रायपुर-भिलाई में बदल रही सोच, युवाओं की शादी की उम्र 30-33 साल, दोनों कमाने वाले जीवनसाथी की बढ़ती मांग, करियर प्राथमिकता बनी।
रायपुर / भिलाई। बदलते सामाजिक और आर्थिक परिवेश के साथ युवाओं की सोच में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब युवाओं की प्राथमिकताएं बदल रही हैं और इसका असर विवाह की उम्र पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पहले जहां 22 से 26 वर्ष की उम्र में शादी आम बात थी, वहीं अब युवाओं की शादी की औसत उम्र बढ़कर 30 से 33 वर्ष के बीच पहुंच रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा, करियर, आर्थिक स्थिरता और आत्मनिर्भर बनने की इच्छा ने युवाओं के निर्णय को प्रभावित किया है। खासकर शहरी क्षेत्रों में यह बदलाव तेजी से देखा जा रहा है।
करियर पहले, शादी बाद में
आज के युवा पहले अपने करियर को मजबूत करना चाहते हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी, प्रमोशन और आर्थिक स्थिरता हासिल करने के बाद ही विवाह का निर्णय लिया जा रहा है। युवाओं का मानना है कि आर्थिक रूप से मजबूत होने के बाद ही पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाना आसान होता है।
रायपुर और भिलाई के मैरिज काउंसलर्स का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में शादी की उम्र में लगातार बढ़ोतरी हुई है। पहले जहां लड़कियों की शादी 22-25 साल में हो जाती थी, अब यह बढ़कर 27-30 साल तक पहुंच गई है। वहीं लड़कों की शादी 30-33 साल के बीच हो रही है।
दोनों कमाने वाले जीवनसाथी की बढ़ती मांग
युवाओं की सोच में एक और बड़ा बदलाव यह आया है कि अब वे कामकाजी जीवनसाथी को प्राथमिकता दे रहे हैं। युवा चाहते हैं कि पति-पत्नी दोनों कमाएं, जिससे आर्थिक जिम्मेदारियां साझा हो सकें और बेहतर जीवन स्तर बनाया जा सके।
कई युवाओं का कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवनशैली के खर्च को देखते हुए दोहरी आय जरूरी हो गई है। इससे भविष्य की योजनाओं जैसे घर खरीदना, बच्चों की शिक्षा और अन्य जरूरतों को पूरा करना आसान होता है।
परिवार भी स्वीकार कर रहे बदलाव
पहले जहां परिवार जल्दी शादी कराने पर जोर देते थे, अब परिवार भी बच्चों के करियर को प्राथमिकता देने लगे हैं। माता-पिता भी चाहते हैं कि उनके बच्चे पहले आत्मनिर्भर बनें और फिर विवाह करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव समाज में सकारात्मक संकेत है, क्योंकि इससे वैवाहिक जीवन अधिक स्थिर और जिम्मेदार बन रहा है।
पढ़ाई और करियर का प्रभाव
उच्च शिक्षा और पेशेवर कोर्स करने के कारण युवाओं की पढ़ाई लंबी हो गई है। इसके बाद नौकरी और करियर बनाने में समय लगता है, जिससे शादी की उम्र स्वाभाविक रूप से बढ़ रही है।
आईटी, बैंकिंग, शिक्षा, मेडिकल और कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने वाले युवा इस बदलाव में सबसे आगे हैं।
देर से शादी के फायदे
विशेषज्ञों का मानना है कि देर से शादी करने के कई फायदे भी हैं। इससे जीवनसाथी का चयन सोच-समझकर किया जाता है और वैवाहिक जीवन में परिपक्वता आती है। आर्थिक स्थिरता के कारण पारिवारिक जीवन भी बेहतर होता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी बदलाव
यह बदलाव अब धीरे-धीरे छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है। शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ने से युवाओं की सोच बदल रही है।
समाज में बदलती सोच
समाज में यह बदलाव नई जीवनशैली और आधुनिक सोच का संकेत माना जा रहा है। अब शादी को जीवन का पहला लक्ष्य नहीं बल्कि जीवन का महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, बदलती जीवनशैली, करियर प्राथमिकता और आर्थिक स्थिरता की चाह ने विवाह की उम्र को बढ़ा दिया है। युवाओं की यह नई सोच समाज में सकारात्मक बदलाव का संकेत दे रही है।

