पीएम आवास योजना शहरी के तहत निर्माणाधीन 25 हजार अधूरे मकानों को सरकार से राहत, हितग्राहियों को बकाया राशि देकर घर निर्माण पूरा कराया जाएगा।
रायपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत घर बनाने का सपना देख रहे हजारों हितग्राहियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। योजना की समय-सीमा समाप्त होने के बावजूद छत्तीसगढ़ में निर्माणाधीन लगभग 25 हजार शहरी आवासों के हितग्राहियों को अब शेष अनुदान राशि मिलने का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार और केंद्र के बीच समन्वय के बाद यह फैसला लिया गया है, जिससे अधूरे मकानों के निर्माण को पूरा किया जा सकेगा।
योजना खत्म, लेकिन अधूरे मकान बने बड़ी चुनौती
पीएम आवास योजना (शहरी) की अवधि समाप्त होने के बाद राज्य के कई नगरीय निकायों में हजारों मकान अधूरे रह गए थे। राशि अटकने के कारण हितग्राही निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ा पा रहे थे। कई जगहों पर नींव या ढांचा बनकर तैयार था, लेकिन आगे का काम धनाभाव में ठप पड़ा हुआ था।
इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने विशेष पहल करते हुए निर्माणाधीन आवासों को वित्तीय सहायता देने का निर्णय लिया है।
किसे मिलेगा लाभ?
इस राहत का लाभ उन हितग्राहियों को मिलेगा—
- जिनके मकानों का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है
- जो पीएम आवास योजना (शहरी) के पात्र हैं
- जिनके आवास अधूरे हैं लेकिन जियो-टैगिंग और तकनीकी सत्यापन पूरा हो चुका है
सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में लगभग 25 हजार ऐसे मकान हैं, जो निर्माणाधीन अवस्था में हैं और जिनका भुगतान अटका हुआ था।
कैसे मिलेगी राशि?
सरकार द्वारा स्पष्ट किया गया है कि—
- हितग्राहियों को बकाया किस्तें सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएंगी
- भुगतान चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा
- निर्माण की प्रगति के आधार पर राशि जारी होगी
- नगर निगम और नगर पालिकाएं इसकी निगरानी करेंगी
इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि राशि का उपयोग केवल मकान निर्माण में ही हो।
नगरीय निकायों को दिए गए निर्देश
राज्य शासन ने सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को निर्देश दिए हैं कि वे जल्द से जल्द निर्माणाधीन आवासों का भौतिक सत्यापन करें और पात्र हितग्राहियों की सूची अपडेट करें। साथ ही, जियो-टैगिंग और दस्तावेजों की प्रक्रिया को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
हितग्राहियों में खुशी की लहर
सरकार के इस फैसले से हितग्राहियों में खुशी का माहौल है। कई परिवार जो वर्षों से अधूरे मकानों में या किराए के घरों में रह रहे थे, अब अपने पक्के घर के सपने को पूरा कर सकेंगे। हितग्राहियों का कहना है कि यदि समय पर राशि मिल जाती है, तो वे जल्द ही निर्माण पूरा कर लेंगे।
विशेषज्ञों की राय
आवास और शहरी विकास से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय सामाजिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। अधूरे मकानों का निर्माण पूरा होने से शहरी गरीबों को स्थायी आवास मिलेगा और शहरों में अव्यवस्थित बस्तियों की समस्या भी कम होगी।
सरकार का पक्ष
सरकार का कहना है कि किसी भी पात्र हितग्राही को योजना समाप्त होने के कारण नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। जिन लोगों ने निर्माण शुरू कर दिया है, उन्हें पूरा सहयोग दिया जाएगा ताकि योजना के वास्तविक उद्देश्यों को पूरा किया जा सके।
भविष्य की योजना
सरकार भविष्य में नई आवासीय योजनाओं को अधिक व्यावहारिक और समयबद्ध बनाने पर भी विचार कर रही है, ताकि इस तरह की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

