाए गए मार्गदर्शन और अनुशासन की सीख आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
पुलिस विभाग और राज्य प्रशासन ने उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की हैं और उनकी स्मृति में विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा भी की है। शुक्ला का योगदान हमेशा छत्तीसगढ़ पुलिस बल के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा।

