सरकारी नौकरी के साथ प्राकृतिक खेती में प्रतिमा रॉय ने रचा नया अध्याय
सरकारी सेवा में रहते हुए भी, प्रतिमा रॉय ने अपनी 1.12 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती का एक सफल मॉडल विकसित किया है। उनका यह एकीकृत कृषि मॉडल न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि स्वस्थ, रसायनमुक्त खाद्य सामग्री भी प्रदान करता है।
कोरबा, छत्तीसगढ़। सरकारी सेवा के साथ प्राकृतिक खेती में एक नया अध्याय रचकर प्रतिमा रॉय ने यह साबित कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और नवाचारी सोच से हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। सीएसईबी, कोरबा में कार्यरत प्रतिमा रॉय ने अपनी 1.12 एकड़ भूमि पर एक ऐसा एकीकृत एवं प्राकृतिक खेती मॉडल विकसित किया है, जो न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और रसायनमुक्त खाद्य सामग्री भी उपलब्ध करा रहा है। उनकी यह पहल ग्रामीण विकास और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सरकारी नौकरी संग कृषि का अनूठा संगम
अक्सर देखा जाता है कि सरकारी नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ किसी अन्य बड़े कार्य को सफलतापूर्वक निभाना कठिन होता है, लेकिन प्रतिमा रॉय ने इस धारणा को बदल दिया है। छत्तीसगढ़ कॉलेज, दुर्ग-भिलाई की बी.एससी. कृषि अंतिम वर्ष की छात्रा अकांक्षा बेन द्वारा लिए गए एक विशेष साक्षात्कार में प्रतिमा रॉय ने अपनी कृषि यात्रा और सफलता के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने समय का कुशल प्रबंधन करते हुए अपनी कृषि भूमि को एक प्रयोगशाला में बदल दिया, जहाँ प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों को व्यवहार में लाया गया।
1.12 एकड़ में विकसित एकीकृत एवं प्राकृतिक खेती मॉडल
प्रतिमा रॉय ने अपनी लगभग सवा एकड़ भूमि पर एक बहुआयामी एकीकृत एवं प्राकृतिक खेती मॉडल विकसित किया है। उनके खेत में धान, मक्का, विभिन्न प्रकार की सब्जियां जैसे टमाटर, बैंगन, भिंडी और कई फलदार पौधे जैसे पपीता, केला आदि उगाए जाते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन सभी फसलों की खेती पूरी तरह से प्राकृतिक पद्धति से की जाती है। वे रासायनिक उर्वरकों और हानिकारक कीटनाशकों का प्रयोग बिल्कुल नहीं करतीं। इसके बजाय, गोबर खाद, पोल्ट्री अपशिष्ट और पोल्ट्री फीड वेस्ट को जैविक खाद के रूप में उपयोग किया जाता है। यह विधि न केवल मिट्टी की उर्वरता और गुणवत्ता को बनाए रखती है, बल्कि उपभोक्ताओं को भी सुरक्षित, रसायनमुक्त और पौष्टिक खाद्य सामग्री सुनिश्चित करती है, जो सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा है।
बेहतर उत्पादन और टिकाऊ कृषि का प्रमाण
इस वर्ष लगभग 60 डिसमिल भूमि में की गई धान की प्राकृतिक खेती से करीब 10 क्विंटल का प्रभावशाली उत्पादन प्राप्त हुआ है। यह आंकड़ा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सीमित संसाधनों के साथ भी वैज्ञानिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाकर उत्कृष्ट परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। प्रतिमा रॉय के खेत में फसल उत्पादन के साथ-साथ मत्स्य पालन और 100 से अधिक पक्षियों वाली पोल्ट्री यूनिट का भी सफल संचालन किया जा रहा है। यह एकीकृत कृषि मॉडल एक-दूसरे पर निर्भर करता है, जहाँ एक इकाई का अपशिष्ट दूसरी इकाई के लिए मूल्यवान संसाधन बन जाता है। उदाहरण के लिए, पोल्ट्री अपशिष्ट का उपयोग खाद के रूप में होता है और मछली पालन का पानी पौधों के लिए पोषक तत्वों से भरपूर होता है। यह समन्वय उत्पादन लागत को काफी कम करता है और आय के कई स्रोत विकसित करता है, जिससे प्राकृतिक खेती अधिक लाभकारी और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ बन जाती है।
महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत
प्रतिमा रॉय की यह उपलब्धि ग्रामीण युवाओं, किसानों और विशेष रूप से महिलाओं के लिए एक सशक्त प्रेरक उदाहरण है। सरकारी नौकरी की व्यस्तताओं के बावजूद खेती के प्रति उनका अटूट समर्पण, अनुशासन और उत्कृष्ट प्रबंधन क्षमता सराहनीय है। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि महिलाएं आज केवल घर और नौकरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कृषि नवाचार, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि कम लागत में अधिक लाभ देने वाला एक प्रभावी और टिकाऊ कृषि मॉडल भी है, जो स्वस्थ समाज की नींव रखता है।
विरात महानगर का विश्लेषण: प्रतिमा रॉय की कहानी छत्तीसगढ़ के कृषि परिदृश्य में एक नई उम्मीद जगाती है। यह दिखाती है कि कैसे पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों का समन्वय करके टिकाऊ और लाभकारी कृषि को बढ़ावा दिया जा सकता है। उनकी यह पहल न केवल आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में एक कदम है, बल्कि रासायनिक मुक्त भोजन उपलब्ध कराकर समाज के स्वास्थ्य में भी योगदान दे रही है। यह मॉडल अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती अपनाने और अपनी आय के स्रोतों में विविधता लाने के लिए प्रेरित करेगा।


