छत्तीसगढ़ में मिलरों की मनमानी से राशन व्यवस्था संकट में, गोदामों में चावल खत्म, उचित मूल्य दुकानों पर सप्लाई बाधित, गरीब परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) एक बार फिर संकट के दौर से गुजर रही है। राज्य के कई जिलों में सरकारी गोदामों में चावल का स्टॉक तेजी से घट रहा है, वहीं उचित मूल्य दुकानों तक समय पर सप्लाई नहीं पहुंच पा रही है। इसके पीछे मिलरों की मनमानी और धीमी डिलीवरी प्रक्रिया को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
खाद्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, धान खरीदी के बाद चावल मिलिंग का कार्य तय समय-सीमा में पूरा नहीं हो पा रहा है, जिससे गोदाम खाली होते जा रहे हैं और राशन दुकानों पर चावल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
🚨 गोदामों में तेजी से घटा चावल का स्टॉक
राज्य के कई वेयरहाउस और एफसीआई से जुड़े गोदामों में चावल का भंडारण न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। कुछ स्थानों पर तो एक-दो सप्ताह का ही स्टॉक शेष बताया जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि—
- मिलरों द्वारा तय मात्रा में चावल जमा नहीं किया जा रहा
- मिलिंग कार्य में जानबूझकर देरी की जा रही है
- अनुबंध शर्तों के बावजूद समय पर सप्लाई नहीं दी जा रही
इसका सीधा असर राशन दुकानों पर दिखाई देने लगा है।
🏪 उचित मूल्य दुकानों पर संकट
रायपुर सहित कई जिलों में उचित मूल्य दुकानदारों का कहना है कि—
- तय तारीख पर चावल नहीं मिल रहा
- उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटाना पड़ रहा है
- वितरण में देरी से विवाद की स्थिति बन रही है
एक राशन दुकानदार ने बताया,
“लोग रोज दुकान आकर पूछते हैं कि चावल कब मिलेगा, लेकिन गोदाम से ही सप्लाई नहीं आ रही।”
⚖️ मिलरों की मनमानी का आरोप
खाद्य विभाग और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, कई मिलर—
- ज्यादा मुनाफे के चक्कर में चावल की सप्लाई रोक रहे हैं
- खुले बाजार में बेचने के लिए स्टॉक रोककर रख रहे हैं
- मिलिंग कार्य को जानबूझकर धीमा कर रहे हैं
हालांकि मिलर संघ इन आरोपों को खारिज करते हुए कहते हैं कि—
- बिजली, मजदूरी और परिवहन लागत बढ़ने से काम प्रभावित हुआ है
- भुगतान में देरी के कारण मिलिंग की गति धीमी पड़ी है
📉 गरीबों पर सीधा असर
सप्लाई बाधित होने का सबसे ज्यादा असर—
- गरीब परिवारों
- अंत्योदय और प्राथमिकता श्रेणी के कार्डधारकों
- मजदूर वर्ग
पर पड़ रहा है। कई परिवारों के लिए सरकारी राशन ही जीवन का सहारा है। चावल की कमी से—
- घरेलू बजट बिगड़ रहा है
- बाजार से महंगा चावल खरीदने की मजबूरी बन रही है
🏛️ खाद्य विभाग की सफाई
खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। विभाग ने—
- मिलरों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की है
- डिलीवरी में देरी पर जुर्माना लगाने की चेतावनी दी है
- वैकल्पिक गोदामों से सप्लाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार,
“किसी भी हाल में गरीबों का राशन प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। दोषी मिलरों पर कड़ी कार्रवाई होगी।”
🔍 प्रशासनिक सख्ती की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार—
- मिलरों के अनुबंध की समीक्षा कर रही है
- बार-बार लापरवाही करने वालों के लाइसेंस निरस्त करने पर विचार कर रही है
- चावल परिवहन और भंडारण की नई मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू कर सकती है
यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह संकट और गहरा सकता है।
⚠️ भविष्य की चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि—
- मिलिंग और सप्लाई चेन को समय पर दुरुस्त नहीं किया गया
- भुगतान और अनुबंध प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं लाई गई
तो आने वाले महीनों में राज्य में राशन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।

