राज्य सरकार ने लागू की नई जल दरें, उद्योगों के लिए पानी महंगा

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छत्तीसगढ़ में नई जल दरें लागू, उद्योगों के लिए पानी महंगा हुआ। मिनरल वॉटर, कोल्ड ड्रिंक और डिस्टलरी इकाइयों पर सीधा आर्थिक असर पड़ेगा।

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने औद्योगिक जल उपयोग को लेकर नई जल दरें लागू कर दी हैं। नई दरों के लागू होने के बाद अब उद्योगों के लिए पानी महंगा हो गया है। खास तौर पर मिनरल वॉटर प्लांट, कोल्ड ड्रिंक निर्माण इकाइयों, डिस्टलरी और बड़े पैमाने पर पानी का उपयोग करने वाले उद्योगों पर इसका सीधा असर पड़ने वाला है।

राज्य सरकार का कहना है कि जल संसाधनों के संरक्षण, संतुलित उपयोग और राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। नई जल दरें राज्य के विभिन्न जल स्रोतों—नदियों, जलाशयों, नहरों और भू-जल स्रोतों से औद्योगिक उपयोग के लिए लिए जाने वाले पानी पर लागू होंगी।

उद्योगों के लिए बढ़ा जल शुल्क

नई व्यवस्था के तहत अब उद्योगों को पहले की तुलना में अधिक शुल्क चुकाना होगा। खासकर ऐसे उद्योग जो बड़े पैमाने पर पानी का व्यवसायिक उपयोग करते हैं, जैसे—

  • मिनरल वॉटर और पैकेज्ड ड्रिंक प्लांट
  • कोल्ड ड्रिंक एवं सॉफ्ट ड्रिंक यूनिट
  • डिस्टलरी और शराब निर्माण इकाइयां
  • फूड प्रोसेसिंग और डेयरी आधारित बड़े संयंत्र

इन सभी श्रेणियों में पानी की खपत बहुत अधिक होती है, इसलिए नई दरों से इनकी लागत में उल्लेखनीय वृद्धि तय मानी जा रही है।

जल संरक्षण को लेकर सरकार की मंशा

सरकार का मानना है कि औद्योगिक गतिविधियों में पानी का अंधाधुंध उपयोग लगातार बढ़ रहा है, जिससे भविष्य में पेयजल और सिंचाई की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। इसी को देखते हुए जल की वास्तविक कीमत तय करने और अनावश्यक दोहन को हतोत्साहित करने के लिए नई दरें लागू की गई हैं।

अधिकारियों के अनुसार, नई जल दरों के साथ-साथ उद्योगों को जल पुनर्चक्रण (री-साइक्लिंग) और जल संरक्षण उपाय अपनाने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा।

मिनरल वॉटर और कोल्ड ड्रिंक उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित

राज्य में तेजी से बढ़ रहे मिनरल वॉटर और कोल्ड ड्रिंक प्लांट बड़ी मात्रा में भू-जल और सतही जल का उपयोग करते हैं। नई दरों के बाद इन उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ेगी। उद्योग जगत का मानना है कि इससे बाजार में उत्पादों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मिनरल वॉटर और पैकेज्ड ड्रिंक इंडस्ट्री में पानी ही कच्चा माल होता है। ऐसे में जल दरों में वृद्धि सीधे-सीधे उनकी लागत संरचना को प्रभावित करेगी।

डिस्टलरी और शराब उद्योग पर भी असर

डिस्टलरी और मदिरा निर्माण इकाइयों में भी बड़ी मात्रा में पानी का उपयोग होता है। नई जल दरें लागू होने से इन इकाइयों पर भी अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा। उद्योग संगठन इस बात की आशंका जता रहे हैं कि नई दरें अचानक लागू होने से कई मध्यम श्रेणी की इकाइयों के लिए संचालन महंगा हो सकता है।

उद्योग संगठनों की प्रतिक्रिया

उद्योग संगठनों का कहना है कि जल संरक्षण आवश्यक है, लेकिन नई दरों को लागू करते समय उद्योगों को पर्याप्त समय और चरणबद्ध व्यवस्था मिलनी चाहिए थी। उनका यह भी कहना है कि पहले से ही बिजली, कच्चे माल और परिवहन लागत में वृद्धि का दबाव है, ऐसे में पानी की कीमत बढ़ना उद्योगों के लिए एक और चुनौती बन जाएगा।

हालांकि कुछ औद्योगिक विशेषज्ञों का मानना है कि नई जल नीति से लंबे समय में जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव हो सकेगा।

घरेलू उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा असर

सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि नई जल दरें केवल औद्योगिक उपयोग के लिए लागू की गई हैं। घरेलू जल उपभोक्ताओं और सामान्य नागरिकों के लिए पानी की दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।

इससे आम लोगों को राहत मिलेगी और यह स्पष्ट संकेत भी जाता है कि सरकार का मुख्य उद्देश्य केवल बड़े और व्यावसायिक जल उपयोग को नियंत्रित करना है।

आने वाले समय में निगरानी और सख्ती

जल संसाधन विभाग के अनुसार अब उद्योगों द्वारा पानी के उपयोग की निगरानी और रिपोर्टिंग प्रणाली को और सख्त बनाया जाएगा। जिन इकाइयों में जल का अनावश्यक अपव्यय पाया जाएगा, उन पर अतिरिक्त शुल्क और कार्रवाई भी की जा सकती है।

सरकार का मानना है कि नई जल दरों से न केवल राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि उद्योगों को जल के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए भी प्रेरणा मिलेगी।

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