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राज्य में शिक्षकों का गंभीर संकट जरूरत से 51,663 शिक्षक कम, सात महीने में 6 हजार ने छोड़ी नौकरी या हुए रिटायर

📑 इस लेख मेंछत्तीसगढ़ में शिक्षकों की भारी कमी, राज्य में 51,663 पद खाली, सात महीनों में 6 हजार शिक्षक नौकरी छोड़ चुके या सेवानिवृत्त हुए।हर स्तर पर…

📅 22 December 2025, 11:30 am अपडेट: 16 May 2026
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छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की भारी कमी, राज्य में 51,663 पद खाली, सात महीनों में 6 हजार शिक्षक नौकरी छोड़ चुके या सेवानिवृत्त हुए।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था एक गंभीर संकट से गुजर रही है। राज्य में 51,663 शिक्षकों की कमी सामने आई है, जिससे प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक पढ़ाई प्रभावित हो रही है। हालात और चिंताजनक तब हो गए, जब बीते सात महीनों में करीब 6,000 शिक्षक या तो नौकरी छोड़ चुके हैं या सेवानिवृत्त हो गए हैं।

शिक्षा विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, यह कमी लगातार बढ़ती जा रही है, जबकि नई नियुक्तियों की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है।


हर स्तर पर शिक्षकों की कमी

राज्य में—

  • प्राथमिक स्कूल
  • मिडिल स्कूल
  • हाई स्कूल
  • हायर सेकेंडरी स्कूल

सभी स्तरों पर शिक्षकों की भारी कमी दर्ज की गई है। ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में स्थिति और भी खराब है, जहां कई स्कूल एक या दो शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रहे हैं।


छात्रों की पढ़ाई पर असर

शिक्षकों की कमी का सीधा असर छात्रों की शिक्षा पर पड़ रहा है—

  • कई विषयों की नियमित कक्षाएं नहीं हो पा रहीं
  • एक शिक्षक को कई कक्षाओं का भार
  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावित
  • परीक्षा परिणामों पर भी असर

अभिभावकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ता जा रहा है।


सात महीने में 6 हजार शिक्षकों की कमी कैसे?

शिक्षा विभाग के अनुसार—

  • बड़ी संख्या में शिक्षक सेवानिवृत्त हुए
  • कुछ शिक्षकों ने निजी क्षेत्र या अन्य सेवाओं में जाना चुना
  • स्थानांतरण और पदोन्नति से भी कई पद रिक्त हुए

इन पदों की भरपाई समय पर नहीं हो पाने से कुल कमी और बढ़ गई।


सरकार और विभाग की स्थिति

शिक्षा विभाग का कहना है कि—

“शिक्षकों की भर्ती को लेकर प्रक्रिया चल रही है। रिक्त पदों की समीक्षा की जा रही है और जल्द ही चरणबद्ध तरीके से नियुक्तियां की जाएंगी।”

हालांकि, शिक्षक संगठनों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में देरी और नीतिगत अस्पष्टता के कारण हालात बिगड़ते जा रहे हैं।


शिक्षक संगठनों की मांग

राज्य के शिक्षक संगठनों ने सरकार से—

  • तत्काल बड़े पैमाने पर भर्ती
  • अतिशेष शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण
  • अतिथि और संविदा शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति
  • रिटायरमेंट के बाद भी अनुभवी शिक्षकों की सेवाएं लेने

जैसी मांगें रखी हैं।


शिक्षा के अधिकार पर सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस संकट का समाधान नहीं किया गया, तो—

  • शिक्षा का अधिकार अधिनियम
  • छात्र-शिक्षक अनुपात
  • सरकारी स्कूलों की साख

पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।


ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा असर

ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षक नहीं मिलने से—

  • स्कूलों में नामांकन घट रहा है
  • ड्रॉपआउट दर बढ़ रही है
  • निजी स्कूलों की ओर रुझान बढ़ रहा है

जो सामाजिक असमानता को और गहरा कर सकता है।


आगे क्या?

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि—

  • भर्ती प्रक्रिया को तेज करना
  • डिजिटल और हाइब्रिड शिक्षण के विकल्प
  • शिक्षक प्रशिक्षण और प्रोत्साहन

जैसे कदम उठाकर ही हालात सुधारे जा सकते हैं।


निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की कमी अब सिर्फ आंकड़ों की समस्या नहीं रही, बल्कि यह पूरी शिक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बन चुकी है। यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ सकता है।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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