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दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही नदियों की हालत प्रदेश में 18 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगे, फिर भी नालों का गंदा पानी सीधे नदियों में

📑 इस लेख मेंछत्तीसगढ़ में 18 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट होने के बावजूद नालों का गंदा पानी नदियों में गिर रहा है, जिससे जल प्रदूषण और स्वास्थ्य संकट बढ़…

📅 13 January 2026, 11:14 am अपडेट: 16 May 2026
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छत्तीसगढ़ में 18 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट होने के बावजूद नालों का गंदा पानी नदियों में गिर रहा है, जिससे जल प्रदूषण और स्वास्थ्य संकट बढ़ रहा है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ की नदियों की हालत दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। करोड़ों रुपये की लागत से प्रदेश में 18 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाए जाने के बावजूद शहरों और कस्बों का गंदा नाली-नाला पानी अब भी बिना शोधन के सीधे नदियों में प्रवाहित हो रहा है। इससे न केवल जल प्रदूषण बढ़ रहा है, बल्कि जलीय जीवों, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।


करोड़ों खर्च, फिर भी नतीजा शून्य

राज्य सरकार और नगरीय प्रशासन द्वारा दावा किया गया था कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के जरिए नालों के गंदे पानी को शुद्ध कर ही नदियों में छोड़ा जाएगा। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि—

  • कई STP पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो रहे
  • कुछ प्लांट तकनीकी खामियों से जूझ रहे हैं
  • कई जगह सीवरेज नेटवर्क ही अधूरा है

नतीजतन, नालों का गंदा पानी आज भी महानदी, शिवनाथ, अरपा, खारून और केलो जैसी नदियों में मिल रहा है।


शहरों के आसपास सबसे ज्यादा प्रदूषण

विशेषज्ञों के अनुसार, नदियों का सबसे ज्यादा प्रदूषण शहरी इलाकों के पास देखने को मिल रहा है। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई जैसे बड़े शहरों से निकलने वाला घरेलू और औद्योगिक अपशिष्ट बिना ट्रीटमेंट के नदियों में गिर रहा है।

  • घरेलू सीवेज
  • केमिकल युक्त अपशिष्ट
  • प्लास्टिक और ठोस कचरा

नदियों की प्राकृतिक स्वच्छता को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं।


जलीय जीवों पर संकट

पर्यावरणविदों का कहना है कि बढ़ते प्रदूषण से—

  • मछलियों की संख्या घट रही है
  • जल में ऑक्सीजन का स्तर कम हो रहा है
  • नदी की जैव विविधता प्रभावित हो रही है

कई जगहों पर मरी हुई मछलियां मिलने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं, जो हालात की गंभीरता को दर्शाती हैं।


स्वास्थ्य पर भी खतरा

दूषित नदी का पानी सिंचाई और कभी-कभी पीने के स्रोत के रूप में भी उपयोग किया जाता है। इससे—

  • उल्टी-दस्त
  • त्वचा रोग
  • टाइफाइड और पीलिया

जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।


प्रशासन की सफाई और सवाल

नगरीय प्रशासन का कहना है कि STP संचालन में आ रही दिक्कतों को दूर किया जा रहा है और चरणबद्ध तरीके से सभी प्लांट पूरी क्षमता से चलाए जाएंगे। लेकिन सवाल यह है कि—

  • जब प्लांट लगे हैं तो गंदा पानी क्यों गिर रहा है?
  • जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हो रही?
  • निगरानी तंत्र इतना कमजोर क्यों है?

इन सवालों के जवाब अब भी अधूरे हैं।


पर्यावरणविदों की चेतावनी

पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में नदियां केवल नालों में तब्दील हो जाएंगी। उन्होंने सुझाव दिया है—

  • STP का नियमित ऑडिट
  • सीवरेज नेटवर्क का विस्तार
  • औद्योगिक अपशिष्ट पर सख्त नियंत्रण
  • जनभागीदारी से नदी संरक्षण अभियान

आम जनता में नाराजगी

नदी किनारे बसे गांवों और शहरों के लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि सरकार सिर्फ योजनाएं बना रही है, लेकिन जमीनी अमल नहीं हो रहा। कई सामाजिक संगठनों ने नदी बचाओ आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।


नदियों को बचाना जरूरी

नदियां केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि जीवन रेखा हैं। अगर अभी भी लापरवाही बरती गई तो भविष्य में जल संकट और पर्यावरणीय आपदा तय मानी जा रही है। अब जरूरत है ठोस नीति, सख्त निगरानी और ईमानदार क्रियान्वयन की।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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