छत्तीसगढ़ में आईएएस के 29 और आईपीएस के 19 पद खाली हैं। चुनाव ड्यूटी में 30 और अधिकारी जाएंगे, जिससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होने की आशंका है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रशासन इस समय अफसरों की भारी कमी से जूझ रहा है। राज्य में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 29 पद और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 19 पद वर्तमान में रिक्त पड़े हैं। इस बीच आगामी चुनावी तैयारियों के चलते करीब 30 और वरिष्ठ अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी में तैनात किया जाएगा, जिससे राज्य के कई विभागों और जिलों में प्रशासनिक कामकाज के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
सूत्रों के अनुसार, अफसरों की कमी का असर पहले से ही विकास कार्यों, योजनाओं की मॉनिटरिंग और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों पर दिखने लगा है।
आईएएस-आईपीएस दोनों कैडर में भारी कमी
राज्य कैडर में स्वीकृत पदों की तुलना में वर्तमान में 29 आईएएस और 19 आईपीएस अधिकारियों के पद खाली हैं। कई जिलों और महत्वपूर्ण विभागों में अधिकारियों को दो-दो, तीन-तीन जिम्मेदारियां संभालनी पड़ रही हैं।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि लगातार बढ़ते कार्यभार के बीच अफसरों पर दबाव भी बढ़ता जा रहा है।
चुनाव ड्यूटी से और बढ़ेगी परेशानी
आगामी चुनाव प्रक्रिया को देखते हुए राज्य से लगभग 30 अधिकारियों को निर्वाचन कार्यों के लिए प्रतिनियुक्त किया जाना तय माना जा रहा है। इनमें जिला स्तर से लेकर विभागीय स्तर तक के अधिकारी शामिल होंगे।
इन अधिकारियों के चुनाव कार्यों में चले जाने के बाद कई विभागों में निर्णय प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है।
विकास कार्यों पर पड़ेगा असर
अफसरों की कमी का सीधा असर विकास परियोजनाओं की निगरानी, स्वीकृति प्रक्रिया और समय पर कार्य पूर्ण कराने पर पड़ सकता है। निर्माण, नगरीय प्रशासन, पंचायत, राजस्व और जल संसाधन जैसे विभागों में पहले से ही सीमित मानव संसाधन के साथ काम किया जा रहा है।
कई योजनाओं की फाइलें समय पर निपट नहीं पा रही हैं।
कानून-व्यवस्था पर भी दबाव
आईपीएस अधिकारियों के पद रिक्त होने से पुलिस प्रशासन पर भी अतिरिक्त दबाव बन रहा है। कई जिलों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इससे कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और विशेष अभियानों की निगरानी प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े शहरों और संवेदनशील क्षेत्रों में पर्याप्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी बेहद जरूरी होती है।
एक अधिकारी, कई जिम्मेदारियां
राज्य में कई जगहों पर एक ही अधिकारी को दो विभागों का प्रभार दिया गया है। इससे निर्णय लेने में देरी और फील्ड स्तर पर निगरानी कमजोर होने की स्थिति बन रही है।
अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय तक इस व्यवस्था से प्रशासनिक गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।
जल्द भरने की जरूरत
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि केंद्र सरकार और राज्य शासन के स्तर पर समन्वय कर जल्द से जल्द रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया तेज करनी होगी, ताकि प्रशासनिक ढांचे को मजबूती मिल सके।
इसके साथ ही कैडर प्रबंधन और पदस्थापना नीति पर भी पुनर्विचार जरूरी बताया जा रहा है।
रायपुर से पूरे राज्य पर असर
राजधानी रायपुर स्थित प्रमुख विभागों में वरिष्ठ अधिकारियों की कमी का असर पूरे प्रदेश के प्रशासनिक कामकाज पर पड़ता है। नीतिगत फैसलों से लेकर फील्ड क्रियान्वयन तक की प्रक्रिया धीमी होने की आशंका बनी हुई है।