प्राकृतिक खेती — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q. प्रतिमा रॉय कौन हैं और उनकी मुख्य उपलब्धि क्या है?
A. प्रतिमा रॉय सीएसईबी, कोरबा में कार्यरत एक सरकारी कर्मचारी हैं, जिन्होंने अपनी 1.12 एकड़ भूमि पर एकीकृत एवं प्राकृतिक खेती का सफल मॉडल विकसित किया है।
Q. प्रतिमा रॉय की खेती की मुख्य विशेषता क्या है?
A. उनकी खेती पूरी तरह से प्राकृतिक पद्धति पर आधारित है, जिसमें रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता। वे जैविक खाद जैसे गोबर खाद और पोल्ट्री अपशिष्ट का प्रयोग करती हैं।
Q. एकीकृत कृषि मॉडल से क्या लाभ होता है?
A. एकीकृत कृषि मॉडल में फसल उत्पादन, मत्स्य पालन और पोल्ट्री को एक साथ जोड़ा जाता है, जिससे एक इकाई का अपशिष्ट दूसरी के लिए संसाधन बन जाता है। इससे उत्पादन लागत कम होती है और आय के कई स्रोत विकसित होते हैं, जिससे प्राकृतिक खेती अधिक लाभकारी बनती है।
Q. प्रतिमा रॉय की सफलता से समाज को क्या प्रेरणा मिलती है?
A. उनकी सफलता महिलाओं, युवाओं और किसानों को प्रेरणा देती है कि दृढ़ संकल्प और नवाचार से सरकारी नौकरी के साथ भी टिकाऊ कृषि और आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है, जिससे स्वस्थ भोजन का उत्पादन होता है।
Q. क्या प्राकृतिक खेती आर्थिक रूप से लाभकारी है?
A. प्रतिमा रॉय के अनुभव से यह स्पष्ट है कि प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि बेहतर उत्पादन और कम लागत के कारण आर्थिक रूप से भी अत्यधिक लाभकारी और टिकाऊ कृषि मॉडल है।
संबंधित लेख — और पढ़ें
- मुख्यमंत्री साय: सशक्त समाज ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला
- राज्यपाल ने बताया: चार्टर्ड अकाउंटेंट की भूमिका केवल वित्तीय सलाहकार तक सीमित नहीं
- रायपुर में राष्ट्रीय जल क्रीड़ा महाकुंभ: मुख्यमंत्री साय ने कहा – खेल प्रतिभाओं को मिलेगा बेहतर मंच
आधिकारिक संदर्भ: भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI)
आपकी राय जरूरी है
इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया WhatsApp / Telegram पर भेजें — हम पढ़ते हैं, जवाब देते हैं, और बेहतर खबरें लाते हैं।
अन्य श्रेणियों से ताज़ा

सुशासन शिविर में हाथों-हाथ मिला योजनाओं का लाभ’

मध्य प्रदेश में शहीद परिवारों को बड़ा सम्मान, हर कोर्स में पत्नी और बच्चों के लिए सीट आरक्षित

मोहन कैबिनेट में बड़े फेरबदल की अटकलें, रिपोर्ट कार्ड के आधार पर कई मंत्रियों की छुट्टी तय?
