रायपुर में SIR के दौरान 2.15 लाख वोटरों के पिता के नाम और 6 हजार की उम्र में गड़बड़ी सामने आई, मतदाता सूची पर उठे सवाल।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में चल रही SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मतदाता सूची के गहन सत्यापन में यह खुलासा हुआ है कि 2.15 लाख से अधिक वोटरों के पिता के नाम में त्रुटियां पाई गई हैं, वहीं करीब 6 हजार मतदाताओं की उम्र में गंभीर गड़बड़ी दर्ज की गई है। इस खुलासे के बाद निर्वाचन व्यवस्था और डेटा एंट्री प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।
निर्वाचन विभाग द्वारा मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से शुरू किए गए SIR अभियान में सामने आई ये विसंगतियां आगामी चुनावों से पहले बड़ी चुनौती बन सकती हैं।
पिता के नाम में भारी चूक
SIR के दौरान पता चला कि लाखों मतदाताओं के—
- पिता के नाम गलत दर्ज हैं
- नाम की स्पेलिंग में अंतर है
- कुछ मामलों में पिता का नाम खाली छोड़ा गया है
- कहीं माता का नाम पिता के स्थान पर दर्ज है
इन त्रुटियों के कारण न केवल पहचान सत्यापन में परेशानी हो रही है, बल्कि मतदाता के अधिकारों पर भी असर पड़ सकता है।
उम्र में गड़बड़ी, सवालों के घेरे में सिस्टम
जांच में यह भी सामने आया है कि 6 हजार से अधिक मतदाताओं की उम्र में असामान्य अंतर पाया गया है। कुछ मामलों में—
- 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल हैं
- उम्र वास्तविकता से कहीं अधिक दर्ज है
- जन्मतिथि और उम्र का मेल नहीं बैठ रहा
इन गड़बड़ियों से फर्जी मतदाता, डुप्लीकेट एंट्री और गलत दस्तावेजों की आशंका भी जताई जा रही है।
दस्तावेजों की कमी बनी बड़ी वजह
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार इन त्रुटियों के पीछे प्रमुख कारण—
- पुराने रिकॉर्ड का डिजिटल माइग्रेशन
- आधार, जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों की कमी
- पहले हुए नामांकन में लापरवाही
- नागरिकों द्वारा समय पर सुधार न कराना
बताया जा रहा है कि कई मतदाताओं ने वर्षों से अपनी जानकारी अपडेट नहीं कराई थी।
सुधार के लिए विशेष अभियान
जिला निर्वाचन कार्यालय ने इन गड़बड़ियों को दूर करने के लिए—
- विशेष सुधार शिविर
- बीएलओ के माध्यम से घर-घर सत्यापन
- ऑनलाइन और ऑफलाइन सुधार सुविधा
- दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया
शुरू की है। अधिकारियों ने मतदाताओं से अपील की है कि वे समय रहते अपनी जानकारी सही कराएं।
विपक्ष ने उठाए सवाल
इस खुलासे के बाद विपक्षी दलों ने सरकार और निर्वाचन तंत्र पर सवाल उठाए हैं। नेताओं का कहना है कि—
- इतनी बड़ी संख्या में गलतियां लोकतंत्र के लिए खतरा हैं
- मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है
- निष्पक्ष चुनाव के लिए पारदर्शी प्रक्रिया जरूरी है
कुछ नेताओं ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग भी की है।
निर्वाचन आयोग का पक्ष
निर्वाचन आयोग के अधिकारियों का कहना है कि—
- SIR का उद्देश्य ही ऐसी गड़बड़ियों को पकड़ना है
- अभी प्रारंभिक आंकड़े सामने आए हैं
- अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले सभी त्रुटियां सुधारी जाएंगी
उन्होंने मतदाताओं को आश्वस्त किया है कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा।
आम मतदाताओं में चिंता
वोटरों का कहना है कि—
- गलती सुधार की प्रक्रिया जटिल है
- बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं
- ग्रामीण और बुजुर्ग मतदाताओं को ज्यादा परेशानी हो रही है
लोगों ने प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने की मांग की है।
निष्कर्ष
रायपुर में SIR के दौरान सामने आई भारी गड़बड़ियां यह दर्शाती हैं कि मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना है। समय रहते सुधार नहीं हुआ तो इसका असर आगामी चुनावों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर पड़ सकता है।

