रायपुर में बृजमोहन अग्रवाल ने कोचिंग संस्थानों की ‘फीस-ट्रैप’ व्यवस्था खत्म करने की मांग की, शिक्षा में पारदर्शिता और छात्रों के हितों पर ज़ोर दिया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में कोचिंग संस्थानों द्वारा छात्रों और अभिभावकों से ली जा रही भारी-भरकम फीस को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि अब कोचिंग संस्थानों की ‘फीस-ट्रैप’ व्यवस्था खत्म होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई निजी कोचिंग संस्थान शिक्षा को व्यापार बनाकर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
रायपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह बात कही और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
छात्रों और अभिभावकों का शोषण अस्वीकार्य
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि कोचिंग संस्थान:
- एकमुश्त भारी फीस वसूलते हैं
- बीच सत्र छोड़ने पर फीस वापस नहीं करते
- आकर्षक विज्ञापनों से गुमराह करते हैं
जो पूरी तरह से गलत है। उन्होंने इसे छात्रों और अभिभावकों के आर्थिक शोषण की संज्ञा दी।
फीस संरचना में पारदर्शिता जरूरी
उन्होंने मांग की कि:
- कोचिंग संस्थानों की फीस संरचना स्पष्ट हो
- किश्तों में फीस भुगतान की व्यवस्था हो
- नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो
सरकार को इस दिशा में ठोस नीति बनानी चाहिए।
शिक्षा को व्यापार न बनने दें
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास कराना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ संस्थान केवल रैंक और रिजल्ट दिखाकर छात्रों को मानसिक दबाव में डाल रहे हैं।
नियमन कानून की जरूरत
उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य में:
- कोचिंग संस्थानों के पंजीकरण को अनिवार्य किया जाए
- फीस और विज्ञापन पर नियंत्रण हो
- शिकायत निवारण तंत्र मजबूत किया जाए
ताकि छात्रों को न्याय मिल सके।
अभिभावकों से भी की अपील
बृजमोहन अग्रवाल ने अभिभावकों से अपील की कि वे:
- बिना जांच-पड़ताल के मोटी फीस न दें
- कोचिंग के दावों की सत्यता परखें
- बच्चों पर अनावश्यक दबाव न बनाएं
छात्र संगठनों ने किया समर्थन
उनके इस बयान का छात्र संगठनों और अभिभावक संघों ने समर्थन किया है। कई संगठनों ने इसे समय की मांग बताया और सरकार से शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा जताई।
शिक्षा सुधार की दिशा में अहम कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ‘फीस-ट्रैप’ पर नियंत्रण लगाया गया, तो:
- शिक्षा अधिक सुलभ होगी
- छात्रों पर आर्थिक और मानसिक दबाव घटेगा
- गुणवत्ता आधारित शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा

